हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की है। इसी के साथ राज्य में कांग्रेस पार्टी की उलटी गिनती भी शुरू हो गई है। भाजपा की जीत हिमाचल में पार्टी के प्रति जनता का बढ़ता भरोसा और कांग्रेस के कुशासन के खिलाफ जनता का जनादेश का संदेश है।
भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव में 177 वार्डो में जीत हासिल की है, वहीं राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी केवल 158 वार्डों में ही जीत हासिल कर सकी है। भाजपा ने मनाली, ऊना, बिलासपुर जैसे कई इलाकों में उम्मीद से भी अच्छा प्रदर्शन किया। भाजपा ने 25 नगर परिषदों में 18 और 22 नगर पंचायत में 12 में एकतरफा जीत हासिल की है।
जनादेश के क्या हैं मायने
विदित हो कि कांग्रेस विगत विधानसभा चुनाव में भाजपा से महज 38000 से भी कम मतों से पूरे राज्य में आगे थी। हिमाचल प्रदेश में भी राजस्थान की तरह ही कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता का अदल बदल 1992 से देखा जा रहा है। इस बार भाजपा बड़े बहुमत से कांग्रेस को हराकर सत्ता प्राप्त करने की और बढ़ रही है। स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस पार्टी नीत सुक्खू सरकार को हटाने के लिए जनता चुनाव का इंतज़ार कर रही है।
जनता ने कांग्रेस के कुशासन को नकारा
हिमाचल प्रदेश की जागरूक जनता ने कांग्रेस के कुशासन, झूठी गारंटी और तानाशाही फैसलों को पूरी तरह से नकार दिया है. युवाओं ने रोजगार के नाम पर धोखा के खिलाफ अपना जनमत दिया हैं. राज्य की महिलाओं ने ₹1500 के झूठे भरोसा के खिलाफ अपना जनादेश दिया हैं.राज्य की जनता बिजली-पानी की बढ़ती कीमतों से जनता परेशान है. राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और स्कूल और अस्पताल बंद हो रहे हैं. इस कारण राज्य की जनता ने अपना स्पष्ट जनमत कांग्रेस पार्टी के खिलाफ दिया हैं.

















