कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने चुनाव आयोग की चुनावी सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) छोड़ दिया है। अब वहां सिर्फ सामान्य स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 13.3 करोड़ नाम बिना उचित प्रक्रिया के हटाए गए।
चिदंबरम का क्या कहना है?
चिदंबरम ने अपने पोस्ट में लिखा कि विरोध और सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को समझ आ गई। बचे हुए 17 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में SIR छोड़ दिया गया है और सिर्फ सामान्य SSR चलेगा। नागरिकता के दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं रहेगी। उन्होंने पूछा कि 20 राज्यों में SIR क्यों लगाया गया और 13.3 करोड़ नाम (मृतकों सहित) बिना प्रक्रिया के कैसे हटाए गए। अब आयोग बाकी बचे मतदाताओं को जोड़ने का काम कर रहा है।
SIR और SSR में क्या फर्क है?
दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं। स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) चुनावी सूची को अपडेट करने का नियमित तरीका है। इसमें नए पात्र मतदाता जुड़ते हैं, और जो लोग मर गए, घर बदल गए या अब पात्र नहीं रहे, उनकी जानकारी अपडेट होती है। आमतौर पर इसकी योग्यता तिथि 1 जनवरी होती है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक अलग तरह का गहन संशोधन है। 17 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में SSR की घोषणा अपने आप में यह साबित नहीं करती कि SIR रद्द कर दिया गया है। दोनों की प्रक्रिया और मकसद अलग हैं।
SSR क्यों हो रहा है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR की घोषणा की है। इनमें 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव वाले पांच राज्य भी शामिल हैं। इसका मकसद नई सूची में नए मतदाताओं को जोड़ना और मौतों या पते बदलने की जानकारी अपडेट करना है। यह चुनावी सूची बनाए रखने का सामान्य हिस्सा माना जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने SIR से जुड़े एक याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और फैसला लेने की प्रक्रिया की जानकारी मांगी। नोटिस जारी होना किसी प्रक्रिया को अवैध घोषित करने के बराबर नहीं है। यह सिर्फ मामले की जांच का संकेत है। 13.3 करोड़ नाम हटाने का आरोप भी अदालत के फैसले या सत्यापित सबूत के बिना स्थापित नहीं माना जा सकता।
क्या SIR छोड़ दिया गया है?
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में SIR रद्द नहीं किया गया है। फेज 1 और 2 के तहत 17 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में (चुनाव वाले राज्यों सहित) यह प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 चुनावी सूची संशोधन से जुड़ी है।

















