नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के कथित आंदोलन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में कई खुलासे हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि सीजेपी का कथित आंदोलन पूरी तरह से हिस्ट्रीशीटर और असामाजिक तत्वों के नियंत्रण में आ गया था। पुलिस पर लगातार पथराव और जानलेवा हमला होता रहा, फिर भी संयम बरता गया। जरूरत पड़ने पर ही न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।
पुलिस ने हलफनामे में बताया कि उसके पास खुफिया इनपुट, पुलिस तैनाती के आदेश, डेली डायरी, वायरलेस लॉग्स, सीसीटीवी फुटेज, बॉडी वार्न कैमरा, मेडिकल रिपोर्ट, संपत्ति के नुकसान का ब्योरा है। प्रदर्शन में नियमों और अनुमति की सीमाओं का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया। प्रदर्शन हिंसक हो गया था।
500 लोगों के शामिल होने की बात कही गई
पुलिस ने यह भी बताया कि 17 जुलाई को अनुमति मांगी गई थी कि 20 जुलाई को प्रदर्शन होगा और जंतर-मंतर पर 500 से 600 लोग शामिल होंगे। एक तो आवेदन कम समय में दिया गया था और यह सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुरूप भी नहीं था। प्रदर्शन की अनुमति 20 जुलाई को शाम पांच बजे खत्म हो गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी वहां डटे रहे और भीड़ जुटाते रहे।
संसद मार्च की नहीं ली थी मंजूरी
संसद मार्च के लिए न तो मंजूरी मांगी गई थी और न ही प्रशासन ने अनुमति दी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की अधिकतम संख्या एक हजार तय की गई थी। सीजेपी नेताओं ने लगातार अपील कर इसी सीमा का उल्लंघन किया।
20 जुलाई को 20 हजार से अधिक लोग
20 जुलाई को प्रदर्शन स्थल पर बीस हजार से अधिक लोग मौजूद था। जिन्हें कंट्रोल करने के लिए पांच हजार पुलिसकर्मी तैनात थे। उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, उन्हें खींचा, भारी पथराव किया। हिंसक झड़पों के दौरान 240 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।

















