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‘सीजफायर’ के लिए गिड़गिड़ाया था पाकिस्तान

ऑपरेशन सिंदूर का सच उन सैन्य अधिकारियों की जुबानी सामने आया है, जिन्होंने इस पूरे अभियान को अंजाम दिया। ‘डीक्लासीफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ डॉक्यूमेंट्री बताती है कि 88 घंटे चले इस अभियान में फैसले कैसे लिए गए और पाकिस्तान को जवाब देने की रणनीति क्या थी

Written byविष्णु शर्माविष्णु शर्मा
Sep 4, 2026, 09:46 am IST
inविश्व, रक्षा

सेना का सम्मान और सैन्य अधिकारियों पर उंगली ना उठाने वाली परंपराएं विपक्ष भूल गया है, सर्जिकल स्ट्राइक हो या एयर स्ट्राइक कई बड़े नेताओं ने उनसे सुबूत मांगने में कोई कोताही नहीं बरती। एक तरफ सारा श्रेय सेना को देते रहे, दूसरी तरफ उनकी सफलता पर संदेह भी करते रहे। यही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हुआ। महिला सैन्य अफसरों को भी नहीं छोड़ा गया। लेकिन इस ऑपरेशन के साथ सबसे विशेष बात ये थी कि ये पहला ऑपरेशन भारतीय सैन्य इतिहास का रहा है, जिसे तीनों सेनाओं ने एक ही नाम दिया, ‘ऑपरेशन सिंदूर’। ऐसे में सत्ताधारी नेताओं को दूर रख सैन्य अफसरों ने खुद पूरे ऑपरेशन की बारीक से बारीक जानकारी खुद साझा की है।

डिस्कवरी प्लस ओटीटी प्लेटफाॅर पर रिलीज हुई ‘डीक्लासीफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ डाॅक्यूमेंट्री के निर्देशक हैं, मनिक बेरी असगांवकर और प्रभु असगांवकर। उनकी प्रशंसा इस बात में है कि उन्होंने इस सीरीज के लिए हर उस चेहरे से बात करने में सफलता प्राप्त की, जो इस ऑपरेशन से सीधे जुड़ा हुआ था, चाहे वो तीनों सेनाओं के प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान (वर्तमान में सेवानिवृत्त) हों या फिर पाकिस्तान के आतंकी अड्डे और रणनीतिक हवाई अड्डे ध्वस्त करने वाले फाइटर पायलट और या फिर अलग-अलग बटालियनों के मुखिया हों। सबसे दिलचस्प चेहरा है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का, जो पहले ही बयान में ये कहकर लोगों को भावुक और क्रोधित, एक साथ दोनों कर देते हैं कि आतंकियों ने उस महिला से कहा, “जाकर मोदी से बोल देना, जो कर सकता है वो कर ले।”

88 घंटे के ऑपरेशन की कहानी

इस सीरीज की शुरुआत होती है डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) के परिचय से, राजीव घई को 22 अप्रैल 2025 को जब खबर मिलती है कि पहलगाम की बैसरन वैली में कोई आतंकी घटना हुई है तो वो सीधे सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के पास पहुंचते हैं, जो सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे होते हैं। वह जनरल उपेंद्र द्विवेदी को सभी के सामने इस हमले की जानकारी देते हैं और इसके लिए कोई नाटकीय रूपांतरण नहीं फिल्माया गया, बल्कि उस वक्त के फोटोज ही प्रयोग किए गए हैं। हालांकि सेना ने उन्हें कई फाइल और वास्तविक ऑपरेशन के फोटो और वीडियोज भी उपलब्ध करवाए हैं, जो सीरीज को रोमांचक दृश्यों से भर देते हैं।

