खोज एवं बचाव से लेकर चिकित्सा सहायता तक की होगी जांच
मेगा मॉक एक्सरसाइज के दौरान खोज एवं बचाव, सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता और राहत व्यवस्था की तैयारियों को परखा जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और आपदा के समय उनकी प्रतिक्रिया क्षमता की भी जांच होगी।
मेगा अभ्यास से पहले लखनऊ में दो दिवसीय कार्यक्रम
राज्यव्यापी मेगा अभ्यास से पहले उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से लखनऊ में दो दिवसीय संगोष्ठी एवं अभ्यास आयोजित किया गया। इसमें आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों, विशेषज्ञ संस्थाओं और आपदा प्रतिक्रिया बलों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के पहले दिन भूकंप, औद्योगिक यानी रासायनिक और अग्नि आपदाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव, तकनीकी जानकारी और बेहतर कार्यप्रणालियां साझा कीं। इस दौरान अग्नि और औद्योगिक आपदाओं से जुड़े मामलों के अध्ययन भी प्रस्तुत किए गए।
वास्तविक समय में परखी जाएगी आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने कहा कि ऐसे अभ्यासों का उद्देश्य राज्य, मंडल और जिला स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की वास्तविक समय में कार्यक्षमता को परखना है।
उन्होंने कहा कि अभ्यास के माध्यम से कमियों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध तरीके से दूर किया जा सकता है। उन्होंने एकीकृत, त्वरित और प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया।
आपदा से पहले जोखिम कम करने पर जोर
राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव अर्पणा यू. ने कहा कि आपदा प्रबंधन का लक्ष्य केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना नहीं है, बल्कि आपदा से पहले जोखिम कम करना और समय रहते तैयारी सुनिश्चित करना भी है।
वहीं उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की अपर पुलिस महानिदेशक पद्मजा चौहान ने प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन, स्वास्थ्य, परिवहन, सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया बलों की क्षमताओं को एकीकृत करने पर जोर दिया।
आपदा के समय हर सेकंड महत्वपूर्ण: डॉ. आलोक सिंह
पीएसी के पुलिस महानिदेशक डॉ. आलोक सिंह ने कहा कि आपदा के समय प्रत्येक सेकंड महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए विभागों और एजेंसियों की भूमिका, कमान एवं नियंत्रण व्यवस्था तथा संसाधनों की उपलब्धता पहले से स्पष्ट और समन्वित होना जरूरी है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की सदस्य रीना सिंह ने उत्तर प्रदेश को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में बताया।
टेबल टॉप एक्सरसाइज में अलग-अलग आपदा परिदृश्यों की तैयारी परखी जाएगी
दो दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन टेबल टॉप एक्सरसाइज यानी मेज पर आधारित अभ्यास के माध्यम से भूकंप, रासायनिक और अग्नि आपदा से जुड़े अलग-अलग परिदृश्यों में जिलों, विभागों और आपदा प्रतिक्रिया बलों की तैयारियों को परखा जाएगा।
इस दौरान निर्णय लेने की क्षमता, कमान एवं नियंत्रण और आपसी समन्वय की भी जांच होगी। भूकंप के तुरंत बाद की कार्रवाई, स्कूलों, अस्पतालों और प्रशासनिक कार्यालयों की स्थिति जैसे संभावित परिदृश्यों पर चर्चा की जाएगी।
इसके अलावा रासायनिक गैस के रिसाव और तरल रसायन के फैलाव तथा अस्पतालों, स्कूलों और बहुमंजिला भवनों में आग जैसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों पर भी अभ्यास किया जाएगा।
जिला आपातकालीन संचालन केंद्र और घटना प्रतिक्रिया दल होंगे सक्रिय
18 सितंबर के राज्यव्यापी अभ्यास में जिला आपातकालीन संचालन केंद्र और घटना प्रतिक्रिया दल सक्रिय किए जाएंगे। प्रत्येक जिले में क्षेत्रीय अस्पताल बनाकर बड़ी संख्या में घायलों के त्वरित उपचार, सुरक्षित निकासी और जरूरत पड़ने पर दूसरे अस्पताल भेजने की व्यवस्था भी परखी जाएगी।
इसके साथ ही चिकित्सा सेवाओं की तैयारी और आपदा के दौरान स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया क्षमता की भी जांच की जाएगी।
मलबे में खोज एवं बचाव और रासायनिक रिसाव का होगा व्यावहारिक अभ्यास
अभ्यास के दौरान क्षतिग्रस्त इमारतों से लोगों को सुरक्षित निकालने, मलबे में खोज एवं बचाव, आग, गैस और रासायनिक रिसाव जैसी संभावित स्थितियों का व्यावहारिक अभ्यास किया जाएगा।
भारतीय रेल की ओर से भूकंप के कारण ट्रेन के पटरी से उतरने की स्थिति को लेकर भी विशेष अभ्यास किया जाएगा।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी राज्य स्तर पर निगरानी
पूरे मेगा मॉक एक्सरसाइज की राज्य स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही राज्य स्तर से कमान एवं नियंत्रण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि विभिन्न जिलों और विभागों की आपदा प्रतिक्रिया को एकीकृत तरीके से परखा जा सके।















