उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रविवार सुबह पुलिस और नक्सली कमांडर के बीच मुठभेड़ हो गई। इस मुठभेड़ में 30 लाख रुपये का इनामी नक्सली बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह मारा गया। बताया जा रहा है कि बृजेश झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी का कमांडर था। वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की तलाश में था और करीब आठ साल पहले NIA ने उसे टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में वांटेड घोषित किया था।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, 20 सितंबर की सुबह बृजेश गंझू अपने एक साथी के साथ मोटरसाइकिल से मुगलसराय की ओर जा रहा था। वह टेंगरा मोड़ से रामनगर होते हुए आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से उसके बारे में सूचना मिली। सूचना मिलने के बाद यूपी ATS की टीम ने रामनगर थाना क्षेत्र में उसे रोकने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए बृजेश बाइक से कूद गया और पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। दोनों ओर से हुई गोलीबारी में बृजेश को गोली लग गई। मुठभेड़ के दौरान यूपी ATS के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण भी फायरिंग की चपेट में आए। पुलिस के अनुसार, बृजेश की ओर से चलाई गई गोली दोनों के बुलेट प्रूफ जैकेट पर लगी। हालांकि दोनों पुलिसकर्मी सुरक्षित रहे। गोली लगने के बाद बृजेश गंझू को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही काशी जोन के वरिष्ठ अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे।
बृजेश गंझू पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसमें झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख और NIA की तरफ से 5 लाख रुपये शामिल थे। झारखंड पुलिस के प्रवक्ता और IG ऑपरेशन्स नरेंद्र सिंह ने भी वाराणसी में मुठभेड़ के दौरान बृजेश के मारे जाने की पुष्टि की है। NIA ने करीब आठ साल पहले उसे टेरर फंडिंग केस में वांटेड घोषित किया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बृजेश वाराणसी कब आया था और उसके साथ मौजूद दूसरा व्यक्ति कौन था। साथ ही उसके स्थानीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

















