लंदन मस्जिद की 'इनक्लूसिव' दौड़ में लड़कियों पर पाबंदी: शरिया का साया या समानता का उल्लंघन?
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लंदन मस्जिद की ‘इनक्लूसिव’ दौड़ में लड़कियों पर पाबंदी: शरिया का साया या समानता का उल्लंघन?

लंदन की ईस्ट लंदन मस्जिद की 'इनक्लूसिव' दौड़ में 12+ लड़कियों पर पाबंदी ने हंगामा मचा दिया। शरिया प्रभाव, इक्वालिटी एक्ट उल्लंघन और लैंगिक भेदभाव के आरोप। क्या ब्रिटेन में महिलाओं के अधिकार खतरे में? पूरी डिटेल्स पढ़ें।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Oct 14, 2025, 11:25 am IST
inविश्व, विश्लेषण
London Sharia girls ban

प्रतीकात्मक तस्वीर

ब्रिटेन में लंदन में एक लिबरल राज्य में inclusive अर्थात समावेश के नाम पर वहाँ की एक मस्जिद में आयोजित एक दौड़ में समावेशीकरण का मजाक उड़ाते हुए, 12 वर्ष से अधिक की लड़कियों को भाग लेने की मनाही पर बहस छिड़ी है। लंदन की एक मस्जिद ने ईस्ट लंदन पार्क में 12 अक्टूबर को एक दौड़ का आयोजन कराया, और जिसे inclusive और family friendly कहा गया और इसमें सभी उम्र के लड़के और आदमी भाग ले सकते थे, मगर आयोजकों ने कहा कि इसमें न ही किशोरियाँ और न ही महिलाएं भाग ले सकती हैं। उन्होनें कहा कि 12 वर्ष से अधिक उम्र की लड़कियां और महिलाएं, इस आयोजन में भाग लेने से बचें।

अब इसे लेकर हर जगह आलोचना हो रही है और इस आयोजन पर और इस आयोजन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे पहला प्रश्न तो यही कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है कि लड़कियों को इस आयोजन से बाहर ही कर दिया जाए? और यह कैसी मानसिकता है जिसे 12 वर्ष से अधिक की लड़कियों से खतरा महसूस हो। मुस्लिम चैरिटी रन ने इसके लिए फंड रेज़र का काम किया था और इसकी आयोजन ईस्ट लंदन मस्जिद थी और और इसका आयोजन टावर हेमलेट्स में विक्टोरिया पार्क में हुआ था।

शरिया लागू करने की कोशिश 

डेली मेल के अनुसार स्थानीय शासन की कमान एस्पायर पार्टी के हाथों में है, जिसकी स्थापना बांग्लादेश मूल के राजनेता लुटफुर रहमान ने की थी, जो पूर्व में एक लेबर काउंसिलर था और जिसे चुनावी फ्रॉड के चलते 2015 में हटा दिया गया था, मगर फिर से 2022 में वह निर्वाचित हुआ। लोगों का कहना है कि जिस प्रकार से 12 वर्ष से अधिक की लड़कियों को इस आयोजन से दूर रखा गया, वह क्षेत्र पर शरिया के प्रभावों को दिखाता है और यह भी कहा जा रहा है कि ब्रिटिश मूल्यों के स्थान पर इस्लामी रवायतें हावी हो रही हैं।

express.co.uk के अनुसार इस आयोजन की वेबसाइट पर लिखा था, “सभी भाग ले सकते हैं: रनर, वाकर, और बच्चे (12 साल से कम उम्र की लड़कियाँ और किसी भी उम्र के लड़के), साथ ही दर्शक या स्वयंसेवक के रूप में परिवार और दोस्त। चाहे आप 5 किमी दौड़ में भाग ले रहे हों या किनारे बैठकर आप उत्साह बढ़ा रहे हों, आपका इस आयोजन में स्वागत है!”

