जर्मनी में शरणार्थी संकट: तुष्टिकरण की कीमत और बदलती डेमोग्राफी
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जर्मनी में शरणार्थी संकट: तुष्टिकरण की कीमत और बदलती डेमोग्राफी

यूरोपीय देशों ने तुष्टिकरण की राजनीति के लिए सीरियाई मुस्लिमों को अपने यहां शरण दी थी, ये जानते हुए भी कि ये उनकी खुद की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनेंगे। उसका नतीजा ये निकल रहा है कि आज जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, स्वीडन, नॉर्वे समेत कई यूरोपीय इस्लामिक कट्टरपंथ की आग में झुलस रहे हैं।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Feb 26, 2025, 07:06 am IST
inविश्व
An Afreecan Man becomes Nude performing Namaz on the street of Germany

जर्मनी में अफ्रीकी व्यक्ति ने नग्न होकर सड़क पर पढ़ी नमाज और उसे काबू में करने की कोशिश करते पुलिसकर्मी (बाएं से)

भारत में एक लोकोक्ति प्रचलित है, ‘बोया पेड़ बबूल का, आम कहां से पाए’ इसे सामान्य अर्थों में समझने की कोशिश करें तो हमारे कर्म के ही हिसाब से उसके परिणाम आते हैं। यूरोपीय देशों ने तुष्टिकरण की राजनीति के लिए सीरियाई मुस्लिमों को अपने यहां शरण दी थी, ये जानते हुए भी कि ये उनकी खुद की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनेंगे। उसका नतीजा ये निकल रहा है कि आज जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, स्वीडन, नॉर्वे समेत कई यूरोपीय इस्लामिक कट्टरपंथ की आग में झुलस रहे हैं। वहां हर दिन ये शरणार्थी लूट, मार, हत्या औऱ बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ऐसी ही एक और घटना जर्मनी से प्रकाश में आ रही है, जहां एक अफ्रीकी व्यक्ति खुले आम नग्न अवस्था में अकेले ही सड़क को ब्लॉक करके नमाज पढ़ने लगता है।

रेडियो जेनोआ द्वारा किए गए पोस्ट में दावा किया गया कि जर्मनी में एक फर्जी अफ्रीकी शरणार्थी ने बिना कपड़ों के सड़क पर ‘अल्लाह की इबादत’ की और फिर चाकू से जर्मन पुलिस पर हमला कर दिया। कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए। प्लेटफॉर्म के द्वारा शेयर किए गए वीडियो में अफ्रीकी व्यक्ति नग्न अवस्था में सड़क पर नमाज पढ़ता है और फिर दूसरी तरफ जर्मन पुलिस के अधिकारी उसे पकड़कर एक बिल्डिंग के अंदर ले जाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कथित शरणार्थी के बीच झड़प होती है और काफी मशक्कत के बाद पुलिस उसे काबू कर पाती है।

ये एक घटना है, जिसे रिपोर्ट किया गया। जर्मनी में हर दिन ऐसी घटनाएं होती हैं। जर्मनी में शरणार्थी आतंक का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि बर्लिन में हाल ही में मेट्रो में कब्जा कर लिया था। वीडियो से पता चला कि जर्मनी के एक मेट्रो में सीरियाई मुस्लिम शरणार्थियों के भर जाने के बाद पुलिस इतनी मजबूर हो गई कि उसने मेट्रो मूल जर्मन लोगों को बाहर निकाल दिया, ताकि उन्हें बचाया जा सके। जबकि, इस्लामिक कट्टरपंथी शान के साथ उसमें भरे हुए थे। खास बात ये कि ये कट्टरपंथी पुलिस और सरकार का मजाक भी उड़ा रहे थे। लेकिन पुलिस चुपचाप खड़े होकर तमाशा देखने के शिवा कुछ नहीं कर पाई।

लगभग दस वर्ष पहले जर्मनी ने अपने दरवाजे सीरिया के उन नागरिकों के लिए खोल दिए थे जो बशर अल असद के शासन में तरह-तरह के अत्याचारों से परेशान थे। लोगों को अभी तक जर्मनी की तत्कालीन चांसलर एंजेला मार्कल की वे तस्वीरें याद हैं, जिनमें वह शरणार्थियों का स्वागत कर रही थीं। इन दस वर्षों में तस्वीर बदली है। जर्मनी में लोगों ने शरणार्थियों के उस व्यवहार को देखा, जो उनकी कल्पना से बाहर था। वहाँ पर अपराध बढ़े और ऐसे अपराध हुए, जिसकी उन्होंने शायद ही कल्पना की हो। ऐसे अनेक उदाहरण आए जब पूरा देश ही नृशंसता से हिल गया था। लड़कियों के साथ बलात्कार हुए, उनके साथ यौन हिंसा हुई और इसके साथ ही अन्य अपराधों की संख्या में भी वृद्धि हुई। उसके बाद जर्मनी में आवाज उठने लगीं कि इन्हें बाहर किया जाए।

पिछले साल दिसंबर 2024 की बात है, जब सीरिया में बशर अल असद की सरकार गिरने के बाद जर्मनी में 8 दिसंबर को कई शहरों में सीरियाई शरणार्थी शहर में बाहर निकलकर आए और उन्होंने जमकर जश्न मनाया। लेकिन, एक सवाल फिर उठ खड़ा हुआ कि अब ये यहां क्यों हैं, अगर असद सरकार गिर गई है तो अब इन शरणार्थियों को वापस चले जाना चाहिए।

बीबीसी के अनुसार 2021 और 2023 के बीच 143,000 सीरियाई लोगों को जर्मन नागरिकता प्राप्त हुई है, जो किसी भी और अन्य देश की तुलना में बहुत अधिक है, मगर अभी भी 7 लाख से अधिक सीरियाई नागरिक शरणार्थी हैं। ब्रिटेन में, जहां पर 30,000 के करीब सीरियाई शरणार्थी हैं, वहाँ से भी लोगों की यही मांग सामने आ रही है कि अब शरणार्थियों को वापस चले जाना चाहिए। शरण लेने के बाद जिस प्रकार से यूरोपीय देशों की डेमोग्राफी में बदलाव आया है, ये केवल उनके लिए नहीं, बल्कि उन सभी देशों के लिए ‘वेक अप’ सिग्नल है कि अभी भी नहीं चेते तो फिर बहुत देर हो जाएगी।

Topics: इस्लामिक कट्टरपंथSyrian Muslimsजर्मनीcrime riseIslamic fundamentalismAngela Merkelयूरोपीय देशEuropean countriesशरणार्थी संकटRefugee crisisDemographic Changeसीरियाई मुस्लिमgermanyअपराध वृद्धिterrorismएंजेला मार्कलआतंकडेमोग्राफी बदलाव
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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