हिंदुत्व क्या है? हिंदू क्या है? हिंदू की विचारधारा क्या है? RSS सरसंघचालक जी ने दिया बड़ा संदेश 
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हिंदुत्व क्या है? हिंदू क्या है? हिंदू की विचारधारा क्या है? RSS सरसंघचालक जी ने दिया बड़ा संदेश 

RSS शताब्दी वर्ष पर मोहन भागवत का विज्ञान भवन संबोधन- संघ की 100 साल की यात्रा, हिंदुत्व का सार, ऋषियों की खोज और विश्वकल्याण का ध्येय पर रखी बात

Written byShivam DixitShivam Dixit
Aug 27, 2025, 08:22 pm IST
in भारत, संघ @100, दिल्ली

नई दिल्ली । संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार, 26 अगस्त से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के दूसरे दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा- कल संघ के 100 साल की यात्रा का वर्णन किया था। यात्रा का वर्णन किया था कि किस प्रकार उपेक्षा और विरोध के वातावरण में संघ के स्वयंसेवकों ने अपनी निष्ठा के बलबूते स्वयं को दाँव पर लगाकर संघ को इन सभी कालखंडों से पार कराया।

संघ का आधार : शुद्ध सात्त्विक प्रेम

सरसंघचालक जी ने आगे कहा- इस दौरान कई कटु अनुभव आए, विरोध हुआ। यह सब होने के बाद भी संपूर्ण समाज के लिए उनके हृदय में शुद्ध सात्त्विक प्रेम ही रहा और आज भी है। यही संघ है — शुद्ध सात्त्विक प्रेम, जो अपने कार्य का आधार है। इसलिए आज वह समय नहीं रहा। अब अनुकूलता है, समाज की मान्यता है। विरोध बहुत कम हो गया है और जो है, उसकी भी धार बहुस्तरीय हो गई है। उसका परिणाम नहीं होता।

स्वयंसेवकों की सोच और निरंतरता

उन्होंने कहा- स्वयंसेवक यही सोचता है कि अनुकूलता मिली है तो सुविधाभोगी नहीं बनना है, अनुकूलता मिली है तो आराम नहीं करना है। संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करने के अपने लक्ष्य को पाने तक सतत चलते रहना है और चलते रहना है। किस तरीके से? मैंने बताया था — चार शब्दों में उसका वर्णन किया जाता है- “मैत्री, करुणा, मुदिता और उपेक्षा”।

  • जो सज्जन लोग हैं, उनसे मैत्री करना।
  • जो हमारे प्रति सज्जनता नहीं बरतते, उनकी उपेक्षा करना।
  • कुछ अच्छा होता है, किसी ने भी किया हो — अपने विचार का समर्थक हो या न हो, विरोधी भी हो — लेकिन अच्छा किया है तो आनंद जताना।
  • और जो दुर्जन हैं, पाप करते हैं, उनके प्रति करुणा रखना, घृणा नहीं करना।

इस प्रकार से यह काम चलता है।

संघ में हिम्मत वालों का काम

सरसंघचालक जी ने कहा- संघ काम करते समय- स्वयंसेवकों को संघ में कोई इंसेंटिव नहीं मिलता। डिसइंसेंटिव बहुत सारे हैं। जब लोग पूछते हैं कि “आपको संघ में आकर क्या मिलेगा?”, तो मैं सीधा जवाब देता हूँ — “तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा। जो तुम्हारे पास है, वह भी चला जाएगा। हिम्मत है तो करो। यह हिम्मत वालों का काम है।”

उन्होंने कहा- स्वयंसेवक निस्वार्थ सेवा करता है। और इसलिए करता है कि ऐसी निस्वार्थ सेवा के कारण समाज के लिए कार्य करते हुए उसे जीवन में एक सार्थकता प्राप्त होती है। उसका आनंद मिलता है। और जो हम कर रहे हैं, वह सबके हित की बात है। यह स्वयंसेवक अनुभव से जानते हैं, तर्क से समझाना नहीं पड़ता। कार्य करते समय उन्हें यह अनुभव आता है। इसीलिए — “आत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय च” — अपने जीवन की सार्थकता और मुक्ति के लिए तथा पूरे विश्व के हित के लिए हम यह काम कर रहे हैं। यही अनुभूति उन्हें इस पथ पर सतत परिश्रमशील रहने के लिए प्रेरित करती है।

ध्येय के पथिक स्वयंसेवक

सरसंघचालक जी ने कहा- ध्येय के लिए सब स्वयंसेवक हैं। शुद्ध सात्त्विक प्रेम का संबंध है, लेकिन वह मोह का संबंध नहीं है। यह व्यक्तिगत प्रेम नहीं है, बल्कि ध्येय के पथिक हैं। और ध्येय बहुत भव्य है। हमारे एक पुराने कार्यकर्ता थे — दादाराव परमार। अब नहीं रहे। उन्हें अंग्रेज़ी में बोलने की आदत पड़ गई थी। उन्होंने दक्षिण भारत में काम किया था, उनकी मातृभाषा मराठी थी, हिंदी भी अच्छी जानते थे। लेकिन जब भी बोलना शुरू करते थे, दो लाइनों के बाद अंग्रेज़ी में बोलने लगते थे। उन्होंने एक बार संघ के कार्य का वर्णन एक पंक्ति में इस प्रकार किया:

“RSS is evolution of life mission of Hindu Nation.” 

स्वयंसेवक जानता है कि हिंदू राष्ट्र के जीवन कार्य का विकास हम अपने राष्ट्र में कर रहे हैं।

तो प्रश्न है — What is the life mission of Hindu Nation.?

तो हमारा हिंदुस्थान जो है, उसका प्रयोजन ही है — विश्वकल्याण।

राष्ट्र और नेशन-स्टेट का अंतर

उन्होंने आगे  बताया- “राष्ट्र” नेशन नहीं है। हमारे यहाँ नेशन-स्टेट होता है, लेकिन हमारा राष्ट्र स्टेट के बावजूद बना है।

ऋषि-मुनियों की खोज और चौथा तत्व

उन्होंने कहा- क्योंकि विकास के क्रम में, खोजते-खोजते दुनिया ने “अंदर खोजना” बंद कर दिया, पर भारत ने चालू रखा। बहुत प्राचीन समय की बात है, इतिहास से पहले की। खोजते-खोजते हमारे ऋषि-मुनियों को एक चौथा तत्व मिला, जो सबको जोड़ता है। शरीर, मन और बुद्धि — ये सब तो हैं ही, लेकिन इन्हें जोड़ने वाला क्या है? व्यक्ति, समूह, सृष्टि — सबको जोड़ने वाला क्या है? वह चौथा तत्व। वह हमारे ऋषि-मुनि पूर्वजों को मिल गया।

और उसके जरिए पता चला कि वास्तविक और शाश्वत सुख इसी से मिलेगा, उपभोग से नहीं। उपभोग इंद्रियाँ करती हैं। देह नश्वर है, वह समाप्त हो जाती है। और यदि दुनिया को चलना है और सब लोग उपभोग के पीछे लग जाएँ, तो स्पर्धा होगी, आपस में झगड़े होंगे और दुनिया नष्ट होने की नौबत आएगी — जैसा कि हम आज देख रहे हैं।

और इसलिए उपभोग तथा बाहरी सुख के मार्ग पर संयम लगाकर, यदि हम भीतर खोजें तो अपने भीतर शाश्वत, कभी फीका न पड़ने वाले सुख का स्रोत मिल जाएगा। उसे पाना ही मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य है। और इससे सब लोग सुखी होंगे, सब समन्वय के साथ रह सकेंगे। दुनिया के कलह समाप्त होंगे। दुनिया में शांति और सुख रहेगा। और दूसरी बात — उस तत्व ने यह सिखाया कि दिखने में सब अलग-अलग हैं, लेकिन सब एक हैं। एक हैं अर्थात सब अपने हैं।

हिंदुत्व का सार : विश्वकल्याण का ध्येय

सरसंघचालक जी ने आगे कहा- हिंदुत्व क्या है? हिंदू क्या है? हिंदू की विचारधारा क्या है? सारांश यदि एक वाक्य में कहना है तो — सत्य और प्रेम, अपनापन। दुनिया अपनेपन से चलती है। सौदे पर नहीं चलती, कॉन्ट्रैक्ट पर नहीं चलती। चल ही नहीं सकती। उस अपनेपन को सारी दुनिया को सिखाना है— यह उन्होंने तय किया।

अब यह कार्य इक्के-दुक्के का नहीं है। इसके लिए एक फुल-फ्लेज्ड राष्ट्र चाहिए। एक पूरा राष्ट्र इसमें लगना चाहिए। इसलिए उनकी तपस्या से अपने राष्ट्र का निर्माण हुआ। ऐसा वेदों में वर्णन है — भद्रं में अंतर या स्वर्ग विदा।

Topics: Hindu Philosophyसंघ विचारधाराRSSसंघ शताब्दी वर्षMohan Bhagwat speechRSS 100 Yearsहिंदुत्व का सारRSS Vigyan BhawanHindu Nation visionराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघआत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय चRashtriya Swayamsevak Sanghविश्वकल्याणमोहन भागवत
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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