ईस्ट लंदन मस्जिद ने किया समानता के अधिकार का उल्लंघन

इक्वालिटी एक्ट का उल्लंघन भी इस कृत्य के माध्यम से ईस्ट लंदन मस्जिद ने किया है। डेली मेल के अनुसार जब उन्होंने इक्वालिटी एंड हयूमें राइट्स कमिशन से शिकायत की, तो उन्होंने कहा कि वे इस मामले को देखेंगे। इसके साथ ही मुस्लिम वुमन नेटवर्क यूके की सीईओ, बरोनेस शाइस्ता ने कहा कि ईस्ट लंदन मस्जिद का यह कदम इक्वालिटी एक्ट का संभावित उल्लंघन है। फेमिनिस्ट समूह पार्टी ऑफ वुमन की संस्थापक केली जे कीन ने भी चिंता जताते हुए, कहा कि पार्क में हुई दौड़ के नियम “गंभीर सवाल खड़े करते हैं कि उनकी कितनी चैरिटेबल गतिविधियाँ समानता अधिनियम का उल्लंघन भी कर सकती हैं।”

महिलाओं के प्रति लैंगिक दुर्भाव

उन्होंने यह भी कहा कि 12 वर्ष से अधिक की लड़कियों का इस प्रकार किसी आयोजन में भाग न लेने देना, पूरी तरह से गैर कानूनी है और महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के स्थान के प्रति लैंगिक दुर्भाव का एक माध्यम है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना के विरोध में लोग लिख रहे हैं और यह प्रश्न कर रहे हैं कि ब्रिटेन में क्या शरिया लागू हो गया है? हर साल होने वाला यह आयोजन वर्ष 2012 से “रन फॉर योर मॉस्क” के नाम पर किया जा रहा है। वर्ष 2018 में गार्डीअन में रेमोना अली का एक लेख प्रकाशित हुआ था, उसमें उन्होनें लिखा था कि यूके की मस्जिदों को महिलाओं के लिए स्थान बनाना चाहिए, न कि उन्हें भगाना चाहिए। इसमें ब्रिटेन की तमाम मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर कई तथ्य रखे गए थे कि कैसे ब्रिटेन की कुछ मस्जिदों में भी मुस्लिम महिलाओं के लिए स्थान नहीं है।

मगर वर्तमान में आयोजित इस घटना में भी महिलाओं के प्रति दोयम व्यवहार का उदाहरण सामने आया है। हालांकि इस बात को मानने के बाद भी कि इस आयोजन में 12 वर्ष से अधिक की लड़कियों के भाग लेने पर पाबंदी है, आयोजकों ने यह मानने से इनकार कर दिया कि उन्होनें इक्वालिटी एक्ट का उल्लंघन किया है। हालांकि वे यह बताने में भी विफल रहे कि आखिर उन्होनें ऐसा भेदभाव क्यों किया है?

ईस्ट लंदन मस्जिद के अनुसार “सिंगल जेन्डर स्पोर्टिंग ईवेंट्स इस एक्ट की धारा 195 और शेड्यूल 23 में कानूनी हैं और ऐसी ईवेंट्स पूरे यूके में बहुत आम हैं, जैसे महिलाओं की दौड़, नाइके वुमन 10 के।“ उन्होनें मैनचेस्टर जुइश कम्यूनिटी सेंटर जैसे ऑर्थडाक्स यहूदी स्थानों में लिंग के अनुसार अलग-अलग स्विमिंग सत्रों का भी हवाला दिया और यह कहा कि मुस्लिम चैरिटी रन भी इन्हीं कानूनों के दायरे में काम करता है। डेली मेल के अनुसार ईस्ट लंदन मस्जिद पहले भी गलत कारणों से चर्चा में आ चुकी है, जब मई में इसे चैरिटी कमिशन ने फंड में 1 मिलियन पाउंड्स के नुकसान का आरोप लगाया था। अब यह इस दौड़ को लेकर चर्चा में है।

Topics: लंदनलंदन मस्जिद दौड़ विवादईस्ट लंदन मस्जिद लड़कियां पाबंदीशरिया ब्रिटेन टावर हेमलेट्सLondon mosque race rowEast London mosque girls banमस्जिदSharia UK Tower HamletsShariaशरियाmosquelondon
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