
सीजेपी के प्रदर्शन में पत्रकारों पर किया गया हमला। महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार।
किसी भी बड़े आंदोलन, विरोध प्रदर्शन या राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान ग्राउंड पर मौजूद पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर जनता तक निष्पक्ष और सटीक जानकारी पहुंचाते हैं। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर और लुटियंस जोन में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च को कवर करने के लिए पत्रकार पहुंचे थे, लेकिन प्रदर्शन के दौरान बेकाबू भीड़ ने मीडिया के साथ दुर्व्यवहार किया, धक्का-मुक्की की, गाली-गलौज तक की गई। यही नहीं उन पर हमला भी किया गया। सीजेपी के इस प्रदर्शन से जो तस्वीरें और तथ्य सामने आए हैं उन्होंने मीडिया जगत और समाज को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर भी इसकी तीखी भर्त्सना की जा रही है।
सीजेपी के प्रोटेस्ट में टाइम्स नाउ के रिपोर्टर देव कोटक को निशाना बनाया गया। वह सीजेपी के सौरव दास का इंटरव्यू लेने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें कहा गया कि भीड़ उनका माइक देख भड़क रही है और कुछ देर बाद आएं। मगर जब वह बाहर जाने लगे तो कुछ 100-120 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। किसी ने लात मारी, किसने मुक्के मारे तो कोई थप्पड़। पानी की बोतल फेंकी गई। इस दौरान वो गिर गए और मदद के लिए चिल्लाने लगे। तब कुछ लोगों ने उनको बड़ी मुश्किल से बचाया और वहां से दूर ले गए। उन्होंने बताया कि इस हमले के दौरान उनके कपड़े फाड़े गए, मोबाइल, चश्मा और घड़ी छीन ली गई। उन्होंने यह भी कहा कि सीजेपी मुद्दे से भटक गई है और उसके कार्यकरता किसी की सुनने को तैयार नहीं है।
ग्राउंड कवरेज करने गए एबीपी न्यूज की टीम पर हमला किया गया। उनके रिपोर्टर पर हमला किया गया। रिपोर्टर ने बताया कि उनकी गाड़ी पर पत्थरों से हमला हुआ, जिसमें वह घायल हो गए। उनके साथ अभद्रता की गई। रिपोर्टर ने बताया कि उनके साथ मौजूद तमाम मीडिया कर्मियों के कैमरों को तोड़ने की कोशिश की गई। भीड़ में मौजूद उपद्रवियों ने न केवल पत्रकारों को सच दिखाने से रोका, बल्कि कई टीवी चैनलों की ओबी वैन और महंगे कैमरा उपकरणों को निशाना बनाने व तोड़ने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों को भारी भीड़ के बीच असामाजिक तत्वों के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। एक रिपोर्ट के अनुसार, दो महिला पत्रकारो पर हमला किया गया और उनके साथ भीड़ ने बुरा व्यवहार किया। एक महिला पत्रकार के साथ बुरा व्यवहार करने के साथ ही भीड़ ने घेर लिया। जांच में सामने आया है कि प्रदर्शनकारियों का एक वर्ग मीडिया पर लगातार दबाव बना रहा था कि वे केवल एक पक्ष (प्रदर्शनकारियों का रुख) ही दिखाएं। जब पत्रकारों ने सुरक्षा बलों पर हुए पथराव और सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की तस्वीरें कवर करना शुरू किया तो भीड़ ने मीडिया को बिकाऊ और पक्षपाती बताते हुए उन पर हमला करना शुरू कर दिया। इस दौरान कई ओबी वैन्स क्षतिग्रस्त हुईं और अन्य कवरेज उपकरण कैमरा आदि टूट गए।
इससे पहले भी जब सीजेपी ने भूख हड़ताल शुरू की थी तब इसकी कवरेज करने गए एबीपी न्यूज के पत्रकार के साथ प्रदर्शनकारी बदसलूकी और हथापाई करते नजर आए। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। यही नहीं एक अन्य पत्रकार ने जब प्रदर्शनकारियों से बात करना चाहा और पूछा कि मुद्दा क्या है और किस बात को लेकर वो प्रोटेस्ट कर रहे हैं तो उसे भी बिकाऊ मीडिया का ठप्पा लगा हुड़दंग मचाना शुरू कर दिया। इसके बाद उससे धक्का-मुक्की की और उसे वहां से चले जाने के लिए बाधित किया।
इन सारी घटनाओं से पता चलता है कि सीजेपी की भीड़ में कट्टरपंथी और आसामाजिक तत्व भी हैं, जो पत्रकारों को निशाना बनाते हैं, उनसे मारपीट करते हैं और उनको चुप कराने के लिए जानलेवा हमला तक करने को उतारू हो जाते हैं।