भारत के जनजातीय सम्राट संग्राम शाह, गयासुद्दीन खिलजी को खदेड़ा, 52 गढ़ों पर फहराया ध्वज, इंग्लैंड के बराबर था साम्राज्य
July 22, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम जनजातीय नायक

भारत के जनजातीय सम्राट संग्राम शाह, गयासुद्दीन खिलजी को खदेड़ा, 52 गढ़ों पर फहराया ध्वज, इंग्लैंड के बराबर था साम्राज्य

गढ़ा -मंडला के महान हिंदू जनजातीय गोंडवाना साम्राज्य के स्मृत- विस्मृत महान वीरों और वीरांगनाओं की अमर गाथा की श्रृंखला भाग -2

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा
Nov 2, 2024, 09:20 pm IST
in जनजातीय नायक
राजा संग्राम शाह

राजा संग्राम शाह

भारत के गौरवशाली इतिहास की परंपरा में जनजातियों का अद्भुत और अद्वितीय माहात्म्य रहा है। ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों के आलोक में सतयुग में महादेव – बड़ा देव के पुत्र निषाद, जो तीर कमान विद्या में निपुण थे, भील जनजाति के आदि पुरुष के रूप में शिरोधार्य हैं। त्रेता में भगवान श्री राम के साथ निषादराज गुह और द्वापर युग में धनुर्धर अर्जुन की परीक्षा के लिए महादेव किरात भील के रूप में अवतरित हुए थे, वहीं वर्तमान युग के हर कालखंड में हुए स्वातंत्र्यसमर में जनजातियों का अति विशिष्ट योगदान रहा है, परंतु जनजातीय साम्राज्य की दृष्टि से भारत में सबसे बड़ा साम्राज्य मध्यकाल के नागवंशीय महानतम जनजातीय सम्राट संग्राम शाह का रहा है, जिन्होंने मालवा के सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी को पराजित कर महारथी अमान दास से संग्राम शाह का नाम धारण किया। संग्राम शाह भगवान भैरव के उपासक होने कारण जीवन पर्यन्त अपराजेय रहे। संग्राम शाह के काल में महान गोंडवाना साम्राज्य ( राजधानी -गढ़ा कंटगा,अब जबलपुर में है) का चरमोत्कर्ष हुआ। इन्होंने 61 वर्ष शासन किया,जो भारतीय दृष्टि से सर्वाधिक शासनवधि है।

यह है पृष्ठभूमि

भारत के हृदय स्थल में स्थित त्रिपुरी के महान् कलचुरि वंश का 13 वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में अवसान हो गया था, फल स्वरुप सीमावर्ती शक्तियां इस क्षेत्र को अपने अधीन करने के लिए लालायित हो रही थी। अंततः इस संक्रांति काल में एक वीर योद्धा जादो राय (यदु राय) ने तिलवाराघाट निवासी एक महान् ब्राम्हण सन्यासी सुरभि पाठक के भगीरथ प्रयास से त्रिपुरी क्षेत्रांतर्गत अंतर्गत गढ़ा कटंगा क्षेत्र में गोंड वंश की नींव रखी। यही आगे चलकर गढ़ा मंडला के साम्राज्य के रूप में सुविख्यात हुआ। अधिकांश गोंड राजाओं के मंत्री ब्राम्हण ही हुए हैं जो इस बात का प्रमाण है कि धर्म, वर्ण और जाति को लेकर भारत में कभी किसी प्रकार का वैमनस्य नहीं रहा, जिसे प्रकारांतर से अंग्रेजों और वामपंथियों के साथ परजीवी इतिहासकारों ने फैलाया है।

