भारत के सरकारी और संवैधानिक संस्थानों के ध्येय वाक्य अब छात्रों के लिए सिर्फ किताबों या इमारतों पर लिखे शब्द नहीं रहेंगे। इनके पीछे छिपे अर्थ और विचारों को भी वे समझ सकेंगे। NCERT की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में देश के कई महत्वपूर्ण संस्थानों के ध्येय वाक्यों और उनके स्रोत के बारे में जानकारी दी गई है। इससे छात्रों को भारत की प्राचीन परंपराओं और आज की लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच संबंध को समझने में मदद मिलेगी।
NCERT की नई पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी : इंडिया एंड बियांड-पार्ट टू’ के ‘शासन और सार्वजनिक नीति’ अध्याय में इन ध्येय वाक्यों का उल्लेख किया गया है। किताब में बताया गया है कि भारत ने आजादी के बाद अपनी शासन व्यवस्था में पुराने भारतीय विचारों और मूल्यों को भी जगह दी।
‘सत्यमेव जयते’ का अर्थ समझेंगे छात्र
किताब के अनुसार, भारत का राष्ट्रीय ध्येय वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ मुंडकोपनिषद से लिया गया है। इसका सीधा अर्थ है- सत्य की ही विजय होती है। आज यह वाक्य भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के नीचे लिखा जाता है और देश की पहचान का अहम हिस्सा है। किताब में ब्रिटिश काल के ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ इंडिया’ के ध्येय वाक्य ‘Heaven’s Light, Our Guide’ का भी उदाहरण दिया गया है। इसका अर्थ है- ‘स्वर्ग का प्रकाश हमारा मार्गदर्शक है।’ आजादी के बाद भारत ने अपनी प्राचीन परंपरा से जुड़े ‘सत्यमेव जयते’ को राष्ट्रीय ध्येय वाक्य के रूप में अपनाया। पाठ्यपुस्तक में सुप्रीम कोर्ट के ध्येय वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ को भी शामिल किया गया है। यह पंक्ति महाभारत से ली गई है। इसका अर्थ है- जहां धर्म यानी सदाचार और कर्तव्य है, वहीं विजय है।

















