अमेरिका और इजरायल ने इसी साल (2026) 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। बहाना था ईरान में प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम। तभी से इस बात के दावा किए जा रहे थे कि ईरान अब और अधिक तेजी से असहमति वाली आवाजों को कुचलेगा। हो भी ऐसा ही रहा है। ताजा मामले में मुल्ला सरकार इस्फहान शहर की दस्तगर्द जेल में 18 और कैदियों को फांसी देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए उसने इन कैदियों पर मौत की सजा का मुकदमा शुरू किया है।
ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला जेल में हुई अशांति और आगजनी से जुड़ा है। ज्यूडिशियल दस्तावेज के अनुसार केस रिवोल्यूशनरी कोर्ट को भेज दिया गया है। दरअसल, मार्च में जेल के पास एक एयर स्ट्राइक हुई। जेल के पीछे सैन्य बेस और गोला-बारूद का डिपो निशाने पर आया। जेल के कुछ हिस्सों और रहने की जगहों को भी नुकसान पहुंचा। कुछ कैदी घटना के दौरान मारे गए, कुछ आग में। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, मिसाइलें लगने के बाद गार्ड अपनी पोस्ट छोड़कर चले गए। कैदी डर से वार्ड से बाहर निकल आए कि कहीं इमारत न गिर जाए। कुछ कैदियों ने कंबल, चादरें और दूसरी चीजें जलाकर दरवाजे खुलवाने की कोशिश की ताकि सुरक्षित जगह पर जा सकें। धुआं फैल गया।
बाद में सुरक्षा बल जेल में घुसे। उन्होंने लाइव फायर, पैलेट राउंड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। गवाहों के अनुसार कुछ कैदी गोली से मारे गए, कुछ जलने या धुएं से।
दस्तावेज में क्या लिखा है
दस्तावेज में 75 कैदियों को आरोपी बनाया गया है। प्रॉसीक्यूटर्स ने कम से कम 26 को ट्रायल के लिए बुलाया है। कुछ पर अशांति का नेतृत्व करने या “युद्ध और हत्या भड़काने” का आरोप है।
क्या हैं आरोप?
- राष्ट्रीय सुरक्षा बिगाड़ने के इरादे से लोगों को एक-दूसरे से लड़ाने और मारने के लिए उकसाना
- जानबूझकर आगजनी
- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना
- युद्ध के समय गैरकानूनी इकट्ठा होकर दंगा करना
- कैमरे, खिड़कियां, सुरक्षा दरवाजे तोड़ना
- जेल के अस्पताल में आग लगाना
ईरान इंटरनेशनल ने 17 कैदियों की पहचान की है जिन पर ये आरोप हैं। दस्तावेज बताते हैं कि 18 कैदियों पर मौत की सजा हो सकती है।
अलग केस में फांसीइसी जेल में “अलीखानी स्क्वायर” केस में पिछले दो महीनों में पांच प्रदर्शनकारियों को फांसी दी जा चुकी है। उसी केस में पांच और लोगों पर फांसी का खतरा बना हुआ है।
जेल की हालत
राजनीतिक कैदी अब्दुल्रसूत मोर्तजवी ने जून में ऑडियो मैसेज में बताया कि जनवरी के प्रदर्शनों में गिरफ्तार कुछ लोगों पर यातना दी गई, पिटाई हुई, परिवार से मिलने पर पाबंदी और बाहर घूमने की मनाही थी। हाल के हफ्तों में जेल में स्वास्थ्य की स्थिति बिगड़ी है। मेंनिंजाइटिस का प्रकोप फैला। कुछ कैदी संक्रामक बीमारियों से मर गए। कुछ को इस्फहान के अल-जहरा अस्पताल ले जाया गया।

















