फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेट (CSAM ), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार से मांगी माफी है। जुकरबर्ग ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें कुछ खास तरह के कंटेंट को बूस्ट करने के लिए मोटी रकम मिली थी। मेटा के सीईओ का माफीनामा ऐसे समय पर आया है, जब केंद्र सरकार और मेटा के अधिकारियों के बीच हाल ही में एक बैठक हुई।
कंटेंट को बूस्ट करने के लिए मिला था मोटा पैसा
समाचार एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें मेटा के अधिकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिलने पहुंचे। मेटा के प्रतिनिधियों ने यह स्वीकार किया कि उनके प्लेटफॉर्म पर कुछ खास तरह के कंटेंट को बूस्ट करने के लिए पैसे दिए गए थे। कंपनी ने इसके लिए माफी मांगी और अपनी गलती पर अफसोस जताया।
हालांकि, मेटा प्रमुख को स्पष्ट रूप से बताया दिया गया है कि उनकी कंपनी इंटरमीडियरी डेफिनिशन के तहत नहीं आती है। यानी वे आपत्तिजनक कंटेट को लेकर बिचौलिए या मध्यस्थ की भूमिका में नहीं थे। उनका प्लेटफॉर्म ही यह तय करता है कि कौन सा कंटेंट किसे मिलेगा। इसलिए आईटी एक्ट के तहत ‘सेफ हार्बर’ की सुविधा उन पर लागू नहीं होती है।
क्या है ‘सेफ हार्बर’ की सुविधा
सेफ हार्बर एक कानूनी प्रावधान है, जो सोशल मीडिया और इंटरनेट कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की तरफ से शेयर किए जाने वाले कंटेंट (थर्ड-पार्टी डेटा) के लिए कानूनी जिम्मेदारी से छूट देता हैं। यूजर के लिहाज के भारत मेटा का सबसे बड़ा बाजार है, जहां करोड़ों लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं।
पीएम मोदी की वीडियो हटाने पर माफी की मांग
इससे पहले, संसद की स्थायी समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो को अस्थायी रूप से हटाने के लिए मार्क जुकरबर्ग से माफी मांगने को कहा था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो फेसबुक और इंस्टाग्राम से कुछ समय के लिए हटा दिया गया था, लेकिन बाद में इसे बहाल कर दिया गया। कंपनी ने इस घटना के लिए तकनीकी गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया था और माफी मांगी थी। पीएम मोदी की पोस्ट हटाने पर सरकार के समन के बाद बुधवार (5 अगस्त) को मेटा ग्लोबल टीम ने आईटी मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति ने बाल यौन शोषण सामग्री और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री को लेकर मध्यस्थ प्लेटफॉर्मों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।
सरकार मेटा प्रमुख की माफी से संतुष्ट नहीं
बीबीसी ईवाईई (BBC EYE) के अनुसार, लगभग 30 अलग-अलग विज्ञापनों की पहचान की गई थी, जिनमें यौन शोषण को बढ़ावा दिया जा रहा था। बाद में इसकी जानकारी भारतीय अधिकारियों को दी गई, जिस पर मेटा से जबाव मांगा गया। बताया जा रहा है कि सरकार मेटा प्रमुख की इस माफी से संतुष्ट नहीं है। इस मामले में जल्द ही मेटा अधिकारियों को फिर से बुलाया जाएगा।
















