1971 की अपनी पहचान से मुंह चुराता “आज का बांग्लादेश ”, 15 अगस्त की पहचान भी मिटाई
October 18, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Copy
    • Subscribe & Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

1971 की अपनी पहचान से मुंह चुराता “आज का बांग्लादेश ”, 15 अगस्त की पहचान भी मिटाई

बांग्लादेश की पहचान 1971 के युद्ध के बाद बनी थी, जबकि इसकी 1906 से लेकर 1971 तक इसकी पहचान मुस्लिम बहुल क्षेत्र की रही थी। ऐसा मुस्लिम बहुल क्षेत्र जो अपनी मुस्लिम पहचान को लेकर आगे बढ़ना चाहता था। यही कारण था कि 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना भी यहीं की गई थी।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Aug 14, 2024, 08:41 pm IST
inविश्लेषण
बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ। दंगाइयों ने बांग्लादेश के संस्थापक मुजीबुर रहमान की मूर्ति तोड़ी। शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया। अब मुजीबुर से जुड़ी हर पहचान मिटाई जा रही है।

बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ। दंगाइयों ने बांग्लादेश के संस्थापक मुजीबुर रहमान की मूर्ति तोड़ी। शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया। अब मुजीबुर से जुड़ी हर पहचान मिटाई जा रही है।

बांग्लादेश की कथित क्रांति अब एक विध्वंसक मोड पर पहुँच गई है। यह कथित क्रांति बांग्लादेश की पहचान के लिए ही विध्वंस का कार्य कर रही है। क्या शेख हसीना को हटाना ही इसका लक्ष्य था या कुछ और ?

वह लक्ष्य क्या था, वह इस बात से पता चल जाता है कि आज का बांग्लादेश अपने देश के नायक मुजीबुर रहमान की प्रतिमा और उनके प्रतीकों के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है? वह अंतत: उन्हें किस प्रकार से देख रहा है ? यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि बांग्लादेश की पहचान 1971 के युद्ध के बाद बनी थी, जबकि इसकी 1906 से लेकर 1971 तक इसकी पहचान मुस्लिम बहुल क्षेत्र की रही थी। ऐसा मुस्लिम बहुल क्षेत्र जो अपनी मुस्लिम पहचान को लेकर आगे बढ़ना चाहता था। यही कारण था कि 1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना भी यहीं की गई थी।

शेख मुजीबुर रहमान भी मुस्लिम लीग के ही युवा नेता थे, जिन्होंने भारत से अलग होकर एक ऐसे मुस्लिम मुल्क का सपना देखा था जहां पर उनके लोग पूरी आजादी के साथ रह सकें। यही कारण था कि उन्होनें डायरेक्ट एक्शन डे में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया था और पूर्वी पाकिस्तान को मजहब के आधार पर भारत से अलग करने में सफल रहे थे।

ईस्ट पाकिस्तान को बनाने वाले शेख मुजीबुर रहमान ही थे, क्योंकि उन्होंने मुस्लिम लीग के लिए कार्य करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। फिर भी आज उनकी ही प्रतिमाओं को क्यों तोड़ा जा रहा है? क्यों उस व्यक्ति की प्रतिमाओं को तोड़ा जा रहा है, जिन्होंने पहले मुस्लिम लीग के साथ मिलकर भारत से अलग ईस्ट पाकिस्तान के निर्माण और फिर बांग्लादेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
जो आंदोलन हुआ उसमें मुजीबुर्रहमान की प्रतिमाओं और फिर मुजीबंगर में 1971 के बलिदान मेमोरियल कॉम्प्लेक्स में ऐतिहासिक स्मृतियों को क्यों तोड़ा गया ?

Protesters in Bangladesh are swiftly attempting to erase historical memories. Statues at the 1971 Shaheed Memorial Complex in Mujibnagar have been destroyed by anti-India mobs. These statues depicted the brutal atrocities and rapes committed by the Pakistan Army against women in… pic.twitter.com/W3WCsAyMwx

— Geo Frontline (@geofrontlinetv) August 12, 2024

इतना ही नहीं बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने यह आदेश भी पारित किया है कि 15 अगस्त का आवश्यक अवकाश भी इस वर्ष नहीं होगा। 15 अगस्त भारत की स्वतंत्रता के अवसर पर अवकाश बांग्लादेश में नहीं होता है, बल्कि मुजीबुर्रहमान की स्मृति में अवकाश घोषित किया गया था।

दरअसल 49 वर्ष पूर्व 15 अगस्त को ही मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या के शोक में इस दिन को अवकाश घोषित किया गया था। और उसी दिन से इस दिन को शोक दिवस के रूप में मनाया जा रहा था। इस वर्ष बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने ऐसा मसौदा बनाया है कि 15 अगस्त का अवकाश समाप्त कर दिया जाए। पूरे बांग्लादेश में कानून और व्यवस्था लागू करने के लिए अतिरिक्त पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी।

वहीं इसे लेकर बांग्लादेश की निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने क्षोभ व्यक्त करते हुए देशवासियों के लिए एक पत्र लिखा है। उनके बेटे सजीब वाजेद ने एक्स पर अपनी माँ के पत्र का अंग्रेजी अनुवाद किया है। इस पत्र में उन्होंने उन तमाम लोगों के बलिदान का उल्लेख किया है, जिनका कत्ल बहुत ही बेरहमी से 15 अगस्त 1975 को कर दिया गया था। इस पत्र में उन तमाम लोगों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई है, जिन्होंने जान गंवाई थी।

वर्ष 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद शेख मुजीबुर्रहमान पर भाई-भतीजावाद के आरोप लगे थे और उनके पूरे परिवार की हत्या सेना के कुछ अधिकारियों ने कर दी थी। सुबह सुबह उनके गहर पर धावा बोल दिया था और फिर देखते ही देखते शेख मुजीबुर्रहमान, उनकी बेगम, उनके बेटे, बहुओं सभी को मार डाला गया।

शेख हसीना ने अपने पत्र में लिखा है कि 15 अगस्त को धानमंडी में, जिस घर बंगबंधु में यह हत्याएं हुई थीं, उन्होंने और उनकी बहन ने उस घर को देश को समर्पित कर दिया था और उसे एक संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया था। वहा पर साधारण और देश-विदेश से आने वाले विख्यात लोग जाते थे और उन स्मृतियों को जीते थे, देखते थे, जो बांग्लादेश के निर्माण में बलिदानियों की कुर्बानियों को दिखाती थीं और जिनमें आजादी की लड़ाई की कहानी शामिल थी।

उन्होंने लिखा कि यह संग्रहालय हमारी आजादी की भावना का प्रतीक है और हमने जो भी स्मृतियाँ सँजोकर रखी थीं, उनका उद्देश्य केवल बांग्लादेश के पीड़ित लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना था। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम मिलने लगे थे एवं बांग्लादेश अब दुनिया के विकासशील देशों के बीच महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मगर यह बहुत दुख की बात है कि अब सब राख में मिल गया है। जो स्मृति हमारी जीवनरेखा थी, वह राख में मिल गई है और यह राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान का घोर अपमान है, जिनके नेतृत्व में हमने अपना स्वाभिमान, अपनी पहचान और अपना आजाद मुल्क हासिल किया। यह लाखों बलिदानियों के खून का घोर अपमान है। मैं इस देश के लोगों से न्याय की मांग करती हूं। उन्होंने देशवासियों से यह भी अपील की कि वे 15 अगस्त का दिन मनाएं और बंगबंधु मेमोरियल म्यूजियम में प्रार्थना करें।

English translation of my mother's statement:

Dear Bangladesh,

As-salamu alaykum.

Brothers and sisters, on August 15, 1975, the Father of the Nation and the then President of Bangladesh, Bangabandhu Sheikh Mujibur Rahman, was brutally assassinated. I pay my deepest respects to…