गोंडवाना साम्राज्य का चरमोत्कर्ष का प्रारंभ 48 वीं के महानायक अमान दास (संग्राम शाह) के समय हुआ। 14 नवंबर सन् 1480 में राजा अमान दास सिंहासन पर बैठे थे। रामनगर प्रशस्ति के अनुसार गोंड राजाओं की वंशावली में 53 राजाओं के नाम मिलते हैं। इस प्रशस्ति के लेखक राजकवि और पंडित जय गोविंद हैं, इसके अनुसार 34 वीं पीढ़ी में मदन सिंह का नाम आता है और यहीं से स्व की भावना से अभिप्रेत होकर गोंडवाना साम्राज्य का वास्तविक उत्कर्ष शुरू होता है। मदन सिंह के बाद क्रमशः उग्रसेन, ताराचंद्र(रामकृष्ण) , ताराचंद.,उदय सिंह ,मान सिंह ,भवानीदास, शिवसिंह, हरनारायण, सबलसिंह, राजसिंह,दादीराय ,गोरखदास(जबलपुर अंतर्गत गोरखपुर बसाया) अर्जुन दास (अर्जुन सिंह) और उसके उपरांत 48 वीं पीढ़ी में अमानदास दास का जन्म हुआ। अमान दास ने बृहत गोंड राज्य की नींव डाली।

गयासुद्दीन खिलजी को पराजित किया

सन् 1475 में अमान दास ने सत्ता संभाली ली थी और 1480 में विधिवत राज्याभिषेक हुआ, परंतु वास्तव में सन् 1484 में स्व का शंखनाद हुआ माड़ौगढ़ अर्थात् मालवा के सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी ने अचानक गढ़ा कटंगा पर हमला दमोह की ओर से किया। प्रारंभ में तो गोंड सेनाएं पीछे हटीं परंतु अवधूत बाबा की सलाह पर जबलपुर में जहां आज कृषि उपज मंडी है वहां चंडाल भाटा के मैदान में गोंड सेनाओं ने मोर्चा जमाया। चंडाल भाटा के मैदान में गयासुद्दीन खिलजी की सेनाओं और राजा अमान दास की सेनाओं में भयंकर युद्ध हुआ। राजा अमान दास और सेनापति बघ शेर सिंह ने कहर बरपा दिया। अमानदास और शेर सिंह ने मिलकर गयासुद्दीन खिलजी को उसकी बची- खुची फौज समेत सिंगौरगढ़ की सीमाओं के परे खदेड़ दिया। इस विजय में बाबा अवधूत अर्थात अघोरी बाबा का महत्वपूर्ण योगदान रहा। चंडाल भाटा के युद्ध में सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी की भयानक पराजय हुई, अमान दास ने सुल्तान से छत्र एवं निशान छीन लिए और इस विजय के उपलक्ष्य में अमान दास ने संग्राम शाह की उपाधि धारण की। इसी कालखंड में दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी का भाई जलालुद्दीन लोदी बागी हो गया और बदनीयती से गढ़ा कटंगा में प्रवेश करने को उद्यत हुआ तब राजा संग्राम शाह ने उसे करारी शिकस्त देते हुए खदेड़ दिया। राजा संग्राम शाह के शौर्य और पराक्रम को देखते हुए इब्राहिम लोदी ने भी उनकी शाह की उपाधि को स्वीकार किया।

52 गढ़ों पर फहराई थी विजय पताका

रामनगर की प्रशस्ति में लिखा है कि “प्रतापी अर्जुन सिंह का पुत्र संग्राम शाह था। जिस भाँति विशाल कपास का ढेर एक छोटी सी चिंगारी से नष्ट हो जाता है – उसी भांति उसके शत्रुगण तेजहीन हो गए थे। मध्यकाल का सूर्य भी उसके प्रताप के सामने धूमिल सा दिखाई देता था। मानो सारी पृथ्वी को जीत लेने का उसने निश्चय किया हो। तदनुसार उस ने 52 गढ़ों को जीत लिया था। ये गढ़ या किले उच्च पर्वतीय श्रेणियों पर स्थित थे जो विशाल प्राचीरों और बुर्जियों से परिवेष्ठित होने के कारण दुर्भेद्य समझे जाते थे। गोंडो में तो यह कहावत ही प्रचलित हो गई है कि “आमन बुध बावन में”।

