नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले 6 अक्टूबर के उपचुनाव से ठीक पहले भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक नाम और पार्टी के आरक्षित चुनाव चिन्ह ‘फूल और घास’ के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू की तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि जब तक पार्टी के असली मालिकाना हक पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक दोनों में से कोई भी गुट तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और सिंबल का प्रयोग नहीं कर सकेगा।
दोनों गुटों को शुक्रवार सुबह तक देने होंगे विकल्प
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट, दोनों को शुक्रवार (18 सितंबर 2026) सुबह 11 बजे तक तीन-तीन अस्थायी नाम और फ्री सिंबल की अपनी प्राथमिकता सूची सौंपने का निर्देश दिया है। दोनों गुट अपने नए अस्थायी नामों में मूल पार्टी ‘तृणमूल’ का नाम या विजुअल संदर्भ जोड़ सकते हैं।
क्यों लेना पड़ा चुनाव आयोग को यह फैसला?
समान अवसर देना : आयोग ने कहा कि यह अंतरिम व्यवस्था दोनों प्रतिद्वंद्वी समूहों को समान अवसर प्रदान करने और उनके अधिकारों व हितों की रक्षा के लिए की गई है।
विरोधाभासी फॉर्म-B जमा होना: उपचुनाव के लिए दोनों गुटों के प्रत्याशियों ने तृणमूल कांग्रेस के फॉर्म-B पर ही नामांकन पत्र दाखिल कर दिए थे, जिससे भ्रम की स्थिति बन गई थी।
समय की कमी: चुनाव आयोग ने बताया कि पैराग्राफ 15 (Election Symbols Order, 1968) के तहत अंतिम फैसला सुनाने में समय लगेगा, जबकि उपचुनाव की प्रक्रिया जारी है।
कैसे शुरू हुआ पार्टी के भीतर विवाद?
पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में बगावत की शुरुआत हुई थी। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने तर्क दिया था कि ममता बनर्जी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (NWC) का कार्यकाल 11 फरवरी 2025 को ही समाप्त हो चुका है। इसके बाद पार्टी द्वारा लिए गए सभी फैसले और नियुक्तियां असंवैधानिक हैं। बागी गुट ने 58 विधायकों के समर्थन का दावा करते हुए खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताया था। दूसरी ओर, ममता बनर्जी गुट ने इस दावे को खारिज करते हुए पार्टी संविधान में हुए संशोधनों का हवाला दिया था।
















