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होम भारत

मदन लाल धींगरा की धमक से दहल उठा था लंदन

अमर बलिदानी मदल लाल धींगरा ने कहा था कि "मैं तुम अंग्रेजों को पिछले एक सौ पचास वर्षों में लगभग 8 करोड़ भारतीय लोगों की हत्याओं और खरबों रुपये की लूट का जिम्मेदार मानता हूं। मुझे फाँसी पर चढ़ा दीजिए, लेकिन याद रखियेगा, समय का चक्र घूमेगा और आपको मेरे देश की आने वाली पीढ़ी मुंहतोड़ जवाब देगी"।

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा
Sep 18, 2026, 01:55 pm IST
inभारत

भारत भूमि वीर प्रसूता रही है, विभिन्न काल खंडों में हमारे ‘स्व’ के अस्तित्व पर जब – जब आंच आई है, तब-तब भारतवर्ष के भूमि पुत्र-पुत्रियों ने पूर्ण आहुति देकर भी ने ‘स्व’ की ज्योति जगमगाए रखा। दुर्बल तो वे हैं,जो घर में ही पिट जाते हैं और सबल वो हैं जो दुश्मन को घर में घुसकर मारते हैं।

ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महारथी मदन लाल धींगरा का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए क्योंकि वह भारत के प्रथम क्रांतिवीर थे, जिन्होंने लंदन में कर्जन वायली का सरेआम वध कर समूचे लंदन को दहला दिया था। उन्होंने यह साबित कर दिया था कि एक भारतीय युवा अकेले ही ब्रिटिश सरकार को हिला सकता है।

मदन लाल धींगरा की जन्मतिथि को लेकर विभिन्न मत हैं। कतिपय विद्वान 18 फरवरी भी बताते हैं, परंतु सर्वमान्य मत यह है कि उनका जन्म 18 सितम्बर सन् 1883 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। मदन लाल धींगरा बाल्यावस्था से ही क्रांतिकारी स्वभाव के थे। इसलिए लाहौर के एक विद्यालय से उन्हें निकाल दिया गया था।

मदन लाल धींगरा ने अपने जीविकोपार्जन के लिए लिपिक की नौकरी की, तांगा भी चलाया, एक कारखाने में श्रमिक के रूप में कार्य भी किया। उन्होंने एक यूनियन बनाने का भी यत्न किया परंतु वहां से भी उन्हें निकाल दिया। कुछ दिन मुंबई में कार्य करने के बाद वह अपने बड़े भाई के विचार विमर्श से 1906 में उच्च शिक्षा के लिए यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में यांत्रिकी प्रौद्योगिकी में प्रवेश लिया वहीं उनकी मुलाकात विनायक दामोदर सावरकर और श्यामजी कृष्ण वर्मा जैसे महान् क्रांतिकारियों से हुई और वीर सावरकर ने उन्हें हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया।

मदन लाल धींगरा “अभिनव भारत” के सदस्य बन गए थे और इंडिया हाउस में रहते थे । भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए क्रांतिकारी विदेशों पृष्ठभूमि तैयार कर रहे थे जिसकी जानकारी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में षड्यंत्र पूर्वक उजागर नहीं की गई है। इंडिया हाउस और गदर पार्टी के योगदान का भी आकलन अभी तक उपेक्षित ही रहा है।

कर्जन वायली लंदन में इंडिया हाउस में रहने वाले भारतीय छात्रों की जासूसी करता था, तथा भारत सचिव का राजनीतिक सलाहकार भी था। एक सेवानिवृत्त अंग्रेज़ फौजी अफसर – विलियम कर्जन वायली की इन हरकतों से लंदन में सभी भारतीय विद्यार्थी तंग हो गये थे, और भारत में बरतानिया सरकार द्वारा युवा क्रांतिकारियों को फांसी की सजा देकर दमन चक्र चलाए जा रहा था। उपर्युक्त कारण से इंडिया हाउस में बरतानिया सरकार को लंदन में ही सबक सिखाने का विचार बनाया था।इस संदर्भ में कर्जन वायली और पूर्व वायसराय कर्जन के वध की योजना बनाई गई।

मदन लाल धींगरा भी लंदन में अध्ययन में अध्ययनरत थे, जल्दी ही उनकी मुलाकात वीर सावरकर से हुई और वे अभिनव भारत के सदस्य बन गये। आखिरकार 1 जुलाई सन् 1909 को कर्जन वायली पर मदन लाल धींगरा ने 5 फायर खोल दिए जिसमें 4 कर्जन वायली को लगे।

मदन लाल धींगरा एक गोली स्वयं को मारने वाले थे, परंतु उन्हें हिरासत में ले लिया गया और 17 अगस्त 1909 को लंदन की पेंटोनविले जेल में उन्हें फांसी पर लटका दिया गया। इस तरह भारतीय स्वाधीनता संग्राम में ‘स्व’ के लिए मदन लाल धींगरा की पूर्णाहुति हुई।

क्या थी अमर बलिदानी की आखिरी चेतावनी

अमर बलिदानी ने अंत में कहा कि “मैं तुम अंग्रेजों को पिछले एक सौ पचास वर्षों में लगभग 8 करोड़ भारतीय लोगों की हत्याओं और खरबों रुपये की लूट का जिम्मेदार मानता हूं। मुझे फाँसी पर चढ़ा दीजिए, लेकिन याद रखियेगा, समय का चक्र घूमेगा और आपको मेरे देश की आने वाली पीढ़ी मुंहतोड़ जवाब देगी”।

कथित सेकुलर इतिहासकारों की चाल

पाश्चात्य विचारधारा से अभिप्रेत भारतीय परजीवी इतिहासकारों, एक दल विशेष के समर्थक तथाकथित सेक्युलर इतिहासकारों के साथ वामपंथी इतिहासकारों ने षड्यंत्र पूर्वक इस प्रकार का मत प्रवाह स्थापित किया कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम में जिन्होंने सत्ता के लिए के लिए संघर्ष किया, उन्हें स्वाधीनता संग्राम का महा नायक बना दिया, परंतु जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए भारत में एवं विदेशों में जाकर वास्तविक संग्राम किया तथा विदेशों में गदर पार्टी और इंडिया हाउस जैसी संस्थाएं बनाई और अपना संपूर्ण जीवन न्यौछावर कर दिया। उनके इतिहास के बारे में केवल नाम लिखकर उनके इतिहास का पटाक्षेप कर दिया तथा उन्हें प्रकारांतर से आतंकवादी, लुटेरा और विद्रोही बताकर अपराधी साबित कर दिया।

यह उक्त प्रकार के इतिहासकारों का जघन्य अपराध है। स्वाधीनता के अमृत काल में यही बातें सामने आ रही हैं कि देश में ही नहीं विदेशों में भी जिन महारथियों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए अपने प्राणों की पवित्र आहुतियां दी हैं, उनका इतिहास में ठीक प्रकार से मूल्यांकन नहीं किया गया है, जो कि राष्ट्रवाद के लिए सर्वाधिक अपेक्षित है।

Topics: वीर सावरकरलंदनइंडिया हाउसभारतीय स्वाधीनता संग्रामगदर पार्टीमदन लाल धींगराश्यामजी कृष्ण वर्मा
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
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