‘हमारी यात्रा राम मंदिर से राष्ट्रमंदिर की है’
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ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘हमारी यात्रा राम मंदिर से राष्ट्रमंदिर की है’

पाञ्चजन्य के ‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ में  विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र  कुमार जैन से वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा ने  बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्यांश

Written byअनुराग पुनेठाअनुराग पुनेठा
Sep 11, 2026, 10:29 pm IST
inओडिशा, साक्षात्कार, पाञ्चजन्य इवेंट
‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ में  विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र  कुमार जैन से वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा

‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ में  विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र  कुमार जैन से वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा

पाञ्चजन्य के ‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ में  विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र  कुमार जैन से वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा ने  बातचीत की। प्रस्तुत हैं मुख्यांश

विश्व हिंदू परिषद की यात्रा कैसी रही है?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की यात्रा किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की यात्रा है। यह यात्रा-आत्मग्लानि से आत्मबोध, आत्मविस्मृति से आत्मगौरव की ओर है। जब संघ की स्थापना हुई तो कोई भी भारत के गर्व की बात नहीं करता था। उस दौरान लोग कहते थे कि भारत की नियति टुकड़ों-टुकड़ों में बंटना है। उस समय भारतीय कहलाना गर्व का नहीं बल्कि शर्म का विषय माना जाता था। बीते 100 वर्ष की यात्रा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर लोगों को भारतीयता की जड़ों से जोड़ने का काम किया। आत्मविस्मृति के मायाजाल को संघ ने तोड़ दिया। संघ ने इस देश को उसकी जड़ों के साथ जोड़ा है।

क्या आपको लगता है कि संगठन की यात्रा प्रतिकूलता की अधिक रही?
प्रतिकूलता कैसी भी रही हो, वो हमारे लिए वरदान रही है। वो प्रतिबंध हों या वैचारिक संघर्ष रहा हो संघ के स्वयंसेवक ने कभी किसी प्रतिकूलता के सामने अपना मस्तक नहीं झुकाया, अपितु उससे प्रेरणा लेकर और अधिक मजबूत होकर निकला। संघ की छवि कभी भी आम जनमानस में नहीं बिगड़ी। बेशक कुछ राजनेता और मीडिया इसे खराब करने की कोशिश करते हैं।  उदाहरण के रूप में  जब एक आह्वान पर देश के 60 करोड़ लोग राम मंदिर के निर्माण के लिए अपना योगदान देते हैं तो इससे सिद्ध होता है कि संघ की विश्वसनीयता लोगों के बीच कभी कम नहीं हुई।

विश्व हिंदू परिषद की आगामी योजना क्या है?
भारत की यात्रा मंदिर निर्माण से राष्ट्र मंदिर निर्माण की ओर बढ़ चली है। प्राण प्रतिष्ठा के समय ही सरसंघचालक जी ने एक आह्वान किया था कि आज रामलाल राम मंदिर के अंदर प्रस्थापित हो गए हैं। अब हमें रामलला को प्रत्येक हृदय के अंदर स्थापित करना है। राम मंदिर से राष्ट्रमंदिर का यात्रा शुरू हो चुकी है, जिसमें संस्कार देना और अपनी जड़ों की ओर लौटना शामिल है।

ओडिशा में जनजातीय समाज है और उसकी अपनी चिंताएं हैं, संघ और उसके अनुषांगिक संगठन इस पर काम कर रहे हैं। जनजातीय समाज को हिंदू समाज से जोड़ने  की दिशा में प्रयास को किस तरह देखते हैं?
‘अगर जनजातीय हिंदू नहीं हैं, तो हिंदू कौन हैं’, राजा राम को या राजकुमार राम को अथवा मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भगवान राम बनाने का काम जनजातीय लोगों ने ही किया था। जब कोई देश के जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने की बात करता है तो वह बात ही गलत है। हमारी मुख्यधारा को देश की जनजातियों ने ही सींचा है। प्रकृति पूजन, वृक्ष पूजन की परंपरा वनवासियों की परंपरा है। उन्हें हमसे जोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि हमें उनसे जुड़ने की जरूरत है।

क्या हिंदूत्व और जनजातीय एक-दूसरे के पूरक हैं?
जनजातियों की सारी परंपराएं हिंदुत्व से जुड़ी हैं। केवल हिंदू ही प्रकृति की पूजा करता है। वनवासियों का चिंतन भी यही है। इसलिए वनवासी चिंतन हिंदू चिंतन से अलग नहीं है।

युवाओं से संवाद क्यों आवश्यक है ?
कुछ लोग अतिवादी भाषण देकर उनसे तालियां बजवा सकते हैं।  लेकिन समाज का निर्माण नहीं कर सकते। क्या जेन-जी से जुड़ने का अर्थ  गाली देना है? क्या जेन-जी के साथ बातचीत अश्लील भाषा का प्रयोग करना है? नहीं, जेन-जी जिन्हें कहा जा रहा है, वे हमारे अपने बच्चे हैं।  वे देश की जड़ों से जुड़े हैं। हमको अपनी भाषा नहीं बदलनी है, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के साथ सही से संवाद स्थापित करना है। उनको अपनी बातें समझानी है। उन्हें स्वयं से दूर नहीं करना, उनके सुझावों को सुनना और उन्हें साथ लेकर चलना है।

Topics: पाञ्चजन्य विशेषGen Zरामललाजनजातीय परंपराएंहिंदू संस्कृतिराष्ट्रीय अस्मिताराष्ट्र निर्माणयुवा पीढ़ीराम मंदिर निर्माणप्राण प्रतिष्ठासमाज निर्माणमर्यादा पुरुषोत्तम रामRSS
अनुराग पुनेठा
अनुराग पुनेठा
अनुराग पुनेठा वरिष्ठ पत्रकार हैं, टीवी पत्रकारिता में लंबा समय काम किया है, कई टीवी चैनल्स में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं। रक्षा और विदेश मामलों पर पकड़ है और तमाम अखबारों में लिखते रहे हैं। लोकसभा टीवी, संसद टीवी ज़ी न्यूज़ में कार्यरत रहे। टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित दैनिकों के लिए के लिए लेखन किया है। [Read more]
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