भारत जब किसी अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी करता है तो यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि दुनिया के सामने देश की क्षमता, कूटनीतिक प्रभाव और बदलती वैश्विक भूमिका को प्रदर्शित करने का अवसर भी होता है। ऐसे समय में स्वाभाविक अपेक्षा होती है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह रहें और संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता दी जाए। हालांकि, 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी को लेकर वामपंथियों ने एक बार फिर देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को सार्वजनिक मंच पर भ्रामक और तथ्यहीन सूचनाओं के जरिए धूमिल करने की कोशिश की है। आरफा खानम शेरवानी, सागरिका घोष और राणा अय्यूब जैसी कथित पत्रकारों की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर उनकी वामपंथी विचारधारा और देश के खिलाफ संकीर्ण सोच को उजागर कर दिया है।
आरफा खानम तिरंगे का अपमान कैसे कर सकती हैं?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (11 सितंबर) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया और लिखा, “18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रालय की इमारत को रोशन किया गया।” वीडियो में विदेश मंत्रालय की इमारत तिरंगा रंग में रंगी हुई दिखाई दे रही है। विदेशी मेहमानों के स्वागत में कमल के फूल का उपयोग किया है। भारत में कमल को केवल एक सुंदर फूल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है।
आरफा खानम शेरवानी ने आज रणधीर जायसवाल के पोस्ट को रीशेयर करते हुए इस इसे बहुत ही भद्दा और अत्यधिक घृणित (उल्टी करता हुआ इमोजी शेयर) बताया। उन्होंने लिखा, “सो सो अग्ली।” इसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने आरफा को आड़े हाथों लिया। एक यूजर ने लिखा कि एक भारतीय मुसलमान होने के नाते, मुझे आपको मुसलमान कहने में शर्म आती है। आप इस देश के लिए कलंक हैं। आप भारतीय तिरंगे का अपमान कैसे कर सकती हैं? क्या आप पागल हैं? अपनी जिहादी सोच छोड़िए।
अंकित सिन्हा नाम के यूजर ने लिखा, ”भारतीय तिरंगे के रंगों को भद्दा बताना और उस पर उल्टी करने वाला इमोजी बनाना, उस इमारत के बारे में कम और आपकी नफरत के बारे में ज्यादा बताता है। जब इमारत को जान-बूझकर तिरंगे के रंगों से रोशन किया गया हो, तो उस पर इस तरह का इमोजी बनाकर मजाक उड़ाना कोई क्रिएटिव आलोचना नहीं है। एक बार के लिए, सरकार के प्रति अपनी नापसंद को उन प्रतीकों से अलग करके देखने की कोशिश करें जो देश के हैं, न कि किसी राजनीतिक पार्टी के।
‘सागरिका घोष क्या आप खुद को VIP समझती हैं’
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद और कथित पत्रकार सागरिका घोष ने ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में की गई सुरक्षा व्यवस्था पर तंजा कसा है। एक समाचार पत्र के प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित ट्रैफिक एडवाइजरी को शेयर करते हुए सागरिका घोष ने एक्स पर पोस्ट किया, “पूरी दिल्ली में बहुत ज्यादा पाबंदियां हैं। कल मैं खुद पूरे दो घंटे ट्रैफिक में फंसी रही। उन लोगों का क्या जिन्हें इमरजेंसी है या जिनकी फ्लाइट या ट्रेन है? नई दिल्ली में दशकों से समिट होते रहे हैं, लेकिन नागरिकों को कभी भी इतनी परेशानी, असुविधा और धक्के नहीं खाने पड़े, जितने ‘ट्रिपल इंजन’ भाजपा सरकार और वीआईपी कल्चर के प्रति जुनूनी नरेंद्र मोदी के दौर में हो रहे हैं। इनके राज में नागरिकों को कुचला जा रहा है, उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बर्बाद की जा रही है और इनको इसका जरा भी एहसास नहीं है। मोदी एक लोकतंत्रिक देश के प्रधानमंत्री हैं, कोई राजा-महाराजा नहीं।”
राज्यसभा सांसद यही नहीं रुकीं उन्होंने इसके बाद एक और पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “सेंट्रल दिल्ली में स्कूल, बाजार और पार्क बंद कर दिए गए हैं। सोचिए, अब असली वीवीआईपी लुटियंस एलीट कौन है? जब नेता यूएन जाते हैं तो न्यूयॉर्क बंद नहीं होता, लेकिन दिल्ली हो जाती है। नरेंद्र मोदी जी की वीआईपी कल्चर एडिक्शन की कोई सीमा नहीं है।”
