नई दिल्ली। मां भारती की अनवरत सेवा में संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले और अरुणाचल प्रदेश के सुदूरतम व दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा तथा सामाजिक उत्थान की अलख जगाने वाले विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष आदरणीय ए. बालकृष्णन जी की स्मृति में नई दिल्ली स्थित विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) में एक गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया.
श्रद्धांजलि सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया. सरसंघचालक जी ने ए. बालकृष्णन जी को एक ‘संपूर्ण कार्यकर्ता’ के रूप में स्मरण करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा और समर्पण का जीवंत उदाहरण था. स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों के बीच भी उनका चिंतन सदैव संगठन के कार्य और दायित्वों पर ही केंद्रित रहा. उनका सादगीपूर्ण जीवन, समर्पण और कर्तव्यबोध समाज के लिए सदैव अनुकरणीय रहेगा.

“साधारण दिखने वाले असाधारण व्यक्तित्व”- एस. गुरुमूर्ति जी
विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के चेयरमैन एस. गुरुमूर्ति जी ने बालकृष्णन जी को स्मरण करते हुए कहा कि वे एक ऐसे “साधारण दिखने वाले असाधारण व्यक्तित्व” थे, जिन्होंने बिना किसी प्रचार या नाम की चाह के समाज निर्माण में शांत भाव से योगदान दिया. वे स्वामी विवेकानंद और एकनाथ रानडे जी के सच्चे अनुयायी व निष्ठावान सिपाही थे, जिनका अनुशासन, सादगी और सेवा भाव ही उनकी महानता का आधार बना.
“स्वास्थ्य की तमाम प्रतिकूलताओं के बावजूद जिनका ध्यान कभी अपने दायित्व से नहीं भटका, ऐसे ए. बालकृष्णन जी सादगी और निस्वार्थ सेवा के शाश्वत प्रतीक हैं। उनका जीवन हर कार्यकर्ता के लिए कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा है।” – सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और माता अमृतानंदमयी ने भेजा शोक संदेश
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का शोक संदेश पढ़कर सुनाया गया. प्रधानमंत्री ने बालकृष्णन जी के पांच दशकों से अधिक के निस्वार्थ सेवा कार्य को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की. पीएम मोदी ने विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश के दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने में उनके असाधारण और अथक जमीनी योगदान, उनकी विनम्रता और राष्ट्र सेवा के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता को नमन किया.
आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी (अम्मा) ने अपने संदेश में गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद के पदचिह्नों पर चलते हुए बालकृष्णन जी ने त्याग और समर्पण का जो मार्ग दिखाया, वह आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा.

अरुणाचल के पूर्व छात्रों की भावुक कृतज्ञता और सहयोगियों के संस्मरण
श्रद्धांजलि सभा का सबसे भावुक क्षण वह था जब अरुणाचल प्रदेश स्थित विवेकानंद केंद्र विद्यालय (VKV) के पूर्व छात्रों ने अपने संस्मरण साझा किए. छात्रों ने अश्रुपूरित नेत्रों से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि बालकृष्णन जी ने पूर्वोत्तर के दुर्गम अंचलों में शिक्षा का जो आंदोलन खड़ा किया, उसने पीढ़ियों का जीवन बदल दिया. वे केवल एक शिक्षाविद या संस्था-निर्माता नहीं थे, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक थे जिन्होंने जीवन को गढ़ा.
संस्था निर्माण और अंतिम संदेश:
- VIF के निर्माण में योगदान: फाउंडेशन के निदेशक अरविंद गुप्ता जी ने बताया कि विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की स्थापना और वैचारिक आधारशिला रखने में बालकृष्णन जी व विवेकानंद केंद्र की केंद्रीय भूमिका रही.
- ईश्वर पर अडिग विश्वास: विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष कु. निवेदिता भिड़े जी ने कार्यकर्ताओं के प्रति उनकी आत्मीय चिंता और ईश्वर पर उनके गहरे विश्वास का उल्लेख किया. उन्होंने स्मरण कराया कि बालकृष्णन जी का कार्यकर्ताओं को अंतिम संदेश था—“यह कभी मत भूलना कि ईश्वर सदैव तुम्हारे साथ है, हर कठिनाई में इस विश्वास को दृढ़ता से थामे रखना।”
- अमर विरासत: उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं, संस्कारित कार्यकर्ताओं और लाखों विद्यार्थियों के माध्यम से उनका राष्ट्र निर्माण का संकल्प सदैव जीवित रहेगा.

कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित गणमान्य नागरिकों, स्वयंसेवकों और प्रबुद्धजनों ने दिवंगत पुण्यात्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की.
॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥











