पंजाब के फरीदकोट में बाबा फरीद स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित फार्मेसी अधिकारी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक व नकल के आरोपों को लेकर सोमवार को राजनीतिक और छात्र संगठनों का विरोध तेज हो गया। यूथ अकाली दल और स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान व शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह से त्यागपत्र की मांग की है।
पंजाब में भडक़ा पेपर लीक का मुद्दा
देशभर में नीट और यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ी का जिन्न अभी शांत हुआ था कि अब पंजाब की दो बड़ी सरकारी भर्तियों को लेकर सियासत का पारा चढ़ गया है। केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के बाद शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है. इसके ठीक बाद अब पंजाब में विपक्षी दल कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल भगवंत मान सरकार को पेपरलीक के मुद्दे पर कटघरे में खड़ा कर दिया है।
क्या है आरोप?
विपक्ष का आरोप है कि पंजाब में एक के बाद एक परीक्षाओं के पेपर लीक और हाई-टेक धांधली हो रही है, जबकि राज्य सरकार का दावा है कि राज्य में कोई पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि समय रहते नकल माफिया का पर्दाफाश किया गया है। दरअसल फार्मेसी डिपार्टमेंट और कृषि विभाग से जुड़े दो केस एसे हैं, जिन पर पूरा बवाल मचा हुआ है. इन मामलों में लगातार पंजाब सरकार की किरकिरी हो रही है।
क्या हुआ बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत 454 फार्मेसी अफसरों की भर्ती के लिए हाल ही में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें करीब 7,000 उम्मीदवार शामिल हुए थे। ये परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर स्पेशल काउंटर इंटेलिजेंस और पुलिस की फ्लाइंग स्क्वाड टीमों ने फरीदकोट, फिरोजपुर और कोट कपूरा के सेंटरों पर छापेमारी की। इसमें 28 उम्मीदवारों सहित कुल 35 लोगों को हिरासत/गिरफ्तार किया गया। अभ्यर्थी पगड़ी, जुराबों और अंडरगारमेंट्स में बटन और छोटे वायरलेस ब्लूटूथ डिवाइस छुपाकर लाए थे। फिरोजपुर के एक सेंटर से पेन कैमरे से प्रश्नपत्र स्कैन कर व्हाट्सएप पर बाहर भेज कर लीक किया गया, जहां हरियाणा और राजस्थान से ऑपरेट हो रहे कंट्रोल रूम से अभ्यर्थियों को उत्तर बोले जा रहे थे।
पास कराने की थी कीमत
खबरों के मुताबिक ये गैंग प्रति कैंडिडेट 3.5 लाख से 13 लाख रुपये वसूल रहा था। विपक्ष ने इसे सीधा पेपर लीक और सिस्टम की नाकामी करार देते हुए राज्य के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। वहीं पंजाब पुलिस व प्रशासन का कहना है कि यह प्री-एग्जाम पेपर लीक नहीं था, बल्कि परीक्षा शुरू होने के बाद रियल-टाइम में की गई हाई-टेक नकल थी, जिसे वक्त रहते पकडक़र नेस्तनाबूद कर दिया गया।
कृषि विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में भी हुआ था विवाद
खेतीबाड़ी एवं किसान कल्याण विभाग में कृषि विकास अधिकारी की भर्ती परीक्षा को लेकर विवाद काफी समय से सुर्खियों में है. विपक्ष (विशेष रूप से शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस) का दावा है कि इस परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले ही लीक कर दिया गया था। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि पंजाब लोक सेवा आयोग द्वारा कराई गई इस परीक्षा में प्रश्नपत्र के सेट लीक हुए थे और बाद में मामले को दबाने के लिए असामान्य तरीके से ग्रेस माक्र्स का सहारा लिया गया। इस परीक्षा में पारदर्शी जांच और पुन: परीक्षा की मांग को लेकर कृषि स्नातकों और युवा अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किए थे।
इन परीक्षाओं में भी हुआ था बवाल
नायब तहसीलदार भर्ती (2022) परीक्षा भी आप सरकार के दौरान ही आयोजित हुई थी, जिसमें ब्लूटूथ चीटिंग के बाद बवाल हुआ और परीक्षा को रद्द करना पड़ा था। इसके अलावा पीएसटीईटी बोर्ड परीक्षा ब्लंडर (2023) हुआ था जिसमें प्रश्नपत्र में ही उत्तर बोल्ड होकर छप गए थे, जिसे शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने खुद रद्द किया और दो अधिकारियों को सस्पेंड किया फिर 2023 में 12वीं बोर्ड का पेपर लीक हुआ जिसमें अंग्रेजी का पर्चा परीक्षा से 1 घंटे पहले लीक हुआ और रद्द करना पड़ा।
सरकार के विरोधाभासी ब्यान
पूरे मामले को लेकर सरकार में विरोधाभासी ब्यान आ रहे हैं। कल मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपनी सरकार की पीठ थपथपाते हुए दावा किया था कि उनके कार्यकाल में एक भी पेपर लीक का मामला सामने नहीं आया। दूसरी ओर शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि उनके त्यागपत्र से मामला सुलझ जाता है तो वे इसके लिए तैयार हैं। पंजाब सरकार पूरे मामले में उलझती हुई नजर आ रही है।

















