पद्म सम्मान-2025 : सम्मान का बढ़ा मान
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पद्म सम्मान-2025 : सम्मान का बढ़ा मान

पिछले कुछ वर्ष से पद्म सम्मान ऐसी अनूठी विभूतियों को दिए जाने की परंपरा बनी है जो चमक-दमक से दूर अपने कर्तव्य पथ पर डटे हुए हैं। इस वर्ष भी ऐसी ही कुछ विभूतियों को पद्म सम्मान प्राप्त हुए हैं

Written byPanchjanyaPanchjanya
May 5, 2025, 07:30 pm IST
inभारत, विश्लेषण, महाराष्ट्र

गत अप्रैल को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनेक कर्म साधकों-सेवियों को पद्म सम्मान से सम्मानित किया। बता दें कि इस वर्ष के लिए 139 विभूतियों को पद्म पुरस्कार देने की घोषणा जनवरी में की गई थी। इनमें 7 पद्मविभूषण, 19 पद्मभूषण और 113 पद्मश्री सम्मान शामिल हैं। इनमें कुछ ऐसी हस्तियां हैं, जिन्हें लोग अच्छी तरह जानते भी नहीं हैं। ऐसे लोगों ने प्रचार से दूर रहकर और बिना किसी व्यक्तिगत इच्छा के पर्यावरण, शिक्षा, कला, राजनीति आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। यह अच्छी बात है कि भारत सरकार ने इनके कार्यों को देखा और आज उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला।

इनमें से एक हैं महाराष्ट्र के चेतराम पवार। ये वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यकर्ता हैं। चेतराम लगभग तीन दशक से जल, जंगल और जमीन के लिए कार्य कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण में इनकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। उनके इस कार्य को देखते हुए ही उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

पद्मश्री पाने वाली दूसरी विभूति हैं काशी के प्रकांड पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़। इन्हें यह सम्मान ज्योतिष के क्षेत्र में अच्छा कार्य करने और सांस्कृतिक विरासतों को संरक्षित करने के लिए दिया गया। बता दें कि इन्हीं शास्त्री जी ने राम मंदिर के शिलान्यास, रामलला की प्राणप्रतिष्ठा और श्री काशी विश्वनाथ धाम का मुहूर्त निकाला था।

कला के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित होने वाले वासुदेव कामत संस्कार भारती के अध्यक्ष रहे हैं। कर्नाटक में जन्मे और मुंबई में पले-बढ़े श्री कामत ने चित्रकला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्हें और कई सम्मान और पुरस्कार मिले हैं। अपनी अध्यक्षता में उन्होंने संस्कार भारती को एक नई पहचान दिलाई थी। सामाजिक क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य करने के लिए साध्वी ऋतम्भरा यानी दीदी मां को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। बता दें कि दीदी मां ने वृंदावन में ‘वात्सल्य ग्राम’ की स्थापना की है, जहां उपेक्षित और अनाथ बच्चों को रखकर पढ़ाया जाता है। वहां से शिक्षित होकर निकले बच्चे आज समाज जीवन के अनेक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। इससे पहले दीदी मां ने अयोध्या आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया था।

पद्मभूषण से सम्मानित होने वाले रामबहादुर राय इन दिनों इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के अध्यक्ष हैं। इन्हें यह सम्मान साहित्य, शिक्षा एवं पत्रकारिता में योगदान देने के लिए दिया गया है। इससे पहले इन्हें पद्श्री सम्मान भी मिला है।

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी को मरणोपरांत पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। उनका सम्मान उनकी पत्नी जे.सी. जॉर्ज ने ग्रहण किया। सुशील कुमार मोदी छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में भी लंबे समय तक कार्य किया। जे.पी. आंदोलन में उन्होंने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। बिहार में जब लालू-राबड़ी का राज था, उस समय सुशील कुमार मोदी ही ऐसे नेता थे, जिन्होंने उनके घोटालों को उजागर किया। चारा घोटाले में लालू यादव को सजा मिलने के पीछे सुशील कुमार मोदी की कड़ी मेहनत रही।

कला के क्षेत्र में पद्श्री सम्मान से सम्मानित होने वाली एक अन्य विभूति हैं मूर्तिकार अद्वैत चरण गणनायक। गणनायक की कृतियों ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित किया है। उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रीय पुलिस स्मारक, दांडी यात्रा स्मारक और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा जैसे भव्य स्मारकों की रचना की है। उनके द्वारा बनाया गया मोनोलिथिक ग्रेनाइट से निर्मित 30 फीट ऊंचा ‘राष्ट्रीय पुलिस स्मारक’ 21 अक्तूबर, 2018 को प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था।

साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने के लिए अमेरिकी लेखक और शोधकर्ता स्टीफन नैप को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इन्होंने अपनी पुस्तकों के माध्यम से दुनिया भर के पाठकों को भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणालियों से परिचित कराया है। इन्होंने भगवद्गीता, उपनिषद की टीका भी लिखी है। अपने व्याख्यानों और लेखन के माध्यम से नैप ने भारतीय आध्यात्मिकता के बारे में गलत धारणाओं को दूर किया है और एक सांस्कृतिक राजदूत के रूप में कार्य किया है। उन्होंने भारत की आध्यात्मिक विरासत को बढ़ाया है।

भारत और भारतीयता को बढ़ाने वाले इन लोगों का सम्मान कर भारत सरकार ने उस चलन पर विराम लगा दिया है, जिसमें सत्ता के इर्द-गिर्द रहने वालों को ही पद्म सम्मान से सम्मानित किया जाता था।

Topics: वनवासी कल्याण आश्रमकलाभगवद्गीताराजनीतिउपनिषदराष्ट्रीय पुलिस स्मारकवात्‍सल्‍य ग्रामसंस्कार भारतीपाञ्चजन्य विशेषपद्मविभूषणपद्म सम्मानपर्यावरणआध्यात्मिक विरासतशिक्षा
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