दुनिया में अपराधियों को जेल जाते और हथकड़ियों में बंधे तो आपने खूब देखा होगा। लेकिन पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में एक ऐसा ‘कैदी’ है, जिसने न कोई अपराध किया, न किसी अदालत में पेश हुआ और न ही उसे अपनी सफाई देने का मौका मिला। वह कैदी है- एक पेड़। लांडी कोटल में खड़ा यह बरगद आज भी भारी लोहे की जंजीरों से जकड़ा हुआ है। उसके ऊपर लगे बोर्ड पर लिखा है- “I am under arrest”, यानी “मैं गिरफ्तार हूं।” इस पेड़ को पिछले करीब 128 साल से जंजीरों में बांधकर रखा गया है। यह जगह ऐतिहासिक खैबर दर्रे के पास है और कभी ब्रिटिश शासन के समय काफी महत्वपूर्ण मानी जाती थी। आज यह पेड़ लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय है और ब्रिटिश काल की एक अजीब कहानी समेटे हुए है।
आखिर पेड़ को गिरफ्तार क्यों किया गया?
इस पेड़ की कहानी साल 1898 के आसपास की बताई जाती है। उस समय भारत में ब्रिटिश शासन था और लांडी कोटल में ब्रिटिश सेना की मौजूदगी थी। एक ब्रिटिश अधिकारी जिसका नाम कुछ रिपोर्टों में जेम्स स्क्विड बताया गया है, एक रात शराब के नशे में था। उस दौरान उसे ऐसा लगा कि सामने खड़ा एक पेड़ धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ रहा है। अधिकारी को लगा कि पेड़ अपनी जगह से आगे आ रहा है। उसने वहां मौजूद एक सैनिक को आदेश दिया कि इस पेड़ को गिरफ्तार कर लिया जाए। सैनिक ने अधिकारी के आदेश को गंभीरता से लिया। उसने पेड़ के तने के चारों ओर भारी लोहे की जंजीरें बांध दीं। इसके बाद पेड़ को वहीं “गिरफ्तार” घोषित कर दिया गया।
आज भी नहीं हटाई गईं जंजीरें
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ब्रिटिश शासन 1947 में भारत से खत्म हो गया। पाकिस्तान एक अलग देश बन गया, लेकिन इस पेड़ की जंजीरें नहीं खोली गईं। समय के साथ यह घटना एक ऐतिहासिक निशानी बन गई। पेड़ बढ़ता गया, उसकी शाखाएं फैलती गईं, लेकिन जंजीरें आज भी उसके तने के आसपास दिखाई देती हैं। पेड़ के पास लगा बोर्ड भी लोगों का ध्यान खींचता है। उस पर लिखा है, “I am under arrest”। इसे देखकर लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि आखिर एक पेड़ ने ऐसा क्या अपराध किया था कि उसे सजा मिल गई? असल में पेड़ ने कोई अपराध नहीं किया था। उसकी “गिरफ्तारी” उस ब्रिटिश अधिकारी के आदेश का नतीजा थी।

















