लगातार दो बार उपराष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी के ए. जी. नूरानी मेमोरियल लेक्चर में दिए गए बयान पर विवाद गहरा गया है। हामिद अंसारी ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में ए.जी. नूरानी की पुस्तक ‘The RSS: A Menace to India’ का हवाला देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने कथन का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि नेहरू ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की बैठक में कहा था कि भारत के लिए असली खतरा साम्यवाद (कम्युनिज्म) नहीं, बल्कि ‘हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता’है।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी और ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी सहित कई मुस्लिम नेताओं ने इस बयान से किनारा किया। उन्होंने इसे समाज में दूरी और तनाव पैदा करने वाला तथा विभाजनकारी करार दिया। उनका कहना है कि जब हामिद अंसारी सत्ता और महत्वपूर्ण पदों पर थे, तब उन्हें सेक्युलरिज्म याद था और अब माहौल बिगाड़ने के लिए ऐसे बयान दिए जा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी और कई अन्य संगठनों ने इस पर तीखी आपत्ति जताते हुए कांग्रेस और पूर्व उपराष्ट्रपति की सोच पर सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस बयान को सनातन परंपरा का अपमान और देश की छवि धूमिल करने वाला एजेंडा बताया हैं। विश्व हिंदू परिषद ने हामिद अंसारी के इस बयान को शर्मनाक बताया।
हामिद अंसारी का विवादों से चोली-दामन का साथ
हामिद अंसारी का विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है। पूर्व में भी कई बार विवाद सामने आ चुके हैं। जनवरी 2026 में महमूद गजनवी जैसे आक्रमणकारियों के संदर्भ में दिए गए कथित बयानों को लेकर देश की राजनीति में काफी सियासत गरमाई थी, जिसे सत्ता पक्ष ने इतिहास और देश की आस्था पर हमला बताया था। हामिद अंसारी ने इस्लामिक आक्रांताओं विशेषकर महमूद गजनवी और लोदी वंश का संदर्भ देते हुए उन्हें भारतीय लुटेरा करार दिया था। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक रूप से यह कहना काफी आसान है कि उन्होंने भारत को नष्ट कर दिया लेकिन वे सभी भारतीय थे। उस समय भी भाजपा ने इस बयान पर बेहद कड़ी आपत्ति जताई और इस देश के इतिहास तथा हिंदू आस्था पर एक बड़ा हमला बताया था। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि विपक्ष और कांग्रेस का इकोसिस्टम ऐतिहासिक अत्याचारों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि महमूद गजनवी एक क्रूर हमलावर था जिसने भारत पर 17 बार आक्रमण किया और देश की आस्था के प्रतीक सोमनाथ मंदिर को अपवित्र व नष्ट किया था।
बालाकोट सैन्य कार्रवाई पर सवाल पूछे
हामिद अंसारी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के तौर-तरीकों और वहां लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर चिंता व्यक्त की थी। वर्ष 2019 में बालाकोट सैन्य कार्रवाई पर सवाल पूछ रहे थे। नागरिकता संशोधन अधिनियम और एनआरसी के विरोध में हामिद अंसारी ने प्रदर्शनकारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का समर्थन किया था। उन्होंने देश में अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना होने की बात कही थी जिस पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन पर सांप्रदायिक आधार पर समाज को बांटने और एक संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया था। देश के विभाजन के ऐतिहासिक संदर्भों और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर से जुड़े विवादों पर भी उनके विचारों ने राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल पैदा की थी। आलोचकों का कहना था कि वे विभाजन के इतिहास को लेकर एकतरफा दृष्टिकोण रखते हैं।

















