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शैक्षिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव

राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत को बदलने में प्रत्यक्ष योगदान देने वाली एक ऐसी शिक्षा प्रणाली को सामने रखती है जिसकी जड़ें स्वदेशी रीति-रिवाजों और मान्यताओं में हैं

Written byनेहा सिन्हानेहा सिन्हा
Jul 28, 2022, 12:28 pm IST
inभारत, शिक्षा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में स्कूली शिक्षा पर जोर दिया गया है

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में स्कूली शिक्षा पर जोर दिया गया है

नई शिक्षा नीति (एनईपी) एक विस्तृत दस्तावेज है जिसमें शिक्षा के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। बाल्यकाल की शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण तक, सभी कुछ। यह एक महत्वाकांक्षी नीति है जो भारतीय शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए उसे विश्वस्तरीय प्रणाली बनाने का प्रयास करती है। इस नीति के बारे में ठीक ही कहा गया है कि यह ‘पहुंच, समता, गुणवत्ता, मितव्ययिता और उत्तरदेयता’ के स्तंभों पर आधारित है यह नीति भारत को एक जीवंत ज्ञान केंद्र में बदल देगी।’

मौलिक कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की कल्पना की गई है जो भारतीय रीति-रिवाजों और मान्यताओं पर आधारित हो और भारत को बदलने की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष योगदान कर रही हो। इस नीति का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को स्थायी रूप से ऐसे बदलना है जिससे देश में समतापूर्ण-जीवंत और ज्ञानसंपन्न समाज स्थापित हो सके। इसका इरादा सभी को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना तथा भारत को सभी क्षेत्रों के ज्ञान की महाशक्ति बनाना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति छात्रों को न केवल विचार के स्तर पर ज्ञानवान होने बल्कि आत्मा, बुद्धि और कर्मों का भी ज्ञान रखने के गहरे गर्व के साथ प्रबुद्ध करने का प्रयास करती है। इसमें सुनिश्चित किया गया है कि सभी संस्थानों के पाठ्यक्रम छात्रों में मौलिक कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान की गहरी भावना विकसित करने के साथ ही अपने देश के साथ आत्मीयता और बदलती दुनिया में अपनी भूमिकाओं और उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूकता विकसित करें।’

विविध क्षेत्रों का अन्वेषण
समग्र और बहुविषयक शिक्षा के उद्देश्यों के अनुरूप ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति में छात्रों को अपनी रुचि का क्षेत्र पहचानने और उस विशेष क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त के लिए कई विषयों की जांच-परख करने का अवसर दिया गया है। इसका अंतिम लक्ष्य छात्रों की बुद्धि, सौंदर्यबोध आदि विभिन्न क्षमताओं को विकसित एवं रूपांतरित करते हुए उन्हें सामाजिक, शारीरिक, भावनात्मक और नैतिक तरीकों से एकीकृत करना है। शिक्षा पद्धति में नए नामकरण के साथ नए पाठ्यक्रमों की संकल्पना भी ऐसे की गयी है जिससे कला, मानविकी, भाषा, विज्ञान, समाज विज्ञान आदि के साथ ही पेशेवर, तकनीकी तथा व्यावसायिक क्षेत्रों में सामाजिक जुड़ाव की नैतिकता, संचार, चर्चा और बहस जैसे कौशलों और किसी चुने हुए क्षेत्र या क्षेत्रों में सघन विशेषज्ञता आदि जैसी 21वीं सदी की महत्वपूर्ण क्षमताओं से सम्पन्न सुयोग्य व्यक्तियों का विकास किया जा सके।’ लंबी अवधि में शिक्षा के प्रति इस तरह के समग्र दृष्टिकोण को उच्चतर शिक्षा ही नहीं पेशेवर, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा जैसे सभी क्षेत्रों और विषयों से संबंधित कार्यक्रमों में व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जाता है। इसीलिए संस्थानों द्वारा अपने पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति तथा मूल्यांकन योजनाओं को अद्यतन करके नए पाठ्यक्रम शुरू करने की व्यवस्था की गई है जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी।

लीक से अलग सोच
नई शिक्षा नीति न केवल परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों पर शोध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी बल्कि अत्याधुनिक विषय क्षेत्रों में आॅनलाइन पाठ्यक्रमों सहित शिक्षण सामग्री और पाठ्यक्रमों के आरंभिक संस्करण बनाने और पेशेवर शिक्षा जैसे विशिष्ट क्षेत्रों पर उनके प्रभाव का आकलन करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। नए पाठ्यक्रम न केवल शिक्षार्थियों के बीच नए अवसर पैदा करते हैं, बल्कि वे छात्रों में जीवन में कुछ अच्छा करने का आत्मविश्वास भी पैदा करते हैं। यहां किसी विशेष संस्थान के ढांचागत विकास को समझना भी महत्वपूर्ण है।

स्कूल छोड़ने की दर घटाना
समग्र और बहु-विषयक दृष्टिकोण वाली इस नई शिक्षा नीति में अद्यतन पुस्तकालयों, कक्षाओं, गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशालाओं, प्रौद्योगिकी, खेल/मनोरंजन क्षेत्रों, छात्र चर्चा स्थलों, छात्रावासों और कैंटीन जैसे उपयुक्त संसाधनों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। ये उन पहल का हिस्सा हैं जो सीखने के वातावरण को आकर्षक और सहायक बनाने के लिए आवश्यक हैं ताकि सभी छात्रों को सफल बनाया जा सके। इसके अलावा, शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य छात्रों द्वारा बीच में शिक्षा छोड़ने की दर को घटाना है। इसलिए, भारत के शैक्षिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव असंदिग्ध रूप से तय हैं।

वैश्विक भी, स्थानीय भी
यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि नए पाठ्यक्रम शुरू करने की नीति से छात्रों को व्यक्तिगत रूप से कैसे लाभ हो रहा है। छात्र अब अधिक लचीलेपन के साथ शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि वे अपनी रुचि, सुविधा और करियर विकल्पों के अनुसार शिक्षा प्रणाली में प्रवेश ले सकते हैं, बाहर निकल सकते हैं और फिर से प्रवेश कर सकते हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने आईआईटी-गुवाहाटी के दीक्षांत समारोह में बहुत सही कहा था कि—‘शिक्षा को रोजगार और उद्यमी पैदा करने चाहिए।’ नई शिक्षा नीति का उद्देश्य यही करना है। यह हमारे समाज में रोजगार और उद्यमी पैदा करने में मदद करेगी। इसलिए हम अंत में यह कह सकते हैं कि नई नीति अपने दृष्टिकोण में वैश्विक होने के साथ-साथ स्थानीय भी है। शिक्षा की नींव को मजबूत करने, सर्वाधिक वंचितों की शैक्षिक जरूरतों को पूरा करने और भारत को शिक्षा के क्षेत्र में विश्वस्तर पर अग्रणी बनाने के इरादे से शैक्षिक सुधार के सर्वप्रमुख एजेंडे के रूप में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर दिया जाना महत्वपूर्ण नीतिगत प्रगति की ओर संकेत करता है।
(लेखिका हैदराबाद विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र की परास्नातक छात्रा हैं)

Topics: आईआईटी-गुवाहाटीशैक्षिक सुधारनई शिक्षा नीतिसकारात्मक बदलावपूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम
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