अदालत ने एक साथ 101 लोगों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा, आरोपियों ने वंचितों की पूरी बस्ती को ही फूंक डाला था
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अदालत ने एक साथ 101 लोगों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा, आरोपियों ने वंचितों की पूरी बस्ती को ही फूंक डाला था

यह फैसला जातिगत अत्याचार के एक मामले में अब तक का सबसे कठोर फैसला माना जा रहा है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Oct 25, 2024, 06:21 pm IST
inभारत, कर्नाटक
प्रतीकात्मक चित्र

प्रतीकात्मक चित्र

कर्नाटक के कोप्पल जिले की एक अदालत ने वंचित समाज की बस्ती में आग लगाने के मामले में 101 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला राज्य के इतिहास में जाति आधारित अत्याचार के एक मामले में अब तक का सबसे कठोर फैसला माना जा रहा है, जिसमें इतने बड़े पैमाने पर दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। यह घटना 28 अगस्त 2014 को गंगावती तालुका के मारकुंबी गांव में हुई थी, जब आरोपियों ने वंचित समाज के घरों में आग लगाकर उनके घरों और संपत्ति को नष्ट कर दिया था।

जातिगत भेदभाव की शुरुआत और हिंसा की वजह 

इस जातिगत हिंसा की जड़ में मारकुंबी गांव में वंचित समाज के युवकों द्वारा छुआछूत के खिलाफ उठाई गई आवाज थी। गांव में नाई की दुकान और ढाबों में प्रवेश को लेकर वंचित समाज के लोगों और उच्च जाति के लोगों के बीच विवाद उत्पन्न हुआ। युवकों की सक्रियता से नाराज होकर, आरोपियों ने बस्ती में घुसकर घरों को जलाया और वंचित समाज के लोगों पर हिंसक हमला किया।

अदालत का सख्त फैसला 

गुरुवार को कोप्पल की अदालत ने इस मामले में 101 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, जो राज्य के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय है। इस मामले में कुल 117 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 16 की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। सजा सुनाने के बाद, सभी दोषियों को कोप्पल जिला जेल भेजा गया, जहां से उन्हें बल्लारी जेल स्थानांतरित किया जाएगा। दोषियों के परिवारजन अदालत परिसर में भावुक नजर आए और पुलिस द्वारा जेल ले जाते समय उनकी आंखों में आंसू थे।

राज्यभर में विरोध प्रदर्शन 

इस घटना के बाद राज्य के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिससे पूरे राज्य में जातिगत भेदभाव और हिंसा के खिलाफ आक्रोश फैल गया था। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में कड़ी कार्यवाही की मांग की थी और अंततः अदालत ने सभी दोषियों को कठोरतम सजा दी।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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