ईरान में अमेरिकी हमले में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे, मातम और ‘अंतिम संस्कार’ के बाद ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुई तीखी बयानबाजियों और अंतत: ईरान के खाड़ी देशों पर और अमेरिका के होर्मुज पर हमलों के बीच एक और महत्वपूर्ण खबर लगभग अनदेखी ही रह गई थी। यह खबर यूके में शरणार्थियों की बढ़ती मुफ्तखोरी पर कुछ हद तक लगाम लगाने से जुड़ी है। यूके की सरकार एक नया बिल पेश करने जा रही है, जिसमें शरणार्थी की तरह रहना चाहने वालों को अब एक तय राशि सरकार को देनी होगी। तथाकथित मानवाधिकारियों का चुभ रहे इस बिल को लाने का उद्देश्य देश के करदाताओं का आर्थिक बोझ कम करना बताया जा रहा है जिनके पैसे पर ‘शरणार्थी’ मुफ्त में आवास और खाने—पीने की सुविधाएं भोगते आ रहे हैं। इस प्रस्तावित योजना के विभिन्न प्रावधानों को लेकर यूके में तीखी बहस छिड़ी है। विशेषज्ञ इसके लाभ—हानि का हिसाब लगा रहे हैं तो सामान्यजन में समर्थन और विरोध को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
यूके सरकार ने अपने नए ‘इमिग्रेशन और शरणार्थी बिल’ के तहत एक नई योजना का खाका तैयार किया है, जिसके अनुसार शरणार्थी बनने की इच्छा रखने वालों को, देश में उनके आर्थिक रूप से स्थिर होने पर यूके सरकार को अपने द्वारा ली गई रहने—खाने की सहायता का पैसा लौटाना होगा। पैसा लौटाने की अनुमानित राशि करीब 10,000 पौंड होगी, यानी अगर डॉलर में बताएं तो 13,200–13,400 के बराबर। यह प्रस्तावित योजना एक प्रकार के ‘छात्र ऋण’ जैसी ही होगी, जिसके तहत राशि की वापसी तब शुरू होती है जब ऋण लेने वाले की आय एक निर्धारित मापदंड से ऊपर हो जाती है। ऐसे में हर माह आय से कुछ हिस्सा लिया जाता है।

सरकार की ओर से बताया गया है कि यह योजना मुख्यतः वयस्कों पर लागू की जाएगी, उन लोगों पर जिन्हें आश्रय प्रक्रिया के दौरान सरकारी आवास और खाने—पीने सहित बुनियादी सहायता मिली है और जो बाद में यूके में काम करते हुए पैसा कमाने के योग्य हो गए होंगे। योजना के तहत बच्चों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
‘शरणार्थी’ की आर्थिक स्थिति के आधार पर चलने वाली इस योजना के तहत अगर किसी व्यक्ति की आय बहुत कम होगी या वह भुगतान करने की स्थिति में नहीं होगा, तो उससे पैसा वापस नहीं मांगा जाएगा। सरकार ने यह भी कहा है कि यह योजना पहले के पहले के समय पर लागू नहीं होगी, यानी पहले से ‘शरणार्थी’ बन चुके लोग इसके दायरे से बाहर होंगे।
योजना का उद्देश्य
सरकार का मुख्य तर्क है कि यूके में शरणार्थी प्रणाली का वार्षिक खर्च अब लगभग 4 अरब पौंड तक पहुंच गया है, और इसमें 100,000 से अधिक ‘शरणार्थी’ सरकार के द्वारा दिए गए आवासों में रह रहे हैं। इस अत्यधिक खर्च को कम करने और नागरिकों पर से आर्थिक बोझ को घटाने के लिए सरकार चाहती है कि जो शरणार्थी आगे चलकर पैसा कमाने लायक हो जाएंगे, वे अपने आश्रय के दौरान दी गई सहायता का कुछ भाग वापस करें। सरकार कहती है कि यह स्पष्ट सिद्धांत है कि जब किसी को कोई सहायता मिलती है तो सक्षम होने पर वह उसे लौटाता ही है।

इसके साथ ही, सरकार का कहना है कि यह योजना शरणार्थी व्यवस्था को कम करने और ‘सुरक्षित रास्तों’ के साथ संतुलन बनाने के एक बड़े तंत्र का हिस्सा है, जिसमें कनाडा की सामुदायिक और विश्वविद्यालय प्रायोजन नीति को मॉडल के तौर पर देखा गया है।
यह है वर्तमान स्थिति
फिलहाल, यूके में शरणार्थी प्रक्रिया के दौरान, यदि आश्रय चाहने वाले व्यक्ति के पास अपने खर्चे के लिए पैसे नहीं हैं, तो वह सरकार से आवास और जीने के लिए बुनियादी सहायता प्राप्त कर सकता है। ‘शरण’ चाहने वाले व्यक्ति को प्रति सप्ताह 49.18 पौंड या यदि आवास में भोजन मिलता है, तो 9.95 पौंड के हिसाब से आर्थिक सहायता मिलती है । यह सहायता सामान्य वेल्फेयर प्रणाली से बाहर है, और शरण चाहने वाले लोग आमतौर पर तब तक काम नहीं कर सकते जब तक उनकी शरणार्थी बनने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। यह वक्त 12 महीने से अधिक तक हो सकता है।
तर्क दिया गया है कि उपरोक्त वजह से शरणार्थी बनने वाले लोगों की आश्रय प्रक्रिया के दौरान पैसा कमाने और उससे बचत करने की बहुत कम संभावना होती है। जब वे आश्रय प्राप्त करके ‘शरणार्थी’ बनते हैं, तो भी अक्सर काम शुरू करने में कई साल तक देर होते जाने का सामना करते हैं। इस संदर्भ में, 10,000 पौंड लौटाए जाने की योजना कुछ विशेषज्ञों और मानवाधिकारियों को चुभ रही है और वे इसे ‘शरणार्थियों पर एक बड़ा आर्थिक बोझ’ बता रहे हैं।
क्या कहते हैं सेकुलर विशेषज्ञों और ‘मानवाधिकारी’
शरणार्थी व्यवस्था और मानवाधिकार से जुड़े कई संगठन और विशेषज्ञ इस योजना को सख्ती के साथ चुनौती दे रहे हैं। उनके हिसाब से यह योजना शरणार्थियों पर ‘एक नए टैक्स’ जैसी है। यूके में शरणार्थी परिषद के निदेशक इमरान हुसैन का कहना है कि ‘यह योजना पक्षपाती और अव्यावहारिक है। यह पहले से कष्ट भोग रहे लोगों के लिण् मुश्किलें बढ़ा सकती है।’
शरणार्थी और मानवाधिकारी समूहों का तर्क है कि ‘शरण पाने वाले लोग पहले से ही युद्ध, हिंसा अथवा खतरों से बचकर भागकर आए हैं और उन्हें यूके में सबके साथ एकसार होने के लिए मानसिक दशा, शिक्षा, भाषा और काम के अनुभव जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस सबको देखते हुए 10,000 पौंड जैसी राशि की वापसी का बोझ उनकी भविष्य की आर्थिक स्थिरता को डगमगा सकता है।’
ये समूह इस बात पर भी सवाल उठाते हैं कि ‘इस योजना के कारण लोग कहीं नौकरी अथवा कोई और काम करने या आवास सहायता लेने से दूर हो सकते हैं। यदि किसी को लगे कि आगे उसे 10,000 पौंड लौटाने होंगे, तो वे शरण के दौरान आवास या अन्य सहायता लेने से कतरा सकते हैं। ये भी हो सकता है कि पैसा वापस करने के झंझट से बचने के लिए वे काम ही देर से शुरू करें।’
इसके अलावा कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि शरणार्थियों के लिए यूके में एकीकरण की प्रक्रिया में कई अड़चनें हैं, जैसे भाषा की जानकारी न होना, प्रशिक्षण और काम के अनुभव की कमी, सदमे से गुजर कर आना, और बसने का कोई एक ठिकाना न होगा। इन सबके बाद, 10,000 पौंड वापस देने की योजना शरणार्थी को ‘एक और आर्थिक चुनौती’ देती है।
क्या होगा परिवारों पर प्रभाव
इस योजना से बच्चों को बाहर रखा गया है, लेकिन परिवारों के साथ इस योजना का प्रभाव अलग हो सकता है। विशेषज्ञों का तर्क है कि ‘यदि एक परिवार के सभी वयस्कों को पैसा वापस देना होगा, और आय मापदंड तक ही पहुंची है तो परिवार की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।’

कुछ अन्य विशेषज्ञ कहते हैं कि यह योजना वास्तविक आर्थिक समस्याओं को हल करने के लिए नहीं बनाई गई है। यह सरकार की तरफ से एक ‘संकेत’ है कि वह शरणार्थी व्यवस्था को कम कर रही है, जिसका उद्देश्य नागरिकों पर आर्थिक बोझ कम करना है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना दरअसल राजनीतिक लाभ लेने की मंशा दर्शाती है।
बचे हैं अनसुलझे प्रश्न
इस योजना के कई प्रश्न अभी भी अनसुलझे हैं, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि अंतत: योजना का असर क्या पड़ेगा, जैसे, शरणार्थी की आय किस बिन्दु से ऊपर होनी चाहिए ताकि पैसा वापसी शुरू हो? यदि यह सीमा निम्न है, तो अधिकांश शरणार्थी इसके दायरे में आ जाएंगे और यदि उच्च है, तो यह योजना बहुत कम शरणार्थियों को प्रभावित करेगी। इसके अलावा सवाल है कि क्या वापसी की राशि 10,000 पौंड ही रहने वाली है या सरकार इसे बदल सकती है? गृह मंत्री शबाना महमूद को फिलहाल इस राशि और निम्नतम मापदंड को बदलने की शक्ति मिली हुई है।
संकट में हैं आम नागरिक
इस वक्त तो यूके की 10,000 पौंड वापस करने की यह योजना उद्देश्य और शरणार्थी अधिकारों के बीच एक तनाव पैदा किए हुए है। बहस छिड़ी हुई है। सरकार अपने तर्क दे रही है तो मानवाधिकारी अपने। लेकिन आम ब्रिटिश नागरिकों की बात करें तो इन ‘शरणार्थियों’ से वे तौबा कर रहे हैं। इनकी वजह से अपराध का रिकार्ड बढ़ा है और आम नागरिकों का जीना दूभर कर दिया गया है। यूके की पुलिस भी इन ‘शरणार्थियों’ को ‘खुश रखने’ में जुटी दिखती है। इनकी हिंसक हरकतों का विरोध करने वालों को ही पकड़ा जाता है। कीर स्टार्मर की सरकार के तहत तो जैसे देश ‘शरणार्थियों का, शरणार्थियों के लिए, शरणार्थियों के द्वारा’ का सा बना दिया गया है। लेकिन मुफ्त में इन ‘शरणार्थियों’ को देश के लिए सिरदर्द बना देने वाली सरकार आमजन के निशाने पर तो है।

