— Sajeeb Wazed (@sajeebwazed) August 13, 2024

इस पत्र में भी उन्होंने अपने देश की उस पहचान को बनाए रखने की बात की, जो वर्ष 1971 में मुस्लिम लीग से अलग हटकर मुजीबुर रहमान ने बनाई थी। नया बांग्लादेश बनाने वाले, जब बांग्लादेश की बात करते हैं, तो वे इस इतिहास से मुंह मोड़ नहीं सकते हैं कि बांग्लादेश तो शेख मुजीबुर्रहमान के कारण ही अस्तित्व में आया है। यदि वे शेख मुजीबुर्रहमान की स्मृतियों को मिटा रहे हैं, तो प्रश्न यह उठता है कि क्या वे बांग्लादेश का नाम भी बदलेंगे? क्योंकि बांग्लादेश तो उन्हीं से है, जिनकी स्मृति नए बांग्लादेश के नाम पर मिटाई जा रही है? क्या नया बांग्लादेश बनाने वाले “पूर्वी पाकिस्तान” की पहचान को वापस लाना चाहते हैं, क्योंकि बांग्लादेश की पहचान तो शेख मुजीबुर रहमान के ही कारण है। उन्होंने ही मुस्लिम लीग के बंगाली जनता पर उर्दू को जबरन थोपे जाने का विरोध किया था और पूर्वी पाकिस्तान के प्रति पाकिस्तान सरकार के दोयम रवैये का विरोध भी किया था। यह भी सच है कि शेख मुजीबुर रहमान मुस्लिम लीग के ही नेता थे और मुस्लिम लीग के नेतृत्व में पाकिस्तान के निर्माण में भी भी उनका योगदान है। फिर ऐसे किसी व्यक्ति की स्मृति क्यों मिटाई जा रही है? या फिर यह कहें कि शेख मुजीबुर रहमान की “बांग्लादेश” के राष्ट्रपिता के रूप वाली स्मृति मिटाकर उनकी “मुस्लिम लीग के नेतृत्व में पूर्वी पाकिस्तान” वाली छवि को वापस लाया जा रहा है? यदि यह आंदोलन या कहें अंतरिम सरकार का उद्देश्य शेख हसीना के भ्रष्टाचार पर प्रहार करना था, तो फिर ऐसे में 15 अगस्त 1975 की स्मृति को क्यों हटाया जा रहा है या फिर बांग्लादेश के निर्माण के समय पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण का प्रदर्शन करती हुई प्रतिमाओं को क्यों तोड़ा जा रहा है? क्यों 1971 की नई पहचान के प्रतीकों को तोड़ा जा रहा है? या फिर यह कहें कि छात्र आंदोलन की आड़ में यह पूर्वी पाकिस्तान के बनने का आंदोलन था?

Topics: बांग्लादेशपूर्वी पाकिस्तानबांग्लादेश में तख्तापलटमुजीबुर रहमान
Share8
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

राहुल गांधी के साथ नेहा बोरा

बांग्लादेश के बाद उमर खालिद को लेकर घिरीं नेहा बोरा, भाजपा ने नया वीडियो शेयर कर कांग्रेस को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया

मोहम्मद यूनुस को न्यूयॉर्क में विरोध का सामना करना पड़ा

‘आतंकवादी, तुम यहां क्यों आए’, न्यूयॉर्क में मोहम्मद यूनुस पर फूटा बांग्लादेशी प्रवासियों का ही गुस्सा

Bharat Bhushan tiwari Fact check

गौरीपुर जामा मस्जिद तोड़ी गई? फैक्ट चेक में खुलासा – वीडियो बांग्लादेश का निकला

ढाका में म्यूजियम में फाड़ी गई जिन्ना की फोटो।

बांग्लादेश में जिन्ना को लेकर फिर विवाद : DUCSU म्यूजियम में उर्दू वाली तस्वीर पर हंगामा

बांग्लादेश में हिंदू पत्रकार की संदिग्ध मौत: आवामी लीग ने बताया ‘हत्या’.. कहा- बांग्लादेश छोड़ने पर मजबूर हिंदू !

गजब बेइज्जती है! पाकिस्तानी मौलाना फजलुर रहमान ने आसिम मुनीर का मजाक उड़ाया, 1971 के सरेंडर की याद दिलाई

Load More

ताज़ा समाचार

पी चिदंबरम का बड़ा आरोप: चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में SIR छोड़ दिया, 13.3 करोड़ नाम हटाए गए

Kolkata Durga Puja Stampede reason

Explainer: कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़: क्या थी वजह और कैसे बचें इस तरह की दुर्घटना से?

Hijab Controversy

अजरबैजान और ईरान: लड़कियों द्वारा हिजाब पर बवाल, क्या राजनीतिक इस्लाम और स्थानीय संस्कृति के बीच टकराव?

Goa CJP Protest

गोवा पुलिस ने CJP प्रदर्शन में 300 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की, हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप

JNU में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पथ संचलन

प्रतीकात्मक चित्र

नैनीताल पुलिस ने साइबर क्राइम हॉटस्पॉट के खिलाफ एक दिन में 43 FIR दर्ज किए, कुल 49 अभियोग

US Nidal Hassan Fansi

निदाल हसन की मौत की सजा का सीधा प्रसारण: पेंटागन का प्रस्ताव और ट्रंप का फैसला क्यों बदला?

प्रतीकात्मक तस्वीर

रिपोर्टर्स कलेक्टिव रिपोर्ट: इन्वेस्टिगेशन या राजनीतिक अभियान? तथ्यों की चयनात्मक और पूर्वाग्रही सोच

Kolkata Durga Puja Stampade

कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़: 12 लोग हिरासत में लिए गए, जांच के लिए एसआईटी गठित

ग्वालियर में भीषण सड़क हादसा: मंदिर के पास ट्रक चढ़ा, 12 भक्त मारे गए

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies