
नई दिल्ली: अमेरिका ने परमाणु संवर्धन (यूरेनियम एनरिचमेंट) को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ परमाणु संवर्धन समझौते को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब सऊदी अपनी जमीन पर नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम संवर्धन कर सकेगा। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि जल्द ही इस समझौते की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
US-सऊदी अरब के बीच 30 साल के परमाणु समझौते पर मंजूरी
अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ 30 साल के परमाणु समझौते को मंजूरी दी है। यानी 30 साल तक सऊदी अरब यूरेनियम एनरिचमेंट कर सकता है। अमेरिकी कंपनियां भी सऊदी के परमाणु कार्यक्रम के विकास में शामिल रहेंगी। इस समझौते के बाद अब सऊदी में यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट बनाने का रास्ता खुल सकता है। ट्रंप प्रशासन का यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सऊदी अरब और ईरान के बीच लंबे समय से खींचतान रही है। दोनों देश एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं। सऊदी को यूरेनियम संवर्धन की इजाजत मिलने से पश्चिम एशिया का शक्ति संतुलन बदल सकता है।
इस समझौते ने परमाणु हथियारों को लेकर बढ़ाई चिंता
यूरेनियम संवर्धन से भविष्य में सऊदी अरब के परमाणु हथियार बनाने का रास्ता खुल सकता है। सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान कहते आए हैं कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल करता है तो सऊदी भी उसी दिशा में कदम उठा सकता है। इस समझौते के बाद अब सऊदी अरब भविष्य में यह कर सकता है। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले ने पश्चिम एशिया में नए रणनीतिक समीकरणों और परमाणु हथियारों की दौड़ को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ईरान पहले से ही परमाणु हथियार की दौड़ में है और अब सऊदी अरब भी इस दौड़ में शामिल हो जाएगा।