यह श्लोक ‘संकट के समय नैतिक सिद्धांतों की रक्षा’ और ‘सांस्कृतिक स्वाभिमान’ का अद्भुत संदेश देता है।
श्लोक-
वेषो भाषा सदाचारः रक्षणीयं इदं त्रयम्।
अन्धानुकरणमन्येषामकीर्तिकरमुच्यते॥
भावार्थ-
हे मित्र! समस्त देश की समृद्धि अर्थात् अभ्युदय करने वाला एक ही त्रिक है- वेष, भाषा और सदाचार। किसी भी देश के स्वरुप को बनाने और बढाने वाले ये ही तीन महत्त्वपूर्ण हैं। अन्य राष्ट्रों के वेश, भाषा तथा सदाचार का अन्धानुकरण करने से अपयश ही प्राप्त होता है।
आज के लिए प्रांसगिक-
आज का श्लोक यह सीख देता है कि व्यक्ति सदाचार के रास्ते पर चलते हुए वाणी और भाषा के संस्कारों के साथ देश और खुद का भी विकास करता है।

















