राम मंदिर आंदोलन के बाद क्या काशी-मथुरा को लेकर संघ की कोई योजना है?
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RSS के 100 वर्ष : राम मंदिर आंदोलन के बाद क्या काशी-मथुरा को लेकर संघ की कोई योजना है?

100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज’। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने तीसरे दिन ‘जिज्ञासा समाधान सत्र’ का आयोजन किया गया। यहां व्याख्यानमाला के संपादित अंश दिए जा रहे हैं-

Written byPanchjanyaPanchjanya — edited by Rajpal Singh Rawat
Sep 3, 2025, 07:59 am IST
inभारत, संघ @100

‘100 वर्ष की संघ यात्रा : नए क्षितिज’। इस अवसर पर मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के साथ सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले, क्षेत्र संघचालक श्री पवन जिंदल और प्रांत संघचालक डाॅ. अनिल अग्रवाल उपस्थित थे। व्याख्यानमाला में पहले दिन एवं दूसरे दिन सरसंघचालक ने व्याख्यान दिया तथा तीसरे दिन ‘जिज्ञासा समाधान सत्र’ का आयोजन किया गया। यहां व्याख्यानमाला के संपादित अंश दिए जा रहे हैं-

प्रश्न- कुंभ के अवसर पर आप क्यों नहीं गए, जबकि पूरा भारत वहां उमड़ा था?

उत्तर- संघ के अधिकारी कुंभ में गए थे, पर मुझे बताया गया कि भीड़ बहुत होगी और अन्य कार्यक्रम प्रभावित होंगे, इसलिए मुझे न जाने की सलाह दी गई। मैंने कहा कि सब लोग पुण्य ले रहे हैं और मुझे वंचित किया जा रहा है, पर मैं संघ का स्वयंसेवक हूं। जो कहा गया वही किया। कलकत्ता में कृष्णगोपाल जी ने कुंभ का जल भेजा। मौनी अमावस्या के दिन मैंने उससे स्नान किया। किंतु संघ के काम के कारण पुण्य से वंचित होना पड़ा।

प्रश्न- 100 वर्ष के बाद संघ अंतरराष्ट्रीय भूमिका के बारे में क्या विचार कर रहा है ?

उत्तर- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विदेश में प्रत्यक्ष तौर पर काम नहीं करता। संघ का काम भारत के अंदर जैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक करता है वह ही करेगा। विदेशों में हिंदू स्वयंसेवक संघ है। वहां के कानून के अनुसार वह चलता है। लेकिन उनकी कार्यपद्धति यही है जो यहां है। शाखा है, शाखा चलाने वाला तंत्र है, व्यक्ति निर्माण होता है। व्यक्ति हिंदू समाज के अनेक कामों में लगते हैं। वहां के समाज से भी संपर्क करके सारा काम चलता है। उसने पद्धति हमसे ली है तो वह काम भी वैसे ही करता है।

प्रश्न- संवैधानिक प्रावधानों के तहत मत-पंथ के प्रसार के लिए विदेशी धन आना उचित है ?

उत्तर- सेवा के लिए यदि बाहर से धन आता है तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है। धन या साधन जिस कार्य के लिए आए, उसका उपयोग उसी उद्देश्य के लिए हो। समस्या तब खड़ी होती है, जब वही धन कन्वर्जन के कार्यों में खर्च किया जाता है। इसलिए उस पर अंकुश लगाना आवश्यक हो जाता है। मेरा मानना है यदि बाहर से धन आता है तो उसकी गहन जांच होनी चाहिए। आवश्यक हो तो उस पर प्रतिबंध भी लगाया जाना चाहिए।

प्रश्न- राम मंदिर आंदोलन के बाद क्या काशी-मथुरा को लेकर संघ की कोई योजना है? अंधविश्वास दूर करने के लिए संघ क्या कर रहा है?

उत्तर- संघ किसी आंदोलन में नहीं जाता। एकमात्र आंदोलन राममंदिर था, जिसमें हम जुड़े और उसे आखिर तक लेकर गए। अब बाकी आंदोलन में संघ नहीं जाएगा, लेकिन हिंदू मानस में। काशी, मथुरा, अयोध्या तीनों का महत्व है। दो जन्मभूमि है, एक निवास स्थान है। तो हिंदू समाज इसका आग्रह करेगा। संघ इस आंदोलन में प्रत्यक्ष नहीं जाएगा। लेकिन संघ के स्वयंसेवक जा सकते। हिंदू हैं। संघ में अंधविश्वास नहीं है। कोई कर्मकांड वगैरह संघ की शाखा का अंग नहीं होता है। जहां जिसको जैसा विश्वास है, वह वैसा करता है। हम भावना का सम्मान करते हैं। संघ में जितना संस्कृत पाठान्तर मंत्र किए जाते हैं, वह केवल भारत माता जी कहे जाते हैं। संघ की प्रार्थना में भी पहले भारत माता है। बाद में प्रभु है और प्रभु है राम, कृष्ण, बुद्ध ऐसा कुछ नहीं है। सर्वत्र प्रभु की मान्यता है। वही सर्वश्रेष्ठ है।

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