असाधारण प्रतिभा की धनी व कुशल संगठक लक्ष्मीबाई केलकर
August 5, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

असाधारण प्रतिभा की धनी व कुशल संगठक लक्ष्मीबाई केलकर

13 अगस्त ,1947 जब देश में चारों और भय, चिंता, अविश्वास व दंगों का माहौल था तब दो अत्यंत साहसी और तेजस्वी महिलाएं लक्ष्मीबाई और वेणु ताई कराची हवाई अड्डे पर उतरीं।

Written byडॉ. सुनीता शर्माडॉ. सुनीता शर्मा
Jul 6, 2024, 10:53 am IST
inभारत

प्रत्येक राष्ट्र जो उन्नति चाहता है दिनों-दिन प्रगति के मार्ग पर बढ़ना चाहता है उसके लिए आवश्यक है कि वह अपनी समृद्धशाली संस्कृति और इतिहास को कभी ना भूले क्योंकि भूतकालीन कृतियां व घटनाएं ही भविष्य की पथ प्रदर्शक होती हैं। हम अपनी नींव, अपनी संस्कृति पर अडिग रहकर वर्तमान और भविष्य की ओर कदम बढ़ाए तो देश और समाज का निर्माण संभव है, इसी महान विचार को लेकर राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना हुई।

13 अगस्त ,1947 जब देश में चारों और भय, चिंता, अविश्वास व दंगों का माहौल था तब दो अत्यंत साहसी और तेजस्वी महिलाएं लक्ष्मीबाई (मौसी जी) और वेणु ताई कराची हवाई अड्डे पर उतरीं। हवाई यात्रा में पुरुषों के बीच केवल यही दो महिलाएं थीं। 14 अगस्त, 1947 को कराची के एक घर की छत पर 1200 से भी अधिक महिलायें एकत्रित हुईं और मौसी जी ने उन सबके दुख को देखते हुए उन्हें धैर्यशील बनने, संगठन पर विश्वास रखने और मातृभूमि की सेवा का व्रत जारी करने का प्रण दिलवाया साथ ही साथ इन बहनों को यह आश्वासन भी दिया कि आपके भारत आने पर आपकी सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा और जब वे महिलाएं हिंदुस्तान आईं तो मौसी जी ने मुंबई के कई परिवारों में गोपनीयता रखते हुए उनका संरक्षण भी किया।

14 अगस्त वह दिन था जब पाकिस्तान अपना पहला स्वतंत्रता दिवस मना रहा था और पूरे देश मे हिंदुओं का कत्लेआम जारी था, हिन्दू महिलाएं अपने सम्मान की रक्षा के लिए अत्यंत भयभीत थीं। महिलाओं के बलात्कार और अपमान की भयावह कहानियां रोज सामने आ रहीं थीं। ऐसे डरावने माहौल में राष्ट्र सेविका समिति की ये 2 निर्भीक नेत्री कराची में हिन्दू महिलाओं को ढ़ाढस बंधा रही थीं।मौसीजी यानि लक्ष्मीबाई केलकर ने 11 साल पहले ही (वर्ष 1936 में) राष्ट्र सेविका समिति संगठन की स्थापना की थी। देश की आजादी के समय ये संगठन अभी अपनी शुरुआती अवस्था में ही था पर इसकी संस्थापिका के पास एक बड़ा विजन था।

उत्तरोत्तर बढ़ने वाले और चिर स्थायी संगठन अवश्य ही संस्थापक की दूरदर्शिता और उसके उत्तराधिकारियों के समर्पण और योग्यता का परिणाम होते हैं। भारतीय राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा में पिछले 88 वर्षों से समर्पित राष्ट्र सेविका समिति भी एक ऐसा ही संगठन है जो महिलाओं द्वारा स्थापित तथा संचालित है और राष्ट्र निर्माण में सतत कार्यरत है।

