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अभेद्य होगा रण प्रदेश

भारत अपनी पश्चिमी सुरक्षा ढाल को अभेद्य बनाने की तैयारी कर रहा है।'ऑपरेशन क्लीन' अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई भर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बदली सोच का स्पष्ट संदेश है।

Written byविनोद पाठकविनोद पाठक
Jul 16, 2026, 03:18 pm IST
inविश्लेषण, राजस्थान

भारत और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान के बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर और श्रीगंगानगर जिलों में इन दिनों बुलडोजर गरज रहा है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगी 50 किलोमीटर की पट्टी से सभी अवैध निर्माणों को हटाने के लिए ‘ऑपरेशन क्लीन’ शुरू किया जा चुका है।

गत 27 मई को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बीकानेर में सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय बैठक के दौरान ही इस ‘ऑपरेशन क्लीन’ के आदेश दिए थे। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी इस कार्रवाई का जहां स्वागत होना चाहिए, वहां कांग्रेस पार्टी तुष्टीकरण की राजनीति में जुटी है, जो सीमा पार बैठे आतंक के आकाओं को ऑक्सीजन देने का काम कर सकती है।

सीमा पर बढ़ते खतरे

आखिर ऐसा क्या है, जिसके कारण भारत सरकार को राजस्थान में आने वाली 1040 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को लेकर चिंता हुई। पिछले कुछ दशकों से सीमावर्ती क्षेत्र में जनसांख्यिकीय परिवर्तन को लेकर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। विगत वर्षों में राजस्थान में चरमपंथ से जुड़े तत्व सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़े हैं। न केवल सीमावर्ती जिलों, बल्कि राजस्थान के अन्य जिलों में भी चरमपंथियों की गतिविधियों में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। पिछले एक दशक में एनआईए, राजस्थान एटीएस, एसओजी, इंटेलिजेंस ब्यूरो और बीएसएफ ने जासूसी, कट्टरपंथ और सीमा पार नेटवर्क से जुड़े कई मामलों में कार्रवाई की है। मार्च 2022 में राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय प्रतिबंधित संगठन ‘सूफा’ से जुड़े विस्फोटक बरामदगी मामले में छापेमारी हुई।

जून 2025 में एनआईए ने प्रतिबंधित संगठन हिज्ब-उत-तहरीर के आतंकी नेटवर्क की जांच के तहत राजस्थान के झालावाड़ जिले में छापेमारी कर डिजिटल उपकरण और अन्य सामग्री जब्त की। मई 2025 में जैसलमेर के रोजगार विभाग के सहायक प्रशासनिक अधिकारी शाकूर खान को पाकिस्तान के लिए कथित जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान की ओर से सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और फर्जी डिजिटल पहचान का उपयोग कर भारतीय नागरिकों, सरकारी कर्मचारियों और रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिशें बढ़ी हैं। हाल ही में जयपुर में बबीता धाकड़ नाम की महिला को पुलिस ने गिरफ्तार किया। बबीता न केवल ऑनलाइन कन्वर्जन कर चुकी थी, बल्कि सीमा पार कुख्यात आतंकियों के संपर्क में भी थी, जो भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं।

सामरिक महत्व

बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और श्रीगंगानगर जिले भारतीय सेनाओं के लिए निर्णायक मोर्चे रहे हैं। 1965 या 1971 का युद्ध हो या पिछले साल का ऑपरेशन सिंदूर, राजस्थान के ये जिले सबसे पहले निशाने पर आए हैं। सामरिक दृष्टि से राजस्थान में भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा संवेदनशील है। चिंताजनक बात यह है कि हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने अपनी सीमा की ओर समानांतर उत्तर से दक्षिण तक हाईवे नेटवर्क और सैन्य सपोर्ट रूट्स को मजबूत किया है। फिर पंजाब के साथ-साथ राजस्थान में ड्रोन के माध्यम से हेरोइन, हथियार, संचार उपकरण और अन्य प्रतिबंधित सामग्री भेजने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इन इलाकों में फर्जी आधार कार्ड, जाली नोट, म्यूल बैंक अकाउंट, शेल कंपनियां, हवाला नेटवर्क और पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद को बढ़ावा देने की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।

इन चार जिलों में जीरो लाइन से सटे इलाकों में जनसांख्यिकीय बदलाव और मुस्लिम आबादी में वृद्धि दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब नई-नई मस्जिदों और मदरसों का बड़ी संख्या में स्थापित होना रणनीतिक दृष्टि से सामान्य नहीं माना जा सकता। इनमें से अधिकांश संस्थान आधुनिक शिक्षा प्रणाली से पूरी तरह कटे हुए हैं और कट्टर मजहबी शिक्षा को बढ़ावा दे रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने देखा था कि राजस्थान सीमा के दूसरी तरफ बहावलपुर स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर ‘मरकज जामिया मस्जिद सुभान अल्लाह’ को भारतीय सेना ने नेस्तनाबूद कर दिया था। यह हेडक्वार्टर राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 100 किलोमीटर दूर है।

सेवानिवृत्त कर्नल एसके राठौर का कहना है कि सिंधु जल संधि (अब निलंबित) के तहत पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का पानी मिल रहा है। इस पानी का सर्वाधिक लाभ वहां पंजाब प्रांत ने उठाया। यदि हम सैटेलाइट मैप (नक्शा देखें) पर देखें तो पाएंगे कि पाकिस्तान की ओर इन नदियों से जुड़ी नहर प्रणाली के चलते सीमा से सटे अनेक क्षेत्र अत्यंत उपजाऊ और हरे-भरे हैं। पाकिस्तान की ओर सीमावर्ती इलाकों में आबादी का लगातार विस्तार हुआ है। बढ़ती आबादी के साथ उस ओर स्थाई निर्माण, मदरसे और मस्जिदें बढ़ी हैं। इसके साथ भारत की ओर सीमावर्ती क्षेत्र में अवैध मदरसे, मस्जिद और दरगाहों का बढ़ना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। सीमा के दोनों ओर समान आबादी का बढ़ना खतरे का संकेत है।

राजस्थान से लगी सीमा पर युद्ध की स्थिति में केवल ड्रोन और मिसाइल हमले नहीं होंगे, बल्कि मैकेनाइज्ड वारफेयर (युद्ध की एक आधुनिक शैली है जिसमें मोटर चालित और बख्तरबंद वाहनों जैसे टैंकों और इन्फेंट्री कॉम्बैट वाहनों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है) वह भी मुख्य रूप से काम में लिया जाएगा। मैकेनाइज्ड वारफेयर में गोपनीयता युद्ध का अहम हिस्सा होती है। थार मरुस्थल के भूगोल को देखें तो बख्तरबंद टुकड़ियां और टैंक सड़कों के बजाय रेत के धोरों और प्राकृतिक आवरण का इस्तेमाल करते हैं, ताकि उनका कैमोफ्लाज (छलावा) बना रहे। यदि सीमावर्ती क्षेत्रों में देश विरोधी और संदिग्ध तत्वों की मौजूदगी बढ़ती है तो हमारी सेना के सामरिक मूवमेंट और वायुसेना के फॉरवर्ड बेस की गतिविधियों की जानकारी अवैध निर्माणों में शरण लेकर बैठे देश विरोधी तत्व दुश्मन को दे सकते हैं।

ऊर्जा सुरक्षा

दूसरा, राजस्थान की रेगिस्तानी पट्टी अब केवल बंजर सीमा नहीं रह गई है। यह भारत की ऊर्जा संप्रभुता का एक प्रमुख केंद्र बन चुकी है। बाड़मेर और जैसलमेर बेसिन से देश के घरेलू कच्चे तेल का 20-25 प्रतिशत हिस्सा निकाला जा रहा है। हाल में अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब पचपदरा में आधुनिक रिफाइनरी और पेट्रो केमिकल्स परिसर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया। इसके अलावा, पश्चिमी राजस्थान में सौर ऊर्जा पार्क और पवन ऊर्जा परियोजनाएं पूरे क्षेत्र को राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र बनाती हैं। यदि सीमावर्ती क्षेत्रों में देश विरोधी तत्वों की घुसपैठ होगी तो ऊर्जा स्रोतों और रिफाइनरियों को खतरा हो सकता है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी आधुनिक संघर्ष में ऊर्जा प्रतिष्ठान, संचार नेटवर्क, रेलवे, तेल पाइपलाइन, बिजली ग्रिड और रिफाइनरियां संभावित रणनीतिक लक्ष्य मानी जाती हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा केवल औद्योगिक सुरक्षा का प्रश्न नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय भी है।

राजनीति बनाम सुरक्षा

बदलती चुनौतियों को देखते हुए भारत सरकार ने सीमा सुरक्षा की पारंपरिक अवधारणा को व्यापक बनाते हुए बहु-एजेंसी मॉडल अपनाने पर जोर दिया है। बीकानेर में हुई सुरक्षा समीक्षा बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि सीमा सुरक्षा केवल सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि जिला प्रशासन, राज्य सरकार, स्थानीय नागरिक, केंद्रीय एजेंसियां और वित्तीय निगरानी संस्थाएं भी इसका हिस्सा बनेंगी। प्रत्येक सीमावर्ती जिले के लिए 360 डिग्री सुरक्षा ग्रिड विकसित करने का निर्णय लिया गया। पहले अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित अवैध निर्माणों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति लागू करने का निर्णय लिया गया, जिसे बाद में बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया। सीमावर्ती जिलों के कलेक्टरों को बैंकिंग लेन-देन, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के वित्तीय स्रोतों और संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों की निगरानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

बीएसएफ से सेवानिवृत्त आईजी एमके मलिक कहते हैं कि जीरो लाइन से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर, जहां की आबादी बमुश्किल 60 से 100 लोगों की है, वहां करोड़ों रुपए की लागत से बड़ी मस्जिदें और ऊंचे परिसर क्यों बनाए जा रहे हैं? इसके लिए फंडिंग कहां से हो रही है? ऐसी तमाम चीजों की जांच किए जाना बेहद जरूरी है। जहां तक सरकार द्वारा की गई जा रही कार्रवाई की बात है तो वह सरकारी और चरागाह भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ एक कानूनी कदम है।

स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में जोखिम का आकलन सामान्य शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों की तरह नहीं किया जा सकता। दुनिया के अधिकांश देशों ने अपने संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा प्रावधान विकसित किए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी नियम सामान्य प्रशासनिक क्षेत्रों से अधिक कठोर होते हैं। भारत में भी सीमा प्रबंधन का उद्देश्य यही है कि संवेदनशील क्षेत्रों में किसी प्रकार की ऐसी परिस्थिति विकसित न होने पाए, जिसका लाभ देशविरोधी तत्व उठा सकें।

‘ऑपरेशन क्लीन’ को किसी मजहब या समुदाय के चश्मे से देखने के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमाई प्रबंधन और कानून के शासन के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यदि कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में, बिना किसी भेदभाव के और केवल अवैध निर्माणों के विरुद्ध होती है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। राजस्थान में अंतरराष्ट्रीय सीमा केवल एक सीमा नहीं, बल्कि यह भारत की पश्चिमी सुरक्षा ढाल है। इस ढाल को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया हर वैधानिक कदम देश की सामरिक क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक आवश्यक निवेश है। राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है और सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी निर्णय उसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।

Topics: थार मरुस्थलअमित शाहरिफाइनरी सुरक्षाभारत पाकिस्तान सीमाऑपरेशन क्लीनपाञ्चजन्य विशेषऊर्जा सुरक्षाऑपरेशन सिंदूरविनोद पाठकअभेद्य होगा रणपश्चिमी सीमा सुरक्षामैकेनाइज्ड वारफेयर
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