नई दिल्ली। राजधानी के अरुण जेटली स्टेडियम में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले जा रहे तीन मैचों की टी-20 सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक अत्यंत गौरवशाली और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में पहली बार आधिकारिक रूप से राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ-साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का भी भव्य गायन किया गया.
टॉस के ठीक बाद मैदान पर सबसे पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की पूर्ण प्रस्तुति हुई और उसके बाद राष्ट्रगान गाया गया. क्रिकेट के किसी अंतरराष्ट्रीय मैदान पर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान की एक साथ प्रस्तुति का यह देश में अपनी तरह का पहला अनूठा अवसर रहा है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह अंतरों की आधिकारिक प्रस्तुति की गई, जिसकी कुल अवधि करीब तीन मिनट 10 सेकंड रही, जबकि राष्ट्रगान लगभग 52 सेकंड का था. दोनों राष्ट्र-गीतों की इस गरिमामयी प्रस्तुति में कुल चार मिनट दो सेकंड का समय लगा.
गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत हुई आधिकारिक प्रस्तुति
उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत के 150वें वर्ष के समारोहों के अंतर्गत गत 6 फरवरी को ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे. इन दिशा-निर्देशों के तहत राष्ट्रगीत की 3 मिनट 10 सेकंड की आधिकारिक प्रस्तुति निर्धारित की गई है. तय नियमों के अनुसार, वंदे मातरम् के गायन के दौरान स्टेडियम या कार्यक्रम में मौजूद सभी नागरिकों और खिलाड़ियों को ‘सावधान’ की मुद्रा में सीधे खड़े रहना अनिवार्य होता है.
“गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार राष्ट्रपति या राज्यपालों की मौजूदगी वाले औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों, रेडियो-टेलीविजन पर राष्ट्रपति के संबोधन से पहले और बाद में, राष्ट्रीय ध्वज के परेड में लाए जाने तथा इसी तरह के अन्य राष्ट्रीय महत्व के अवसरों पर वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों की प्रस्तुति को मंजूरी दी गई है।”
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्रगीत का गौरवशाली इतिहास
महर्षि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो अंतरों को वर्ष 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया गया था. इसके पश्चात, वर्ष 1950 में स्वतंत्र भारत की संविधान सभा ने इसे राष्ट्रगीत के रूप में आधिकारिक मान्यता प्रदान की.
किसी अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में पहली बार राष्ट्रगीत की इस तरह की पूर्ण प्रस्तुति के बाद अब खेल प्रेमियों और जानकारों के बीच यह एक बड़ा चर्चा का विषय बन गया है कि क्या आगामी समय में देश-विदेश में होने वाले अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में भी राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की परंपरा को अनिवार्य रूप से आगे बढ़ाया जाएगा.











