भूख सिर्फ पेट की समस्या नहीं, बल्कि इंसान के जीवन, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल है। जब किसी देश में लोगों को भरपेट भोजन मिलने लगता है, तो वहां का विकास भी तेज़ी से आगे बढ़ता है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र (UN) की नई रिपोर्ट दुनिया के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2025 में लगातार तीसरे साल दुनिया में भुखमरी की दर घटी है। सबसे खास बात यह है कि इस बदलाव में भारत की भूमिका सबसे अहम रही है। एशिया में भूख कम होने का सबसे बड़ा कारण भारत की बेहतर सरकारी योजनाएं और कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति को माना गया है।
भुखमरी में गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया की लगभग 64.5 करोड़ आबादी यानी 7.8 प्रतिशत लोग भूख से प्रभावित रहे। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में कम है। वर्ष 2024 में यह 8.1 प्रतिशत और 2022 में 8.6 प्रतिशत था। लगातार तीन साल तक भुखमरी में कमी आना इस बात का संकेत है कि कई देशों ने सही दिशा में काम किया है। भारत के लिए यह उपलब्धि और भी बड़ी है क्योंकि यहां भूख की दर पहली बार 10 प्रतिशत से नीचे पहुंच गई है। इसका मुख्य कारण गरीबों को मुफ्त अनाज देने की योजनाएं, किसानों को सरकारी सहायता और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी है। बेहतर खेती और खाद्यान्न की पर्याप्त उपलब्धता से करोड़ों लोगों को फायदा मिला है।
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अफ्रीका के कई देशों में भी भूख की स्थिति में सुधार देखने को मिला है। इथियोपिया, तंजानिया, जिम्बाब्वे, सेनेगल और जाम्बिया जैसे देशों ने भी सकारात्मक प्रगति की है। वहीं डोमिनिकन गणराज्य अब उन देशों की सूची से बाहर हो गया है, जहां गंभीर भुखमरी की समस्या थी। हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि अभी कई चुनौतियां बाकी हैं। बच्चों में कुपोषण, महिलाओं में एनीमिया और वयस्कों में बढ़ता मोटापा चिंता का विषय बना हुआ है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, सूखा, बाढ़ और वैश्विक व्यापार में आने वाली रुकावटें भविष्य में खाद्य सुरक्षा पर असर डाल सकती हैं।
















