शिमला। शिमला के घंडल स्थित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से जुड़े अहम मामलों पर बैठक बुलाने में राज्य सरकार की देरी अब हिमाचल हाईकोर्ट तक पहुंच गई है। विश्वविद्यालय की गवर्निंग काउंसिल के निर्देश और कुलपति के बार-बार अनुरोध के बाद भी करीब दो महीने तक बैठक नहीं बुलाने पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने सरकार पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और यह राशि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को देने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने कहा कि सरकार का यह रवैया न्यायपालिका की स्थिति से समझौता करने और उसके प्रति गंभीर अनादर के समान है। अदालत ने यह आदेश स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया।
यह है मामला
मामले की सुनवाई में सामने आया कि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की गवर्निंग काऊंसिल की पांचवीं बैठक 15 जून 2026 को हुई थी। इस बैठक की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश ने की थी। बैठक में विश्वविद्यालय से जुड़े छात्र सुरक्षा और परिसर के बुनियादी ढांचे के कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी। गवर्निंग काउंसिल ने इन मामलों को राज्य सरकार के स्तर पर जल्द हल करने की जरूरत बताई थी। इसके साथ ही नीतिगत मामलों पर चर्चा और समाधान के लिए चांसलर, मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रियों, महाधिवक्ता और कुलपति की बैठक बुलाने का निर्देश दिया गया था।
अदालत के सामने यह बात आई कि 15 जून की बैठक के बाद भी सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं उठाया। विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से भी बैठक बुलाने के लिए बार-बार अनुरोध किया गया, लेकिन इसके बावजूद करीब दो महीने तक बैठक आयोजित नहीं की गई।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने सरकार के इस रवैये को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने इस देरी को महज प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा मानने के बजाय गंभीर मामला माना और सरकार पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
विश्वविद्यालय के सामने लंबे समय से कुछ नीतिगत और वित्तीय मुद्दे भी हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रमुख मांगों में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को राज्य के आधिकारिक विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल करना शामिल है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए राज्य के बजट में वित्तीय सहायता का प्रावधान करने की मांग भी राज्य सरकार के सामने रखी गई है।
अदालत के आदेश के अनुसार पांच लाख रुपये की जुर्माने की राशि सीधे राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को दी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

















