आतंकवाद का चेहरा अब केवल हथियार और सीमा पार से घुसपैठ तक सीमित नहीं रह गया है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने आतंक से जुड़े नेटवर्क को युवाओं तक पहुंच बनाने का एक नया माध्यम दे दिया है। इसी संदर्भ में पाकिस्तान स्थित Shahzad Bhatti Network का नाम जांच एजेंसियों की रिपोर्टों में सामने आया है। आरोप है कि यह नेटवर्क पारंपरिक आपराधिक गतिविधियों, गैंगस्टर नेटवर्क और डिजिटल माध्यमों के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिशों के बीच एक कड़ी के रूप में काम करता है।
शहजाद भट्टी को लेकर भारत में सुरक्षा एजेंसियों की जांच का केंद्र उसका कथित आपराधिक और डिजिटल नेटवर्क है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह नेटवर्क केवल किसी एक व्यक्ति या छोटे समूह तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग स्तरों पर काम करने वाले लोगों और संपर्कों का इस्तेमाल करता है। गृह मंत्रालय ने UAPA के तहत शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किया है। मंत्रालय ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।
अपराध से आतंक तक का बदलता रास्ता
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, आतंकवादी संगठनों ने पिछले कुछ वर्षों में गैंगस्टर नेटवर्क का इस्तेमाल करने की रणनीति अपनाई है। ऐसे नेटवर्क में पहले से मौजूद आपराधिक संपर्क, पैसा जुटाने के रास्ते और स्थानीय स्तर पर लोगों तक पहुंच जैसी क्षमताएं होती हैं। इसी वजह से गैंगस्टर नेटवर्क और आतंकवादी नेटवर्क के बीच की सीमा कई मामलों में धुंधली होती दिखाई देती है। आरोप है कि भट्टी नेटवर्क ने भी आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों और संपर्कों का इस्तेमाल अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए किया।
Pursuing PM Shri @narendramodi Ji's vision of zero tolerance against terror, the MHA declares the Shahzad Bhatti Network as a terrorist organisation under the UAPA.
The group is involved in smuggling of arms, explosives and narcotics across borders, apart from inciting youths…
— गृहमंत्री कार्यालय, HMO India (@HMOIndia) September 16, 2026
डिजिटल दुनिया बना नया माध्यम
इस नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता कथित तौर पर इसका डिजिटल पहलू है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाना और धीरे-धीरे उन्हें अपने प्रभाव में लाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, युवाओं को पहले सोशल मीडिया पर संपर्क किया जा सकता है। इसके बाद बातचीत को निजी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर ले जाने और धीरे-धीरे उन्हें नेटवर्क की गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की जाती है। इस तरह की रणनीति में खुले तौर पर आतंकवादी विचारधारा की बात करने के बजाय व्यक्तिगत संपर्क, पैसे या अन्य प्रलोभनों का इस्तेमाल किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ऐसे नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण पहलू उसका विकेंद्रीकृत ढांचा हो सकता है। यानी पूरी गतिविधि की जानकारी किसी एक व्यक्ति या समूह के पास नहीं होती। अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती हैं और उनके बीच सीमित संपर्क रखा जाता है। इस तरह का मॉडल सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच को कठिन बना सकता है। यदि किसी एक सदस्य की पहचान हो भी जाए, तो उसके पास पूरे नेटवर्क की जानकारी नहीं होने की संभावना रहती है।

















