शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक में भारत की ताकत और बढ़ती भूमिका की चर्चा देखने को मिली। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हुई इस बैठक में बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने भारत को दुनिया के ताकतवर देशों में शामिल बताया। उन्होंने चीन, रूस और भारत को आर्थिक और परमाणु ताकत वाले बड़े देशों के रूप में गिनाया। खास बात यह रही कि इस दौरान अमेरिका का नाम इस सूची में नहीं लिया गया। SCO की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई सदस्य देशों के बड़े नेता मौजूद रहे। बैठक में आतंकवाद, सुरक्षा, व्यापार, विकास और अलग-अलग देशों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत के लिए यह बैठक काफी अहम रही, क्योंकि यहां उसने आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अपना पक्ष मजबूती से रखा।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हुए देश
SCO के सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख दिखाया। देशों ने कहा कि आतंकवाद से लड़ाई में किसी भी तरह का दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी समस्याओं से निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आतंकवाद को लेकर अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद का इस्तेमाल अपनी सरकारी नीति के तौर पर करते हैं, उनके खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जानी चाहिए। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाता रहा है। बैठक में इंटरनेट के गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई। सदस्य देशों ने माना कि आतंकवादी और उग्रवादी संगठन इंटरनेट का इस्तेमाल अपनी गतिविधियों के लिए कर सकते हैं। इसलिए ऐसे इस्तेमाल को रोकने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। सदस्य देशों ने सूचना की सुरक्षा और इंटरनेट से जुड़े नए अपराधों से निपटने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई।
भारत के लिए क्यों खास है SCO?
SCO भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संगठन है। इसके जरिए भारत मध्य एशिया और यूरेशिया के कई देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर सकता है। व्यापार, सुरक्षा, विकास और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी भारत को इससे फायदा हो सकता है। बैठक में सुरक्षा से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। भारत ने इन फैसलों को महत्वपूर्ण बताया। आने वाले समय में आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर SCO की भूमिका और बढ़ सकती है। SCO की अगली राष्ट्राध्यक्षों की बैठक 2027 में पाकिस्तान में होगी। ऐसे में भारत और पाकिस्तान से जुड़े मुद्दे भी आगे चर्चा में रह सकते हैं।

















