कलकत्ता हाईकोर्ट ने मदरसों में वंदे मातरम् के छह छंद गाने को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज करते हुए कहा, “मदरसों में वंदे मातरम् के छह छंद गाने से आसमान नहीं टूट पड़ेगा।” यह याचिका बंगाल सरकार के मदरसों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को अनिवार्य करने के आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी।
हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की बेंच ने मंगलवार (4 अगस्त) को यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिस पर याचिकाकर्ता के वकील विकास रंजन भट्टाचार्य बहस कर रहे थे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने दूसरे धार्मिक समुदायों द्वारा चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों में की जाने वाली प्रार्थना का हवाला देते हुए कहा, “देश के हजारों ईसाई स्कूलों में पढ़ने वाले सभी छात्रों से गॉड की प्रार्थना करने को कहा जाता है। तो क्या किसी खास धर्म से जुड़े छात्र यह सवाल उठाते हैं कि आप मुझसे ईसाई मत से जुड़ी प्रार्थना क्यों करा रहे हैं? ऐसे में अगर मदरसों में वंदे मातरम् गीत गया तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। आज अगर मुझसे कोई ऐसी बात दोहराने को कहे जो मेरे धर्म में नहीं है तो क्या होगा? क्या मैं अपने धर्म से बाहर हो जाऊंगा?”
याचिकाकर्ता का तर्क
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने कोर्ट में तर्क दिया कि वंदे मातरम् देश का राष्ट्रगीत जरूर है, लेकिन इसे मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों पर जबरन लागू नहीं किया जा सकता। जब संविधान अपनाया गया था तो बहुत विचार-विमर्श के बाद यह तय किया गया था कि केवल दो छंद ही गाए जाएंगे। अगर कोई इसे अपनी मर्जी से गाता है तो कोई दिक्कत नहीं है, परन्तु इसे अनिवार्य कर नहीं किया जा सकता। इससे सांप्रादिक सौहार्द बिगड़ सकता है। इन दलीलों को सुनने के बाद राज्य की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल धीरज कुमार त्रिवेदी ने भट्टाचार्य से सवाल किया कि क्या उन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है, जिन्होंने मदरसों में वंदे मातरम् गाने के आदेश वाले सर्कुलर का उल्लंघन किया है? एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में कहा कि अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है कि अगर कोई वंदे मातरम् नहीं गाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। क्या अभी तक किसी को कोई परेशानी हुई है?
प्रचार पाने के मकसद से दायर की याचिका
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल धीरज कुमार त्रिवेदी ने कहा, “दुर्भाग्य से ऐसी जनहित याचिकाएं आ रही हैं, जो असल में पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन (प्रचार पाने के मकसद से दायर याचिका) को बढ़ावा दे रही हैं।” उन्होंने कोर्ट से अपना पक्ष और रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर तुरंत अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए राज्य सरकार को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक’ संसद से पारित
बीते महीने (जुलाई 2026) ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद से पारित किया गया। यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन करता है। इसके जरिए राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान सम्मान दिया गया है। वंदे मातरम् के गायन के दौरान किसी भी तरह का व्यवधान या उसका अपमान आपराधिक कृत्य माना जाएगा और इसके लिए तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है।

