राष्ट्र सेविका समिति जैसे महान संगठन की नींव रखने वाली गरिमामयी व आलौकिक व्यक्तित्व की स्वामिनी लक्ष्मीबाई केलकर जी जिन्होंने मातृशक्ति को राष्ट्र कार्य के लिए प्रेरित किया और एक ऐसे संगठन की स्थापना की जो आज विश्व का सबसे बड़ा महिला संगठन है। महिलाएं केवल परिवार निर्मात्री ही नहीं अपितु राष्ट्र निर्मात्री भी हैं। महिलाओं में राष्ट्रीय, सामाजिक, सांस्कृतिक चेतना जागृत करने वाली लक्ष्मीबाई केलकर ने पूजनीय डॉक्टर हेडगेवार जी से भेंट की जिन्होंने पूर्वोत्तर (1925) में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” की स्थापना की थी। लक्ष्मीबाई केलकर ने उनके समक्ष अपना विचार रखा कि अगर पुरुष राष्ट्र उत्थान के कार्य के लिए सज्ज हो सकते हैं तो राष्ट्र कार्य का उत्तरदायित्व नारी का भी हो।

कन्या, भगिनी , पत्नी , माता के रूप में जैसे नारी परिवार को एक सूत्र में बांधती है अगर वही दुर्बल होगी तो समाज कैसे सबल होगा इसलिए महिलाओं को भी मानसिक ,आध्यात्मिक बौद्धिक तथा शारीरिक सामर्थ्य बढ़ाकर राष्ट्रहित में अपने कर्तव्यों का वहन करना चाहिए। इसी उद्देश्य की साधना हेतु अपना स्वत्व समष्टि के लिए समर्पित करने वाली शीलवान ,बलवान सेविकाओं का निर्माण हो जो राष्ट्र हित में समर्पित हों। उनके विचारों से प्रभावित होकर डॉक्टर हेडगेवार जी की सलाह पर एक स्वतंत्र महिला संगठन की स्थापना हुई जिसे आज हम सभी ‘राष्ट्र सेविका समिति” के रूप में जानते हैं । यह विश्व का भारतीय संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखने के काम करने वाला सबसे बड़ा महिला संगठन है।

ममतामयी लक्ष्मीबाई केलकर का जन्म आषाढ़ शुक्ल दशमी के दिन 6 जुलाई, 1905 को नागपुर में हुआ। तेजस्वी बालिका को देखते ही डॉक्टर ने बालिका का नामकरण कर दिया और नाम दिया गया कमल। बालिका कमल के माता-पिता भास्कर राव दाते व यशोदाबाई तन-मन-धन से सामाजिक कार्यों में लगे थे। बालिका की माताजी से उन्हें निर्भीकता, राष्ट्रप्रेम के गुण घुट्टी में मिले ।पिता सरकारी नौकरी में थे और उस समय ब्रिटिश शासन में किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिए लोकमान्य तिलक द्वारा लिखित ‘केसरी” जैसे साहित्य को खरीदना, उसका अध्ययन करना देशद्रोह माना जाता था लेकिन कमल की मां तिलक साहित्य खरीदती भी थीं और महिलाओं के साथ संयुक्त रूप से पढ़ती भी थीं ।अंग्रेजों के अत्याचारों से पीड़ित जनमानस देश की स्वतंत्रता के लिए कसमसा रहा था ।ऐसे वातावरण में परिवार में पिता ,ताई व माता जी समाज को जागृत कर राष्ट्रहित के कार्यों में संलग्न थे।

बालिकाओं के लिए कोई स्वतंत्र विद्यालय ना होने के कारण कमल को मिशनरी स्कूल भेजा गया लेकिन विद्यालय में और परिवार से मिलने वाली शिक्षा में महान अंतर के कारण बालिका के मन में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई और अंततोगत्वा मिशनरी स्कूल छोड़ कमल को ‘हिंदू मूलांची शाला” में दाखिल करवाया गया। जिस समय महाराष्ट्र में गायों को वध से बचाने का अभियान चल रहा था उस समय कमल ने परिवार की अन्य महिलाओं व मंदिर के पुजारियों के साथ मिलकर आंदोलन को नई राह दी। इस अभियान से उनमें विनय शीलता, विनम्रता, सहजता और एक वक्ता के गुणों का विकास हुआ। महाराष्ट्र में प्लेग महामारी के प्रकोप के समय भी उन्होंने बिना किसी भेदभाव के समाज के नागरिकों की सेवा की ।ऐसा समय जब लोग प्लेग से प्रभावित मरीज को छूने तक से परहेज करते थे ऐसे समय में कमल ने सहजता और धैर्य के साथ सेवा कार्य किया।

शिक्षित ,जागरूक कमल ने दहेज प्रथा का विरोध किया और समाज के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत किया तथा बिना दहेज के विवाह का अपने माता-पिता के समक्ष आग्रह रखा।कमल का विवाह वर्धा के प्रसिद्ध अधिवक्ता पुरुषोत्तम राव से हुआ। विवाह के पश्चात कमल का नामकरण हुआ लक्ष्मी। विवाह के लगभग 12 वर्षों बाद ही तपेदिक की लाइलाज बीमारी के कारण पति का देहांत हो गया। मात्र 27 वर्ष की उम्र में लक्ष्मी विधवा हो गईं। पति के निधन के पश्चात दो बेटियों और छह बेटों की जिम्मेदारी, पारिवारिक दायित्व को निभाते हुए भी लक्ष्मी की कांग्रेस की प्रभात फेरियों, पिकेटिंग आदि कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी थी।

गांधी आश्रम में प्रार्थना में गांधी जी ने एक बार कहा था कि सीता के जीवन से राम-राम बने इसलिए महिलाओं को अपने समक्ष सदैव सीता का आदर्श रखना चाहिए ।इसी विचार के चलते लक्ष्मी ने रामायण का अध्ययन किया। समाज में नारी शोषण, अत्याचारों के समाचारों के कारण लक्ष्मी की सोच में परिवर्तन आया। महिलाएं आत्मनिर्भरता ,आत्मविश्वास जैसे गुणों से ही अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों का विरोध कर सकती हैं उनमें यह विचार घर करने लगा। बंगाल के समाचारों (स्नेह लता ,कुसुम बाला) ने इस आग को और भड़का दिया था ।लक्ष्मी के पुत्र मनोहर व दिनकर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में जाना प्रारंभ किया ।उनके जीवन में आए परिवर्तनों को देखकर इन के मन में भी इसी प्रकार के महिला संगठन की आवश्यकता का विचार आया और वे डॉ. हेडगेवार जी से मिलीं। डॉक्टर हेडगेवार जी उनके संयमित व्यवहार, निर्भीकता, संकल्प और महिलाओं के प्रति उनके जुनून से अत्यधिक प्रभावित हुए और उन्होंने संगठन की स्थापना की स्वीकृति प्रदान की। इस प्रकार राष्ट्र सेविका समिति संगठन की नींव पड़ी। इस संगठन की विचारधारा पुरुषों के संगठन के समान किंतु समानांतर थी और यह एक स्वतंत्र संगठन था। ‘राष्ट्र सेविका समिति” की स्थापना वर्धा में विजयदशमी के दिन 1936 में हुई।

अब यक्ष प्रश्न यह भी था कि महिलाओं को एक संगठन की छत के नीचे लाकर ऐसा क्या सिखाया जाए जिससे कि वे राष्ट्र धर्म के कार्य में जुट जाएं। समिति के लिए योजनाएं बनने लगीं। वे महिलाओं से प्रतिदिन निश्चित समय पर मिलने लगीं ताकि महिलाएं सुशीला, सुधीरा, समर्था बनें व उनके हृदय में हिंदुत्व का भाव जगे। महिलाओं को सैनिक पद्धति के अनुसार शाखा में प्रशिक्षण दिया जाने लगा । लक्ष्मीबाई केलकर जी ने समिति की शाखाओं की बहनों से संपर्क हेतु साइकिल चलाना ,भाषण देना ,भाषण देने के लिए भी लगातार विषयों का गहन अध्ययन कर महत्वपूर्ण बिंदु निकालना व प्रभावी भाषा में लगातार बोलने का अभ्यास शुरू किया। इसी अभ्यास ने उन्हें एक अच्छा वक्ता बना दिया। स्वास्थ्य के महत्व को जानते हुए 1953 में उन्होंने ‘स्त्री जीवन विकास परिषद” का आयोजन कर डॉक्टरों को एकत्र कर परिचर्चा आयोजित की। योगासन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होगा इसीकारण समिति शिक्षा वर्ग में योगासन का समावेश किया गया। एक आदर्श सेविका कैसी हो? इस विचार पर भी लगातार चिंतन मनन कर स्पष्ट रूपरेखा तैयार की। समिति शाखा स्थान पर अनुशासित होकर व्यायाम,योग, दंड,छुरिका, नियुद्ध आदि की शिक्षा दी जाने लगी। खेलों का समावेश भी शाखा में किया जाने लगा क्योंकि खेलों के माध्यम से बहनों में आध्यात्मिक मन, शौर्य, साहस, धैर्य ,देशभक्ति का निर्माण होता है। सुदृढ़ शरीर में तेजस्वी मन का निर्माण होता है इसलिए बौद्धिक विकास के विभिन्न कार्यक्रम भी शाखा में करवाए जाते हैं ताकि समिति की सेविकाओं में भारतीय संस्कृति,इतिहास, धर्म और अध्यात्म का ज्ञान प्राप्त हो सके।

राष्ट्र भाव सेविकाओं के अंतस् में बसा महान भाव है इसलिए देश पर जब कभी भी प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप रहा हो (बाढ़ ,भूकंप, अकाल, तूफान, सुनामी व युद्ध काल) की विपरीत परिस्थितियों में भी समिति सेविकाओं ने धन ,वस्त्र, दवाइयां, प्राथमिक चिकित्सा सभी रूपों में बढ़ चढ़कर भाग लिया है। आज राष्ट्र सेविका समिति अनेक शिक्षण संस्थाएं, सिलाई केंद्र, योग केंद्र, औषधालय, आदिवासी छात्राओं के लिए छात्रावास, भजन मंडल आदि भी चला रही है।

वर्तमान में राष्ट्र सेविका समिति भारतीय महिलाओं का सबसे बड़ा और सुदृढ़ संगठन है। सेविका समिति सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक धरातल पर 1936 से काम कर रही है ।शाखाओं के माध्यम से समिति की सेविकाएं (सदस्या) समाज और देश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। वंदनीय मौसी जी लक्ष्मीबाई केलकर ने एक ऐसे स्वप्न को साकार किया जिसे उन्होंने खुली आंखों से देखा था और आज विश्व के शक्तिशाली संगठनों में से एक राष्ट्र सेविका समिति की धमक पूरे विश्व में फैली है।प्रफुल्लित मुख, गरिमामयी व प्रेरक व्यक्तित्व की स्वामिनी, वीरांगना ,ऊर्जावान, कर्मठ, दृढ़ निश्चयी , साहसी व आत्मविश्वास से भरपूर वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर आद्य संस्थापिका राष्ट्र सेविका समिति केवल एक नाम नहीं है अपितु वे अपने आप में एक संस्था हैं।

राष्ट्र सेविका समिति संगठन की स्थापना का दृढ़ निश्चय कर समिति रूपी वृक्ष को लगातार घना, छायादार, सघन ,फल फूल से परिपूर्ण बनाने में जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लगा दिया ऐसी प्रातः स्मरणीय, वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर से आज पूरा भारत ही नहीं अपितु विदेश में रहने वाले भारतीय भी परिचित हैं। जिन्होंने केवल भारत ही नहीं अपितु विश्व के अनेक देशों में रहने वाली सैकड़ों महिलाओं में हिंदुत्व की अलख जगाई।

