वह बेमिसाल योद्धा जिस पर कांग्रेस और वामपंथियों ने साधी थी चुप्पी? नरेंद्र मोदी स्विट्जरलैंड से ससम्मान लाए थे अस्थियां
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वह बेमिसाल योद्धा जिस पर कांग्रेस और वामपंथियों ने साधी थी चुप्पी? नरेंद्र मोदी स्विट्जरलैंड से ससम्मान लाए थे अस्थियां

जिनकी राष्ट्रभक्ति से स्विट्जरलैंड की सरकार इतनी प्रभावित थी कि उनकी अस्थियां वहीं सुरक्षित रखी गईं? आखिर यूरोप और अमेरिका से भारत के स्वाधीनता संग्राम में पूर्णाहुति देने वालों के बारे में इतिहास में इतनी चुप्पी क्यों है?

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा — edited by Sudhir Kumar Pandey
Oct 4, 2025, 09:32 am IST
inभारत
महान स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा

महान स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा

क्या आप जानते हैं कि वह कौन हैं, जिन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध इंग्लैंड में ही इंडिया हाउस की स्थापना की और वीर सावरकर की उसमें क्या भूमिका थी ? जिन्होंने यूरोप में रहकर 25 वर्ष भारत के स्वाधीनता संग्राम के लिए सर्वस्व अर्पित किया? जिनकी राष्ट्रभक्ति से स्विट्जरलैंड की सरकार इतनी प्रभावित थी कि उनकी अस्थियां वहीं सुरक्षित रखी गईं? आखिर यूरोप और अमेरिका से भारत के स्वाधीनता संग्राम में पूर्णाहुति देने वालों के बारे में इतिहास में इतनी चुप्पी क्यों है?

इतिहास में क्रांतिकारियों को नहीं दी सही जगह

भारत के स्वाधीनता संग्राम का कितना दुखद पहलू है कि ब्रिटिश सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर डोमिनियन स्टेट्स की मांग करते हुए शासन में सहभागिता करने वाले सत्ता के भूंखे राजनेता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बन गए और पं. राम प्रसाद बिस्मिल, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की फांसी वाली रस्सी का पता नहीं चल सका, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां भी बाट जोहती रह गईं। जिन महारथियों ने स्वतंत्रता का नारा बुलंद किया उन्हें ब्रिटिश सरकार के साथ सत्ता के भूखे कथित राजनेताओं का भी सामना करना पड़ा, इन दोनों ने मिलकर क्रांतिकारियों को ठिकाने लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

इन्होंने वामपंथियों के कुत्सित सहयोग से इतिहास में इन्हें लुटेरा, डकैत और आतंकवादी के रूप में स्थान दिया। यहां तक कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भी फासिस्ट कहकर उनका मजाक बनाया। भारत के बहुत से महान क्रांतिकारी विदेश में संघर्षरत थे, इंडिया हाउस और गदर पार्टी के बारे में तो थोड़ा-बहुत पता है परंतु यूरोप और अमेरिका में अभी भी बहुत कुछ शोध सामग्री है जिसका उपयोग नहीं किया गया है। इसलिए श्याम जी कृष्ण वर्मा जी जैसे अन्य क्रांतिवीरों पर भी विस्तृत शोध अपेक्षित है।

क्रांतिकारियों के प्रणेता थे श्यामजी कृष्ण वर्मा

श्याम जी कृष्ण वर्मा यूरोप में रहकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी आंदोलन के बेमिसाल नायक एवं क्रांतिकारियों के प्रणेता थे। उनका जन्म 4 अक्टूबर 1857, मांडवी, गुजरात में एवं देहावसान 31 मार्च 1930 जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में हुआ था। श्याम जी कृष्ण वर्मा संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान और उच्च कोटि के पत्रकार थे। वे भारत के प्रथम व्यक्ति थे, जिन्हें आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एम. ए. और बार-एट-ला की उपाधियां प्राप्त हुईं थीं। इंग्लैंड में सन् 1905 में “इंडिया हाउस” की स्थापना की, जो भारतीय क्रांतिकारियों के लिए वरदान साबित हुआ।

क्रांतिकारियों के लिए था इंडिया हाऊस

यद्यपि इंडिया हाउस भारतीय विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए खोला गया था परंतु मूलतः क्रान्तिकारियों के लिए था – सर्वश्री लाला हरदयाल, विनायक दामोदर सावरकर जी, मदनलाल धींगरा सहित अन्य महान् क्रांतिकारियों ने यहीं से सारी योजनाएं संचालित कीं। वीरांगना भीकाजी कामा भी यहां रहीं थीं। भारतीयों के लिए 2-2 हजार रुपये की 6 फेलोशिप शुरु कीं, जिनमें गुरु गोविंद सिंह फेलोशिप और शिवाजी फेलोशिप उल्लेखनीय हैं। “धींगरा” फैलोशिप भी प्रारंभ की। भारत में क्रांतिकारियों के लिए पिस्तौल और बम की आपूर्ति में विशेष भूमिका थी।

इसलिए इंग्लैंड से गए जेनेवा

मदन लाल धींगरा द्वारा कर्जन वायली का इंग्लैंड में वध कर देने से श्याम जी कृष्ण वर्मा पर अंग्रेजों का संदेह गहरा गया था। अंग्रेज श्याम जी कृष्ण वर्मा को पकड़ पाते इसके पूर्व ही उन्होंने अपना रहवास बदल लिया और फ्रांस चले गए, यहां भी अंग्रेजों ने पीछा नहीं छोड़ा इसलिए, वे जेनेवा (स्विट्जरलैंड) चले गए और मृत्यु पर्यन्त (31 मार्च 1930) तक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।

वर्ष 2003 में नरेंद्र मोदी ने ससम्मन स्विट्जरलैंड से मंगवाई अस्थियां

स्विट्जरलैंड की सरकार श्याम जी कृष्ण वर्मा से अत्यंत प्रभावित थी इसलिए उनकी अस्थियां सुरक्षित रखी गईं। हम स्वाधीन हो गये और स्वतंत्रता का इतिहास भी लिखा गया परंतु एक दल विशेष के समर्थक और वामपंथी इतिहासकारों ने इस महारथी के अवदान को 4-5 पंक्तियों में निपटा दिया और उनकी अस्थियों की किसी ने सुध न ली। 22 अगस्त 2003 को तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्विट्जरलैंड से उनकी अस्थियां ससम्मान मंगवाई और “क्रांति तीर्थ” बनवाकर सुरक्षित कीं।

 

Topics: भारत का स्वतंत्रता संग्रामश्याम जी कृष्ण वर्माश्याम जी कृष्ण वर्मा जयंतीइंडिया हाऊसमदनलाल धींगरावीर सावरकरपाञ्चजन्य विशेष
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
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