फिर एक के बाद एक अधिकारी बताते हैं कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को सूचना दी गई। कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना सऊदी का दौरा बीच में ही रोककर भारत वापसी की और दिल्ली एयरपोर्ट पर मीटिंग की। ये इतना सामान्य तरीके से बताया गया है कि कहीं से भी राजनीतिक नहीं लगता, लेकिन देश को एक संदेश जाता है कि प्रधानमंत्री ने कितनी गंभीरता से इस मुद्दे को लिया कि पहली रणनीतिक मीटिंग एयरपोर्ट पर ही कर ली। वहां जो पीएम ने कहा, वो अजीत डोभाल के मुंह से सुनकर सारे किंतु-परंतु खत्म हो जाते हैं, “वी विल गो आफ्टर दैम, जमीन में हों, आसमान में हों, पाताल में हों, वो लोग जहां भी हों.. हम उन्हें छोड़ेंगे नहीं।”

साक्ष्य दिए पर फिर भी विवाद हुए

सरकार सतर्क थी, 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद विपक्ष के तमाम नेताओं ने सुबूत के तौर पर फोटो, वीडियो मांगकर सरकार को झूठा साबित करने की कोशिश की थी। 2018 में वो वीडियो, फोटोज रिलीज कर पाई थी। लेकिन इस बार तो 7 मई के हमले के दिन ही दो महिला सैन्य अफसरों कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मुरीदके (जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय) और बहावलपुर (लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय) समेत कई आतंकी ठिकानों पर हमले के फोटोज वीडियोज दुनिया के सामने रख दिए थे। ऐसे में कोई भी साक्ष्य नहीं मांग पाया। लेकिन मुद्दा बनाया गया रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए जुलाई 2025 के बयान को कि ‘किसी सैनिक की जनहानि नहीं हुई है’।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैटेलाइट पर पूरे मिशन को देखते सैन्य अधिकारी (डाॅक्यमेंट्री का दृश्य)

राजनाथ सिंह का बयान था कि जब भारत की तरफ से हमला हुआ तो क्या एक महिला पायलट मारी गई है? उन्होंने इस बात से साफ मना कर दिया था। इसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई किसी पायलट के बलिदान होने की बात से मना किया गया था। वहीं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सरकार ने मई में ही उन 6 सैनिकों के नाम जारी करके उन्हें श्रद्धांजलि दे दी थी, जो पाकिस्तान की तरफ से हुई फायरिंग में बलिदान हुए थे। बावजूद इसके केसी वेणुगोपाल रक्षा मंत्री के बयान को तोड़-मरोड़कर झूठा आरोप लगाते हुए, उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव ले आए थे।

इसी तरह जब पाकिस्तान ने कुछ राफेल और एक सुखोई विमान को गिराने का दावा किया तो फौरन विपक्ष ने उसे हाथों हाथ लपक लिया, लेकिन जब पिछले दिनों 36 राफेल विमानों के ईंधन से जुड़ा एक टेंडर जारी हुआ तो ये स्पष्ट हुआ कि सारे राफेल सुरक्षित हैं। हालांकि सिंगापुर में दिए गए सीडीएस चौहान के भी एक बयान को भी विपक्ष ने उठाया। उन्होंने उस बयान में राफेल के गिरने और पायलट की मृत्यु की खबर को भी खारिज किया था, लेकिन किसी ने उसे गंभीरता से नहीं लिया।

सीजफायर और भारत की रणनीति

पूरी सीरीज उस 88 घंटे के ऑपरेशन पर है, जो पहलगाम हमले के बाद किया गया, और 7 मई को शुरू होने तक 22 अप्रैल से जो जो हुआ, उस दौरान उठाए गए एक एक कदम की जानकारी है। लेकिन जो आरोप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सीजफायर के दावे के बाद विपक्ष अब भी लगा देता है, ये सीरीज उस पर जरूर कुछ खुलासे करती है। खुद एनएसए अजीत डोभाल बताते हैं कि कैसे पहले हमले के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पीएम मोदी को फोन पर बताया कि पाकिस्तान बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। तो पीएम मोदी ने जवाब दिया कि हम जवाब में उससे तीन गुना बड़ा हमला करेंगे। डीजीएमओ राजीव घई बताते हैं कि जब हमने पाया कि सिरसा में मिसाइल (फतह सेकंड) गिरी है, जिसका लक्ष्य दिल्ली था, तो फौरन पीएम मोदी के साथ मीटिंग में बड़ा फैसला लिया गया और वो फैसला था ब्रह्मोस को आजमाने का, 11 रणनीतिक हवाई पट्टियों को निशाना बनाया गया। उसके बाद असीम मुनीर ने अमेरिकी रक्षा सचिव मार्को रूबियो को फोन लगाया। मार्को ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को फोन किया। जयशंकर ने उन्हें साफ समझा दिया कि तीसरे देश का हस्तक्षेप मंजूर नहीं, उनके डीजीएमओ को कहिए कि हमारे डीजीएमओ को फोन करे।