Topics: महिलाओं को शिक्षितआत्मनिर्भरSelf-reliantLaxmibai Kelkarलक्ष्मीबाई केलकरRashtra Sevika Samitiपाञ्चजन्य विशेषEducating women
Share1
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

‘अमर्यादित शब्दों को उचित कैसे ठहराया जा सकता’

आज का श्लोक : भारतीयं सदाचारं स्वधर्मश्चापि शाश्वतम्

अमदाबाद में 2008 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों की तस्वीर ( फाइल फोटो)

अमदाबाद विस्फोट : फांसी और फांस

जतंर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का एक दृश्य

‘स्मृति और विस्मृति के संघर्ष में हमारी विजय अभी शेष’

‘परिवर्तन दोष देने से नहीं, स्वयं उत्तरदायित्व स्वीकार करने से आता है’

जंतर-मंतर पर सीजेपी के आंदोलन के दौरान मंच पर (बाएं से) सौरभ दास, अभिजीत दीपके और आशुतोष।

नैतिक अनाचार, गंभीर अपराध

Load More

ताज़ा समाचार

Uttarakhand Chief Electoral Officer Dr BVRC Purushottam SIR Voter List BLO Meeting Panchjanya

घर आएंगे BLO, नहीं काटने होंगे चक्कर”: बुजुर्गों-दिव्यांगों के लिए उत्तराखंड चुनाव आयोग का बड़ा फैसला!

Puri Rath Yatra 2026 Unsung Heroes Divyajyoti Parida Jagannath Temple Odisha Panchjanya

“लाखों ने किए दर्शन, लेकिन पीछे छूट गई ये कहानी”: पुरी रथ यात्रा 2026 को ऐतिहासिक बनाने वाले असली हीरो!

meta ceo mark zuckerberg apologizes to india for csam and deepfake content

‘गलत कंटेट बूस्ट करने का मिला था मोटा पैसा’ : मार्क जुकरबर्ग ने डीपफेक, आपत्तिजनक चाइल्ड कंटेंट के लिए मांगी माफी

ABVP Hoshiarpur Medhavi Chhatra Samman RSS Prant Pracharak Narendra Kumar Avinash Rai Khanna Panchjanya

“ज्ञान केवल नौकरी के लिए नहीं, राष्ट्र सेवा के लिए” : होशियारपुर में ABVP ने 400 होनहार छात्रों को किया सम्मानित

Kairana Hindu Exodus Main Accused Furqan Police Encounter Shamli Panchjanya

मिट्टी में मिला 346 हिंदू परिवारों के पलायन का जिम्मेदार! पुलिस मुठभेड़ में ढेर 1 लाख का इनामी फुरकान

Uttarakhand Sanskrit Education Secretary Deepak Kumar Meets Nepal Envoy Dr Surendra Thapa Sanskrit AI MoU Panchjanya

India Nepal Sanskrit Education MoU: संस्कृत और AI के साथ जुड़ेंगे भारत-नेपाल, विश्वविद्यालयों के बीच होगा समझौता

मूल निवासी दिवस के नाम पर षड्यंत्र (सांकेतिक फोटो- एआई द्वारा निर्मित)

मूल निवासी दिवस: नरसंहार के इतिहास को उत्सव में बदल डाला, जानें वैश्विक ताकतों का मिशनरी एजेंडा

एफसीआरए से विदेशी फंडिंग के गलत इस्तेमाल पर कसेगा शिकंजा

FCRA 2026 और विदेशी फंडिंग: सेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही की चुनौती

कलकत्ता हाईकोर्ट

‘मदरसों में वंदे मातरम् गाने से आसमान नहीं टूट पड़ेगा’: ईसाई स्कूलों का हवाला देते हुए कलकत्ता HC ने की सख्त टिप्पणी

अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में आया बड़ा बदलाव (फोटो सांकेतिक है और एआई द्वारा निर्मित)

5 अगस्त 2019 का ऐतिहासिक फैसला: अनुच्छेद 370 हटने से बदला जम्मू-कश्मीर और भारतीय राजनीति का नक्शा

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies