सुशासन संवाद मुंबई: विश्वबंधुत्व से विश्वगुरु तक, संघ का वैश्विक दृष्टिकोण और हिन्दुत्व का संदेश
October 21, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत महाराष्ट्र

सुशासन संवाद मुंबई: विश्वबंधुत्व से विश्वगुरु तक, संघ का वैश्विक दृष्टिकोण और हिन्दुत्व का संदेश

पाञ्चजन्य के सुशासन संवाद में वी. भगैय्या ने कहा- भारत को विश्वगुरु बनने से पहले विश्वबंधुत्व स्थापित करना होगा। विदेशों में संघ-हिन्दुत्व विरोध की जड़ें भारत में ही हैं।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Sep 30, 2026, 01:30 pm IST
inमहाराष्ट्र
सुशासन संवाद मुबंई में बोलते वी भागैय्या जी

सुशासन संवाद मुबंई में बोलते वी भागैय्या जी

पांञ्चजन्य के सुशासन संवाद मुंबई में पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य वी भगैय्या जी से विभिन्न मुद्दों पर चर्चाएं की। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरू बनने से पहले विश्व बंधुत्व स्थापित करना होगा।

हाल ही में सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का विदेश प्रवास हुआ था। इसे किस संदर्भ में देखा जाना चाहिए। क्या संघ अब विदेशों में रहने वाले भारतीयों से संपर्क बढ़ा रहा है या भारतीय सभ्यता को देखते हुए व्यापक दृष्टिकोण के साथ काम कर रहा है?

उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरू बनने से पहले विश्व बंधुत्व स्थापित करना होगा। वह कहते हैं कि ऐसा ही हमारे पूर्वजों में भी किया था। सारे देशों से मित्रता करनी है। इस यात्रा का लाभ भी हमें मिल रहा है। आज दुनिया में हिंसा नहीं प्रेम की आवश्यकता है। दुनिया को परस्पर सहकारिता और पूरकता की जरूरत है।

विदेशों में भारत की तरह संघ की शाखाएं नहीं चलती। वहां अलग-अलग संगठन इस तरह के कार्य करते हैं। ऐसे में इन संगठनों का मूल उद्देश्य क्या है?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व के किसी भी अन्य देश में कार्य नहीं करता है। ये केवल भारत तक ही सीमित है। लेकिन, दुनिया के जिन भी देशों में हिन्दू हैं, वहां उन्होंने हिन्दू समाज को संगठित करने के लिए संगठन बनाए हैं। हालांकि, विदेशों में जाने के बाद भी वहां हिन्दुओं ने भाषा और रहन-सहन के हिसाब से अलग-अलग संगठन बना रखे हैं। इसके अलावा संघ चाहता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश में काम करता है तो वो उसकी कर्मभूमि है और उसे उसके प्रति समर्पित होकर कार्य करना चाहिए। वहां के हिन्दू एक होकर जीने की ही अपेक्षा रखते हैं। हां, चूंकि ये अप्रवासी भारतीयों की मातृभूमि है और उसके प्रति संवेदना बनी रहेगी, संघ केवल इतनी ही अपेक्षा रखता है।

हिन्दू समाज को विदेशों में एक अलग ही सम्मान से देखा जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि हिन्दू परिश्रमी है, ईमानदार है और हिंसा कभी नहीं करता है।

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका-ब्रिटेन समेत कई देशों में संघ और हिन्दुत्व की आलोचनाएं बढ़ी हैं। वहां अल्पसंख्यकों, हिन्दू राष्ट्र, जाति और राजनीति की बात होती रही है। इन आलोचनाओं में कौन से प्रश्न गंभीर विमर्श की मांग करते हैं?

विदेशों में संघ और हिन्दुत्व का नाम पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों को देखें तो इसकी जड़ भारत में है। असल, में यहीं के वो लोग, जो अपनी राजनीति या किसी अन्य मुद्दे को लेकर विदेशों में जाते हैं और ‘संघ भारत में अल्पसंख्यकों के विरोध में कार्य करता है’, जैसे नरैटिव चलाते हैं। जबकि, सत्य यह है कि जहां हिन्दू बहुसंख्यक हैं, वहां अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं। और जहां हिन्दू अल्पसंख्यक हैं,वहां हिन्दू सुरक्षित नहीं हैं। इसकी वजह यह है कि हिन्दुत्व किसी के विरोध में नहीं है। भारत का जो हिन्दुत्व है, उसमें जन्म से किसी भी तरह की विषमता में हम विश्वास नहीं करते हैं। ऐसा किसी भी शास्त्र में नहीं लिखा है।

ऐसे में विदेशों में हिन्दुत्व के खिलाफ जो नरैटिव चलाया जा रहा है, उसे ध्वस्त करने के लिए हिन्दुत्व के विषय में बताना आवश्यक है। हालांकि, अब तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम पर विदेशों में कभी भी हमने प्रयास नहीं किया। हां वहां प्रवास पर जाते हैं। हिन्दुत्व बताता है कि किसी भी भगवान की पूजा करो, सदाचार के बिना मोक्ष बिल्कुल नहीं मिलेगा। इसलिए, भगवान पर भरोसा नहीं करने वाला भी अगर सदाचार करता है तो उसे भी मोक्ष मिलता है। यही हिन्दुत्व है।

कुछ प्रश्न बार-बार उठाए जाते हैं, स्वतंत्रता आंदोलन में संघ की भूमिका, महात्मा गांधी की हत्या के बाद लगे प्रतिबंध, संविधान की बात होती है। क्या शताब्दी वर्ष पर ऐसा नहीं किया जा सकता है कि इन सभी प्रश्नों के उत्तरों को प्रमाण सहित ऐतिहासिक रूप से प्रस्तुत किया जाय, ताकि बहस प्रमाणिक हो?

सोए और जागे हुए को उठाया जा सकता है। लेकिन, ऐसे व्यक्तियों को कभी नहीं उठाया जा सकता है, जो सोने का नाटक करते हों। कुछ लोग निहित स्वार्थ, विदेशों से प्रेरित होने के कारण इस तरह के सवाल करते हैं। पिछले 50 साल में संघ ने अस्पृष्यता जैसी बुराइयों से उन्मूलन के लिए कार्य किया है। धर्म श्रेष्ठ है। धर्म यानि समानता, प्रेम और करुणा। हमें लोगों के हृदय में परिवर्तन लाने का लंबा रास्ता तय करना है।

संघ में एक प्रश्न महिलाओं को लेकर पूछा जाता है। आज अगर हम देखें तो महिलाओं की संगठनात्मक और निर्णयकारी भूमिका को आप कैसे देखते हैं?

संघ व्यक्ति निर्माण का कार्य करता है पुरुषों में। महिलाओं में यह कार्य राष्ट्र सेविका समिति करती है। संघ जो कार्य करता है, उसमें खेल और भाग दौड़ होती है। पुरुष और महिला मिलकर करना संभव नहीं है। इसीलिए दोनों के लिए स्वतंत्र संगठन है। दूसरी बात ये कि भारत की महिला केवल महिला नहीं है, बल्कि मातृमूर्ति है। संघ के विभिन्न संगठनों में आज महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं। भारत के समाज में महिलाओं पर प्रतिबंधों की शुरुआत मध्य युगीन कालखंड में आया है, जब विदेशियों ने देश पर आक्रमण किए। उदाहरण के तौर पर आज भी मेघालय में कोच जनजाति की महिलाओं का भी उपनयन संस्कार होता है।

ये सच है कि समाज में विकृति आई है, लेकिन महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए संघ के स्वयंसेवक विवध क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं।

आज का युवा 100 साल पहले के युवा से अलग है, वो सवाल करता है और प्रमाण भी मांगता है। ऐसे युवाओं को संघ ऐसा क्या दे सकता है और नई पीढ़ी संघ में क्या परिवर्तन ला सकती है?

आज के युवा प्रश्न करते हैं और पहले के युवा प्रश्न नहीं करते थे, ये धारणा ही गलत है। उपनिषदों को देखें तो उसमें सवाल ही किए जाते हैं कि ऐसा क्यों? ये भारत की परंपरा रही है। बीच के कालखंड में सवालों को दबाया गया। भारतीय परंपरा में प्रमाण मांग जाते थे और आज प्रमाण लैब में मिलते हैं। उस समय प्रमाण अनुभूति का था।

 

Topics: हिन्दुत्वसुशासन संवादवी भगैय्याराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघमोहन भागवतपाञ्चजन्यविश्वबंधुत्वविश्वगुरु
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

Regime Change : ‘सत्ता परिवर्तन’ का वैश्विक खतरा और सरसंघचालक मोहन भागवत की चेतावनी

संजय गुप्त जी (प्रधान संपादक, दैनिक जागरण)

संघ नहीं होता तो हिन्दू जीवन-पद्धति का वर्तमान स्वरूप बचाना मुश्किल होता: संजय गुप्त

Sarsanghchalak Mohan Bhagwat Vijayadashmi

‘सस्ती लोकप्रियता के लिए समाज में फूट न डालें’- सरसंघचालक मोहन भागवत जी

Sarsanghchalak Mohan Bhagwat Vijayadashmi

सत्ता परिवर्तन के लिए बांग्लादेश, फ्रांस, नेपाल और अल्बानिया जैसी कोशिशें भारत में की जा रही हैं : श्री मोहन भागवत

संजय गुप्त जी (प्रधान संपादक, दैनिक जागरण)

तमाम विरोध और चुनौतियों के बीच कैसे आगे बढ़ता रहा संघ? जानिए

संजय गुप्त जी (प्रधान संपादक, दैनिक जागरण)

राजनीतिक महत्वाकांक्षा से पैदा हो रही सामाजिक बीमारी, हिंदू एकता और समरसता के लिए संघ जरूरी: संजय गुप्त

Load More

ताज़ा समाचार

अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई

अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश! 105 सांसदों ने FBI से की हेट क्राइम जांच की मांग

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

Regime Change : ‘सत्ता परिवर्तन’ का वैश्विक खतरा और सरसंघचालक मोहन भागवत की चेतावनी

आज का श्लोक : मनुष्य में प्रगति की राह में सबसे बड़ी बाधा ‘आलस्य’ है

आज का राशिफल

आज का राशिफल: जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

कल का पंचांग

कल का पंचांग: तुला राशि में सूर्य, बुध और शुक्र की युति, जानें लग्न परिवर्तन और दिशाशूल का समय

संजय गुप्त जी (प्रधान संपादक, दैनिक जागरण)

संघ नहीं होता तो हिन्दू जीवन-पद्धति का वर्तमान स्वरूप बचाना मुश्किल होता: संजय गुप्त

Sarsanghchalak Mohan Bhagwat Vijayadashmi

‘सस्ती लोकप्रियता के लिए समाज में फूट न डालें’- सरसंघचालक मोहन भागवत जी

Sarsanghchalak Mohan Bhagwat Vijayadashmi

सत्ता परिवर्तन के लिए बांग्लादेश, फ्रांस, नेपाल और अल्बानिया जैसी कोशिशें भारत में की जा रही हैं : श्री मोहन भागवत

Dr Mohan Bhagwat Warning On AI

वंदे मातरम आज भी देता है एकता की प्रेरणा: सरसंघचालक मोहन भागवत

सरसंघचालक श्री मोहन भागवत का उद्बोधन: “हिंदू भाव में पूरे विश्व को जोड़ने की शक्ति है”

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies