थानों और थानेदारों पर हुए हमलों की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को चिंता मैं डाल दिया है। कल एक ऑडियो वायरल हुई है कि पुलिस वाले घरों से वर्दी डाल कर न आएं, चाहे अधिकारियों ने इसे फेक बताया है पर मूल समस्या से इनकार नहीं किया जा सकता। पंजाब में रोज़ाना कहीं न कहीं चलने वाली गोलियों या खून-खराबे की घटनाएँ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रही हैं। ताजा घटना भी बेहद हैरान और परेशान करने वाली है। अमृतसर में गुरुवार देर रात ड्यूटी के दौरान पंजाब पुलिस के सहायक उप-निरीक्षक हरजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना तब हुई, जब वह रात करीब ढाई बजे दाना मंडी के पास मोटरसाइकिल पर गश्त कर रहे थे। इसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियां बरसा दीं। फिलहाल पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।
पुलिसकर्मियों पर बढ़ते हमले चिंता का विषय
इस घटना ने इससे पहले पुलिस थानों और पुलिसकर्मियों पर हुई सभी घटनाओं को एक बार फिर तरोताज़ा कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि जिन पुलिसकर्मियों पर राज्य की कानून-व्यवस्था दुरुस्त रखने की दिन-रात जिम्मेदारी है, वही सड़कों पर गश्त करते समय या थानों में तैनाती के दौरान सुरक्षित नहीं हैं। इससे पहले इसी साल मजीठा में ड्यूटी पर जाते समय एएसआई जोगा सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। साल 2026 में और भी योजनाबद्ध हमले सामने आए हैं। एएसआई गुरनाम सिंह और होमगार्ड जवान अशोक कुमार की दोरांगला थाने के अधीन आती आदियाँ चौकी में गोलियाँ मारकर हत्या कर दी गई थी। यह चौकी भारत-पाकिस्तान सीमा से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर थी। इन घटनाओं की सूची ठीक उसी तरह लंबी होती जा रही है, जैसे पिछले साल राज्य के विभिन्न थानों पर हुए हमलों की घटनाएँ घटी थीं।
पुलिस थानों पर बढ़ते हमलों से सुरक्षा पर सवाल
23 नवंबर 2024 को अजनाला थाने के पास करीब 1.5 किलो का आईईडी मिला था। पिछले साल 2 दिसंबर को नवांशहर की आंसरो पुलिस चौकी पर ग्रेनेड फेंका गया था, लेकिन धमाका नहीं हुआ। इसके दो दिन बाद मजीठा थाने पर ग्रेनेड से धमाका किया गया। 13 दिसंबर को घणीया के बांगर थाना, गुरदासपुर पर भी इसी तरीके से थाने के गेट के पास ग्रेनेड फेंका गया। 18 दिसंबर को बख्शीवाला पुलिस चौकी, गुरदासपुर और 20 दिसंबर को वडाला बांगर पुलिस चौकी पर भी ग्रेनेड से हमला किया गया। इसी साल मार्च महीने में अमृतसर के भिंडी सैदां थाने के बाहर धमाका हुआ और 13 सितंबर 2026 को जलालाबाद थाने में रात के समय धमाका किया गया। पुलिस थानों और पुलिसकर्मियों पर होने वाले इन हमलों से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि हमलावरों के हौसले कितने बुलंद हैं। सवाल खड़ा होता है कि आखिर राज्य की कानून-व्यवस्था बहाल करने वाली सुरक्षा एजेंसियां चूक कहाँ रही हैं?
बार-बार पुलिसकर्मियों पर होने वाले हमले आम लोगों के मन में भी यह सवाल पैदा कर रहे हैं कि अगर राज्य का पुलिस प्रशासन ही सुरक्षित नहीं है, तो उनकी सुरक्षा कौन करेगा? पुलिस के प्रबंधों पर होने वाले इन हमलों की असल ‘तासीर’ और ‘तस्वीर’ कैसी है, इसकी गंभीरता से जाँच होनी चाहिए। राज्य का सुरक्षा तंत्र उसके व्यापार-कारोबार, निवेश और पर्यटन को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। पिछले कुछ समय से ऐसा संदेश भी जा रहा है कि पंजाब की कानून-व्यवस्था स्थिर नहीं है। हालाँकि, इन घटनाओं को लेकर विपक्षी या सत्ता पक्ष द्वारा किसी भी तरह की राजनीति से बचना चाहिए। इन घटनाओं पर काबू पाकर ही राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की साख को कायम रखा जा सकता है। आतंकियों और गैंगस्टरों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को अब प्रो एक्टिव नीति अपनानी होगी।

