सागरिका घोष के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मेहता जी नाम के यूजर लिखते हैं कि आप जैसे लोग ट्रैफिक एडवाइजरी को नजरअंदाज करते हैं और जान-बूझकर ट्रैफिक में फंस जाते हैं। फिर यहां आकर, अपनी जबरदस्त राजनीतिक कुशलता का इस्तेमाल करके अपने समर्थकों को भड़काते हैं, जिन्हें जमीनी हालात का कोई अंदाजा ही नहीं होता। सरकार से आप और क्या उम्मीद करते हैं। यह ट्रैफिक एडवाइजरी इसलिए जारी की जाती है ताकि कम से कम ट्रैफिक हो सके, लेकिन आप जैसे लोग अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते।”
संजय गोयल ने लिखा कि आस-पास बहुत ज्यादा भीड़ और बेहिसाब ट्रैफिक होने से अच्छा आवाजाही पर कुछ पाबंदियां होना बेहतर है। इसके अलावा, 11 सितंबर को छुट्टी घोषित करके सरकार ने अच्छा काम किया। इसे लोग एक लंबे वीकेंड की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे सड़कों पर ट्रैफिक भी कम रहा।
ओम मेहरा नाम के एक अन्य यूजर ने सागरिका को प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आप लोग हमेशा थोड़ी-सी असुविधा पर भी शिकायत करने लग जाते हैं। भारत बहुत ज्यादा आबादी वाला देश है। इस तरह के कार्यक्रमों की सुरक्षा के लिए सरकार कुछ बड़े कदम उठा रही है और यह ठीक है। आपको लगता है कि आप VIP हैं, इसीलिए आपको ऐसा महसूस हो रहा है। भारत के बड़े शहरों में पीक आवर्स (भीड़-भाड़ वाले समय) में ऐसा होना सामान्य बात है।
‘आपको देश की कोई परवाह नहीं राणा अय्यूब’
आरफा और सागरिका की तरह कथित पत्रकार राणा अय्यूब ने दिल्ली में गरीबों को नजर से ओझल करने संबंधी आलोचना की। उन्होंने दिल्ली का वीडियो शेयर करते हुए एक्स पर कहा कि ब्रिक्स समिट के दौरान शहर के गरीबों को नजर से ओझल करने के जितने भी तरीके हो सकते थे, उनमें से यह सबसे कम क्रिएटिव तरीका है। राणा पर तंज कसते हुए एक यूजर ने लिखा, “गरीबी हटाओ का नारा देने वाली कांग्रेस पार्टी के दशकों के शासनकाल में तो भारत जैसे चमक रहा था। भाजपा आई और उसने सब कुछ बर्बाद कर दिया।” एक दूसरे यूजर ने लिखा कि आप कभी भी भाजपा सरकार के तहत भारत में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन का समर्थन नहीं करेंगे, क्योंकि आपको देश की कोई परवाह नहीं है, आपको बस अपनी बेवकूफी भरी नफरत की परवाह है।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा भारत
इस बार भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले भारत 2012 (नई दिल्ली), 2016 (गोवा) और 2021 (वर्चुअल) में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। इस वर्ष अध्यक्षता की थीम, लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) है। वर्तमान में इसके 11 सदस्य देश ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात हैं। ऐसे समूह की बैठक की मेजबानी करना किसी भी देश के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर है। इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई दिग्गज नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं। चीन के राष्ट्रपति की भारत यात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह यहां सात वर्षों के बाद आए हैं।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए शहर सजाना सामान्य बात
इन कथित पत्रकारों और सांसद को यह पता होना चाहिए कि दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए सजाना सामान्य बात है। दुनिया के लगभग हर बड़े देश में जब वैश्विक नेता किसी शिखर सम्मेलन के लिए पहुंचते हैं तो मेजबान शहर को व्यवस्थित, सुरक्षित और आकर्षक बनाया जाता है। इस बार नई दिल्ली में विभिन्न मार्गों, चौराहों और प्रमुख स्थानों को सजाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाना आसान है, लेकिन उसके पीछे की आवश्यकता को समझना उतना ही जरूरी है। जब एक ही शहर में रूस, चीन, ईरान, दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों के शीर्ष नेता मौजूद हों, तब सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम स्वाभाविक हैं।
देश में सड़कें बनें तो सवाल, शहर सजें तो सवाल, विदेशी नेता आएं तो सवाल, सुरक्षा बढ़े तो सवाल और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका मजबूत हो तो भी सवाल। सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन यह बात भी ध्यान रखें कि सवाल का आधार नकारात्मकता नहीं होना चाहिए।