झूठी गीदड़ भभकी

जब पाकिस्तान के आतंकी हमले के बाद पहले हमले के बाद 7 मई को पाकिस्तान के डीजीएमओ को राजीव घई ने हमले की सूचना देने के लिए फोन किया था तो उसका जवाब था कि अब तो भारत को जवाब देकर ही फोन पर बात होगी। लेकिन 3 दिन बाद जब भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने उसके सारे हवाई अड्डे तबाह कर पाकिस्तान को धुंआ-धुंआ कर दिया तो, 10 मई को पाकिस्तान भारत के सामने गिड़गिड़ाया कि अब तो बदला पूरा हो गया, अब तो सीजफायर कर दीजिए। स्पष्ट है कि अमेरिकी दबाव जैसा कुछ नहीं था बल्कि सीजफायर भारत की शर्तों पर हुआ था।

इस डॉक्यूमेंट्री में वीडियोज, सैटेलाइट इमेजेज के साथ-साथ उन पाकिस्तानियों के भी वीडियो भी शामिल किए गए हैं, जो हमले के वक्त उन ठिकानों के आसपास ही थे और उन्होंने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किए थे। केवल ये वीडियो ही नहीं बल्कि आतंकियों के जनाजे में पाक आर्मी के अफसरों वाले फोटोज भी देखने को मिलेंगे। पाकिस्तान ने अपनी हवाई पट्टियों पर भारतीय हमले के बाद भारत की कई हवाई पट्टियों पर हमले और भारत के कई एंटी मिसाइल सिस्टम एस-400 को ध्वस्त करने के झूठे दावे भी किए, जिसकी किसी भी स्वतंत्र या बाहरी एजेंसी ने पुष्टि नहीं की। इस सीरीज के अभी पहले सीजन के केवल दो एपिसोड रिलीज हुए हैं, उम्मीद है कि बहुत जल्द पहलगाम हत्याकांड के साजिशकर्ताओं और उसके बाद उनको ढूंढकर मारने की कहानी, ‘परमाणु पहाड़ी’ पर हमले की कहानी जैसी तमाम दिलचस्प घटनाएं भी सामने आएंगी।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रेस ब्रीफिंग के दौरान तीनों सेनाओं के ऑपरेशंस डायरेक्टर

तो ‘ऑपरेशन ट्यूलिप’ होता नाम

हालांकि इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज में एनएसए डोभाल, एक सैन्य विश्लेषक के अलावा केवल सैन्य अफसरों के ही बयान लगाए गए हैं, सीरीज को गैर राजनीतिक रखने की कोशिश की गई है, पीएम और रक्षा मंत्री के एक दो केवल सार्वजनिक वीडियो बयान ही लगाए गए हैं। एक सैन्य अफसर पीएम मोदी का बयान बताते हैं कि, “उनकी गोली आएगी तो हम जवाब गोले से देंगे।” आर्मी चीफ बताते हैं कि मुझे प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन का नाम सुझाने को कहा, मैंने कहा ‘ऑपरेशन ट्यूलिप’ रख देते हैं क्योंकि ये वैली में हुआ, तो वो बोले ‘ऑपरेशन सिंधु’ कैसा रहेगा, मैंने कहा हां यह भी ठीक रहेगा, तब वो बोले सिंधु नहीं ‘ऑपरेशन सिंदूर’, क्योंकि हमारी बेटियों ने अपना सिंदूर खोया है। लेकिन युवाओं के लिए ये सीरीज इसलिए अहम है कि उन्हें पता होना चाहिए कि हमारी सेनाएं कैसे देश की रक्षा के लिए कंधे से कंधा मिलाकर राजनीतिक नेतृत्व के साथ काम करती हैं।

वो जानेंगे कि कैसे पहले 9 आतंकी अड्डों को ध्वस्त करने के लक्ष्य तय किए गए, 7 की जिम्मेदारी आर्मी के सर थी, तो एयरफोर्स के सर जैश और लश्कर के मुख्यालय थे। फिर जब पाकिस्तान ने भारी गोलीबारी की तो जवाब में भारत ने उससे भी तगड़ी गोलीबारी करके उन्हें रणनीति बदलने पर मजबूर किया। फिर पाकिस्तान ने तुर्की के ड्रोन्स और मिसाइलों से हमला किया, जिन्हें भारतीय ड्रोन्स और एस-400 एंटी मिसाइल्स से नाकाम किया गया। फिर पाकिस्तान की मिसाइल के जवाब में कैसे 11 रणनीतिक हवाई पट्टियों को ध्वस्त कर, पस्त उन्हें सीजफायर कॉल के लिए मजबूर किया गया, इसकी एक एक बारीक जानकारी उन्हें मिलेगी। इस सीरीज में वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल एपी सिंह, जल सेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने भी उस दौरान की कई रणनीतिक जानकारियां दी हैं।

युवा ये भी जानेंगे कि कैसे पाक सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर ने एक कार्यक्रम में भारत और हिंदुओं के खिलाफ दो हफ्ते पहले ही जहर घोला था, जो इशारा था कि उसके इरादे नेक नहीं। वो ये भी जानेंगे कि कैसे रक्षा सेनाओं के प्रमुख और राजनीतिक नेतृत्व ‘सरप्राइज फैक्टर’ को बनाए रखने के लिए ज्यादा चिंतित था कि दुश्मन सोच भी ना पाए कि हम क्या करने वाले हैं और इसलिए जिस रात ये ऑपरेशन होना था, उस शाम को एक भी सैन्य अधिकारी ने वॉर रूम में आने से पहले अपने घरवालों को ये नहीं बताया कि वो कहां जा रहे हैं या क्यों जा रहे हैं, किसी ने भी अपने काफिले को नहीं लिया और कई ने अपनी कार या सुरक्षा को भी नहीं।

दिलचस्प था उस युवा सैन्य अधिकारी हर्ष का बयान भी दिखाना, जिसको 7 मई को हमले के बाद ये जिम्मेदारी मिली थी कि वो ट्विटर (एक्स) पर आर्मी के एकाउंट से देश, दुनिया को इस हमले की जानकारी देगा। बावजूद इसके कुछ चेहरों के बयान तो दिखाए गए, उनके पद भी दिखाए गए, लेकिन उनके चेहरों को छुपाया गया, कुछ जगहों पर ‘अनडिस्क्लोज्ड लोकेशन’ लिखा गया, कुछ अहम बिंदुओं को छोटे से वाक्य में समेट दिया गया और इस डॉक्यूमेंट्री की रिलीज के बाद पाकिस्तान की जिस ‘परमाणु पहाड़ी’ कैराना हिल्स को लेकर सीडीएस अनिल चौहान पर हमले को लेकर जो बयान दिया, उसके बारे में इस सीरीज में जिक्र भी नहीं है और इस सबकी अकेली वजह केवल पाकिस्तान या चीन जैसे शत्रु देश ही नहीं बल्कि हमारे देश का विपक्ष भी है, जो इतने संवेदनशील ऑपरेशन पर भी उंगली उठाने से बाज नहीं आता।

 

Topics: अनिल चौहानसैन्य अधिकारीपाञ्चजन्य विशेषजनरल उपेंद्र द्विवेदीपहलगाम हमलाऑपरेशन सिंदूरपाकिस्तानडिस्कवरी प्लसभारतीय सेनाराजीव घईअजीत डोभालमुरीदके और बहावलपुरब्रह्मोस मिसाइलसीजफायर
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वरिष्ठ पत्रकार और फिल्म समीक्षक [Read more]
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