ये थे सुदृढ़ 52 गढ़ और साम्राज्य था इंग्लैंड के बराबर

“वज्रप्रायै: पर्वत प्रौढ़ गाढ़ै सप्रकारैरम्बुभिश्चयाक्षयाणि।। द्वापंचाशद्घेन दुर्गाणि राज्ञां निर्वृत्तानि क्षोणिचक्र विजित्य।। ये 52 गढ़ वर्तमान संदर्भ में 13 जिलों में अवस्थित हैं। ये 52 गढ़ इस प्रकार थे – 1.गढ़ा 2.मारु गढ़ 3.पचेल गढ़ 4.सिंगौरगढ़ 5.अमोदा 6.कनोजा 7.बगसरा 8.टीपागढ़ 9.रामगढ़ 10.परतापगढ़ 11.अमरगढ़ 12.देवगढ़ 13. पाटनगढ़ 14.फतहपुर 15.निमुआगढ़ 16.भंवरगढ़ 17.बरगी 18.घुनसौर 19. चावड़ी (सिवनी) 20.डोंगर ताल 21.कोरवा (करवागढ़) 22.झंझनगढ़ 23. लाफ़ागढ़ 24.सौंटा गढ़ 25. दिया गढ़ 26.बांका गढ़ 27. पवई करहिया 28.शाह नगर 29. धामोनी 30.हटा 31.मडियादो 32. गढ़ा कोटा 33. शाह गढ़ 34. गढ़ पहरा 35.दमोह 36. रानगिर (रहली) 37.इटावा 38.खिमलासा (खुरई ) 39.गढ़ गुन्नौर 40.बारीगढ़ 41.चौकी गढ़ 42.राहतगढ़ 43.मकड़ाई 44. कारौबाग (कारुबाग) 45.कुरवाई 46.रायसेन 47.भौंरासो 48. भोपाल 49.उपतगढ़ 50.पनागर 51.देवरी 52.गौरझामर। अबुल फजल गोंडवाना राज्य के बारे में लिखता है कि “उस राज्य के पूर्व में रतनपुर (झारखंड प्रदेश) पश्चिम में रायसेन (मालवा) जिसकी लंबाई 150 कोस थी, उत्तर में पन्ना (बुंदेलखंड) और दक्षिण में दक्कन सूबा (बरार) जिसकी चौड़ाई 80 कोस थी। वह राज्य गढ़ा कटंगा कहलाता था।” इस दृष्टि से भी देखा जाए तो संग्राम शाह का साम्राज्य लगभग इंग्लैंड के क्षेत्रफल के बराबर था।

भैरव के परम उपासक थे एवं भगवा था राज्य का झंडा

राजा संग्राम शाह भगवान भैरव के परम भक्त थे इसलिए उनके राज्य का झंडा भगवा था। उन्होंने बाजनामठ की स्थापना करवाई थी और भैरव की कृपा से वो आजीवन अपराजेय रहे । राजा संग्राम शाह ने सिक्के चलवाए, अनेक मंदिर और मठों का निर्माण कराया इसके साथ ही जल प्रबंधन के अंतर्गत तालाबों का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया। उनका राजमहल, संग्राम सागर और संग्रामपुर आज भी उनकी अमिट स्मृति के प्रतीक हैं। राजा संग्राम शाह उत्तर भारत की राजनीतिक परिस्थितियों से भलीभांति परिचित थे। उत्तर भारत में शेरशाह ने हुमायूं को परास्त कर सूर वंश की नींव डाली थी। शेरखां (शेरशाह)साम्राज्य विस्तार कर रहा था और जैसे ही उसने बुंदेलखंड की ओर रुख किया वैसे ही कालिंजर के महाप्रतापी राजा कीरत सिंह की चिंताएं बढ़ गईं। उन्होंने गोंडवाना के महाप्रतापी राजा संग्राम शाह से सहायता मांगी, यहीं से राजा संग्राम शाह और कालिंजर के राजा कीरत सिंह के मध्य मैत्री स्थापित हुई। राजनीतिक संधि हुई और उसे प्रगाढ़ करने के लिए संग्राम शाह ने अपने सुपुत्र दलपति शाह का विवाह कीरत सिंह की वीरांगना पुत्री रानी दुर्गावती से करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सहर्ष स्वीकार कर लिया गया। इस तरह राजा संग्राम शाह ने “स्व” का शंखनाद कर “स्व” की सिद्धि भी प्राप्त की। सन् 1541 में एक समृद्ध और सुदृढ़ गोंडवाना साम्राज्य को अपने योग्य पुत्र दलपति शाह को सौंपकर महारथी राजा संग्राम शाह पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके स्वर्गारोहण पर आज भी एक वेदना से संपृक्त लोक गीत गाया जाता है जिसकी प्रथम पंक्ति है-कहाँ गए राजा अमान? वन की रौवे चिरैया!”गोंडवाना के महा प्रतापी राजा संग्राम शाह ने सन् 1480 से सन् 1541 तक कुल 61 वर्ष शासन किया जो कि संभवतः भारतीय इतिहास में सर्वाधिक शासनावधि है।

ये भी पढ़ें – राजा मदन सिंह की अलाउद्दीन खिलजी पर विजय और गढ़ा कटंगा में गोंडवाना साम्राज्य का उत्कर्ष

Topics: जनजातीय नायकपाञ्चजन्य विशेषगोंडवाना साम्राज्यराजा संग्राम शाहगयासुद्दीन खिलजीइंग्लैंड के बराबर राज्य
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

श्री अमरनाथ यात्रा में शामिल श्रद्धालु

श्री अमरनाथ यात्रा: आस्था, सेवा और स्वच्छता का संगम

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अशांति पैदा करने के प्रयास

राष्ट्रीय एकता का सूत्र है यह श्लोक, जो भारतभूमि को एक चेतना में बांधता है

द ओडिसी

वोकिज्म से ग्रस्त ‘हॉलीवुड’: पहचान की राजनीति, विविधता और प्रतिनिधित्व की नई बहस – ‘द ओडिसी’ एक विमर्श

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वृक्षारोपण करते हुए

पर्यावरण संरक्षण : पीढ़ी के लिए लगाओ पेड़

ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा और आधुनिक पहचान

Load More

ताज़ा समाचार

23 जुलाई का पंचांग

23 जुलाई का पंचांग: गुरुवार को बन रहा शुभ योग, जानें तिथि, नक्षत्र और लग्न का पूरा समय

Yugpravartak Dr Hedgewar Play Ravindra Bhavan Bhopal CM Mohan Yadav Sanskar Bharti Nadbrahma Panchjanya

“डॉ. हेडगेवार ने दिया समता का दर्शन, इसी से प्रेरित है UCC”: भोपाल में बोले CM मोहन यादव

सुरक्षाकर्मियों पर हमला करते सीजेपी के कथित समर्थक

दिल्ली में प्रदर्शन के बीच पुलिसकर्मी, RAF जवान की लिंचिंग की कोशिश, भाजपा नेताओं ने खौफनाक वीडियो साझा किया

ABVP Awadh Prant Lucknow Convention Indira Gandhi Pratishthan Yashwantrao Kelkar Event Panchjanya

“ABVP केवल छात्र संगठन नहीं, कार्यकर्ता और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है” : स्वांत रंजन जी

Assam Flood 2026 RSS Volunteers Relief Work Sivasagar Betbari Amguri Food Water Distribution Panchjanya

“नर सेवा ही नारायण सेवा”: असम में भयावह बाढ़ के बीच पीड़ितों का सहारा बने संघ के स्वयंसेवक, देखिए तस्वीरें!

मस्जिद का ‘मौलवी’ निकला पाक आतंकियों का मददगार, पुलिस ने किया गिरफ्तार

सांकेतिक चित्र

पंजाब में पेपर लीक का बड़ा कांड : फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में पेन कैमरे से भेजा प्रश्नपत्र, ब्लूटूथ से आए जवाब

श्री अमरनाथ यात्रा में शामिल श्रद्धालु

श्री अमरनाथ यात्रा: आस्था, सेवा और स्वच्छता का संगम

कल्याण बनर्जी, तृणमूल सांसद

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने महिला सांसद पर की अभद्र टिप्पणी,  मानसून सत्र से किया गया निलंबित

सीजेपी के प्रदर्शन में पत्रकारों पर किया गया हमला। महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार।

CJP का संसद मार्च :  मीडिया पर हमला, सच दिखाने पहुंचे पत्रकारों को बनाया निशाना, महिला पत्रकारों से बदसलूकी

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies