पाकिस्तान से एक बार फिर बेअदबी पर सजा की खबर आई है। अब ईसाई व्यक्ति आरिफ मसीह पर आरोप लगाया गया कि उसने कहा है कि पैगम्बर मोहम्मद उसके सपने में आए थे और मोहम्मद उमेर की बेटियों से निकाह करने को कहा। उमेर ने आरिफ मसीह पर उसकी दो नाबालिग बेटियों से छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया है। उसने लड़कियों के चेहरे पर कुछ अजीब चीज लगाने की भी कोशिश की।
इस आरोप के बाद लोगों ने आरिफ मसीह को कॉलोनी के जिम में घेर लिया और उसे जमकर पीटा। इसके बाद उसे पुलिस के हवाले किया गया। पुलिस ने धारा 295-सी भी लगाई है, जिसमें पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ अपमानजनक बातों पर मौत तक की सजा है।
आरिफ मसीह कौन है?
आरिफ मसीह परिवार के साथ पंजाब यूनिवर्सिटी की स्टाफ कॉलोनी मे रहता था। यह घर उसके पिता के नाम पर आवंटित था। पिता की मृत्यु के बाद परिवार सैंट मैरी कोलॉली, गुलबर्ग में शिफ्ट हो गया। हालांकि आरिफ के दोस्त स्टाफ कॉलोनी में ही रहते थे, तो वह वहां उनसे मिलने चला जाता था। आरिफ़ ने उस कालोनी में दस से ज्यादा साल बिताए थे, और यही कारण था कि वह अक्सर वहां आता-जाता था।
परिवार के अनुसार आरिफ का आना-जाना वहा कुछ मुसलमानों को पसंद नहीं आया और उन्होंने उसे झूठे आरोप लगाकर बेअदबी के कानून का शिकार बना दिया। निजी दुश्मनी के चलते झूठा फंसाया गया है।
पाकिस्तान में मानवाधिकारों पर काम करने वाले लोगों का कहना है कि पाकिस्तान में बेअदबी के कानूनों का दुरुपयोग हो रहा है और निजी दुश्मनी निकालने के लिए लोगों को फंसाया जा रहा है। उन्होनें मांग की है कि अधिकारी निष्पक्ष जांच करें, जिससे कि सच का पता लग सके।
अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का यह अकेला मामला नहीं
हाल ही में पाकिस्तान में एक ईसाई युवती को केवल इसलिए एक कट्टरपंथी मुस्लिम ने मार डाल था क्योंकि उसने उससे शादी से इनकार कर दिया था। 21 वर्षीय सबा महबूब की हत्या रावलपिंडी में उसके घर पर 3 सितंबर को कर दी गई थी। क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल ( Christian Daily International) के अनुसर उसकी हत्या उसके एक पड़ोसी ने की थी। हत्यारोपी ने उसके सौतेले भाई का अपहरण किया और उससे कहा कि वह इस हत्या का आरोप अपने सिर पर ले ले।
मीडिया के अनुसार सबा और उसकी दो बेटियां अपनी मां और सौतेले परिवार के साथ पिछले साल से रह रही थी। वह अपने पति के नशे की आदत के चलते अपने मायके में थी। मायके में उसका पड़ोसी अदनान बट उसे तरह फुसला रहा था और एक बार तो उसने बाजार में उसका रास्ता भी रोक लिया था। सबा ने उसे एक-दो बार अपनी रक्षा के लिए थप्पड़ भी मारे थे। सबा के भाई जोशुआ का कहना है कि शायद इसीलिए उसने यह हत्या की। बट ने सबा के माथे में गोली मारी थी।
अस्पताल में उसका शव लेने पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की मगर बट को लेकर लिखा कि उसका कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं था। बाद में पता चला कि उस पर ड्रग्स, गैरकानूनी हथियार, लड़ाई, चोरी, डकैती और दंगे के भी केस दर्ज थे।
इसके बाद मुसलमानों और ईसाई दोनों ही समुदाय के लोगों ने बट की गिरफ़्तारी की बात की और सबा और सबा की बेटियों के लिए न्याय मांगा। इस मामले के बाद भी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का यही कहना था कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ बुरा व्यवहार हो रहा है।

















