BJP को रोकने के लिए संघ को निशाना क्यों बना रहा विपक्ष?
September 5, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम मत अभिमत

BJP को रोकने के लिए संघ को निशाना क्यों बना रहा विपक्ष?

जानिए क्यों विपक्षी दल भाजपा को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं और हिंदू एकता से राजनीतिक परिदृश्य कैसे बदला।

Written byडॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वालडॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वाल — edited by Shivam Dixit
Jul 5, 2026, 02:05 am IST
inमत अभिमत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (प्रतीकात्मक फोटो)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (प्रतीकात्मक फोटो)

भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर 12 साल गुज़रने के बाद भी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता देश और विदेश में बेमिसाल बनी हुई है, खासकर तब जब दूसरे बड़े देशों में नेतृत्व में बार-बार बदलाव हो रहे हैं। हालांकि 2024 के आम चुनावों के नतीजों से विपक्षी पार्टियां कुछ समय के लिए उत्साहित थीं, लेकिन अलग-अलग राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों की लगातार हार ने इस उत्साह को कम कर दिया है।

पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत और केरल में बढ़त ने विपक्षी नेताओं और गुटों के साथ-साथ मोदी को सत्ता से हटाने की कोशिश कर रही अंतरराष्ट्रीय ताकतों को भी बड़ा झटका दिया है। इन घटनाक्रमों के बीच, मोदी सरकार ने गैर-कानूनी धार्मिक धर्मांतरण से निपटने के लिए सख्त FCRA नियम लागू किए हैं, जिससे अमेरिका में सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन कदमों के खिलाफ एकजुट हो गई हैं। मोदी सरकार ने नक्सलवाद से निपटने और प्रभावित इलाकों में विकास परियोजनाएँ शुरू करके भारतीय जनता का व्यापक समर्थन भी हासिल किया है। अगला लक्ष्य नशा-मुक्त भारत बनाना है।

ईरान-अमेरिका संघर्ष के दौरान, जब विकसित देश इंधन एवं ऊर्जा की कमी से जूझ रहे थे, मोदी सरकार ने दिखाया कि 1.4 अरब से ज़्यादा आबादी होने के बावजूद चुनौतियों को अवसरों में कैसे बदला जा सकता है। कल्याणकारी कार्यक्रम, ऑपरेशन सिंदूर, रक्षा क्षमताओं में सुधार, समुदायों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना, घुसपैठियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और वक्फ बोर्ड में संशोधन जैसी पहलों ने मोदी के शासन के बारे में राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक भावनाएँ पैदा की हैं।

विपक्षी दलों की स्थिति और राजनीतिक परिदृश्य

हाल के नतीजों और कार्यों के परिणामस्वरूप क्षेत्रीय पार्टियों की ताकत कम हो गई है। ममता बनर्जी की तृणमूल, शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना बिखर गई हैं। दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों के समर्थन में भी गिरावट आई है। अखिलेश यादव ने समझ लिया है कि 2024 के आम चुनावों में शानदार प्रदर्शन का 2027 के उत्तर प्रदेश चुनावों में दोहराया जाना मुश्किल है, जिससे उनका उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर लौटना एक दूर की कौड़ी लग रहा है। राहुल और प्रियंका के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन में भारी गिरावट आई है और 2024 के आम चुनावों में उनके मामूली फायदे के दोबारा मिलने की संभावना कम है, राहुल के प्रधानमंत्री बनने की बात तो दूर की है। इन घटनाक्रमों ने विपक्षी पार्टियों और वैश्विक बाज़ार की ताकतों के बीच घबराहट, बेचैनी और बेसब्री की गहरी भावना पैदा कर दी है। इन पार्टियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा भाजपा के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव की बारीकी से जाँच करने पर संघ और उससे जुड़े संगठनों की भूमिका इन्हें साफ़ नज़र आती है। उनका मानना है कि संघ द्वारा तैयार किए गए मज़बूत नेताओं का कैडर ही उनके राजनीतिक संघर्षों और पतन का एक मुख्य कारण है। उन्हें यह भी साफ़ हो गया है कि संघ को सभी जातियों के लोगों का समर्थन और प्यार मिला है। यहाँ तक कि जो लोग संगठन का हिस्सा नहीं हैं, वे भी अच्छे और मुश्किल समय में संगठन के प्रयासों और राष्ट्र-निर्माण में उसकी भूमिका की काफ़ी तारीफ़ करते हैं, जिससे भाजपा को चुनावी सफलता मिलती है, ऐसा उनका मानना है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका और सामाजिक कार्य

जनता के बीच संघ की अच्छी छवि किसी विज्ञापन या मार्केटिंग का नतीजा नहीं है, बल्कि यह संघ के उन स्वयंसेवकों की पीढ़ियों की मेहनत का फल है, जिन्होंने समाज और देश की सेवा के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। उन्होंने अक्सर अपनी निजी ज़िंदगी की परवाह किए बिना मानसिक और शारीरिक कठिनाइयाँ झेलीं, यहाँ तक कि तब भी जब संघ पर प्रतिबंध लगा हुआ था। जाति या धर्म से ऊपर उठकर उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के समय हर भारतीय की मदद की है। वे ऐसे इलाकों में सेवा कार्य चला रहे हैं, जहाँ अलग-अलग जातियों के लोग गरीबी में जी रहे हैं, ताकि उनकी गरिमा बढ़ाई जा सके और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। वनवासी कल्याण आश्रम, सेवा भारती, सेवांकुर, भारतीय मज़दूर संघ, भारतीय किसान संघ, विश्व हिंदू परिषद और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे संगठन अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं और बिना किसी भेदभाव के सभी समुदायों की सेवा करते हैं। पिछली सदी में जो भरोसा उन्होंने जीता है, वह समाज और देश के लिए उनकी समर्पित कोशिशों का सीधा परिणाम है।

हिंदू समाज में बढ़ती एकता और राजनीतिक बदलाव

हिंदू समुदाय में बढ़ती एकता का श्रेय पिछली सदी में संघ की कोशिशों को जाता है। इस एकता ने राजनीतिक माहौल और सोच पर काफी असर डाला है और इस बात पर ज़ोर दिया है कि हिंदुओं को अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। पहले राजनीतिक नेता और उनकी पार्टियाँ अक्सर हिंदू संस्कृति के प्रति नफ़रत दिखाती थीं और इसके देवी-देवताओं एवं परंपराओं का मज़ाक उड़ाती थीं। हालाँकि उनके नज़रिए में साफ़ बदलाव आया है, क्योंकि हिंदू मतदाता अब अपनी संस्कृति, धर्म और देश पर गर्व करने लगे हैं। अब ये नेता मंदिरों में जाते हैं, माथे पर तिलक लगाते हैं और प्रभु श्रीराम की प्रशंसा करते हैं। ऐसा लगता है कि वे हिंदुओं और हिंदू मान्यताओं को नज़रअंदाज़ करके और कमतर आँककर खोया हुआ भरोसा फिर से हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। लोग अब इन दिखावटी हरकतों को समझने लगे हैं।

संघ के खिलाफ आरोप और राजनीतिक बयानबाज़ी

जैसे-जैसे इन राजनीतिक नेताओं का राजनीतिक प्रभाव कम हो रहा है, उन्हें लगता है कि संघ और उससे जुड़े संगठनों की छवि खराब करने से लोग उन्हें फिर से वोट देंगे और वे राज्य तथा राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर सत्ता में वापस आ पाएँगे। परिणामस्वरूप, संघ के संगठनों की सकारात्मक छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए कई झूठी बातें गढ़ी और फैलाई जा रही हैं। समाज को यह समझना चाहिए कि संघ के खिलाफ गढ़ी गई इन कहानियों का मकसद असल में हर भारतीय की गरिमा पर हमला करना, सामाजिक-आर्थिक तरक्की में बाधा डालना, आध्यात्मिक उन्नति में रुकावट डालना, अलग-अलग क्षेत्रों में विकास को रोकना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब करना है। उनका (राजनीतिक नेताओं का) मकसद हमें एक बार फिर कमज़ोर करना है, ताकि हम बाहरी खतरों, जैसे पाकिस्तान से, असुरक्षित हो जाएँ।

हाल की घटना अयोध्या राम मंदिर के लिए भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे की चोरी के मामले से जुड़ा है। चोरी की बात सभी मानते हैं और उत्तर प्रदेश सरकार सख्त कानूनी कार्रवाई कर रही है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मज़बूत व्यवस्था लागू की जाएगी। हालाँकि जिस तरह से कुछ राजनीतिक हस्तियाँ और मीडिया संस्थान मनगढ़ंत कहानियाँ बना रहे हैं, उससे उनकी ज़हरीली सोच का पता चलता है। ऐसा लगता है मानो वे संघ और विश्व हिंदू परिषद को बदनाम करने के अवसर का इंतज़ार कर रहे थे।

संघ की कार्यशैली और भविष्य की चुनौती

राजनीतिक नेताओं और मीडिया प्रतिनिधियों को यह याद रखना चाहिए कि संघ ने बार-बार अपनी मज़बूती साबित की है। जब भी उसे कड़े हमलों का सामना करना पड़ा और उन मुद्दों के लिए गलत तरीके से दोषी ठहराया गया, जिनके लिए वह ज़िम्मेदार नहीं था, तब भी उसने मज़बूती से जवाब दिया, क्योंकि ज़मीनी स्तर पर उसके कार्यों से लोगों में भरोसा और विश्वास पैदा होता है। संघ पर तीन बार प्रतिबंध लगे हैं, लेकिन वह हर भारतीय और पूरे देश की सेवा करने के लिए हमेशा और अधिक मज़बूत होकर लौटा है। जो कोई भी संघ और उसके स्वयंसेवकों की ईमानदारी और निष्ठा पर सवाल उठाता है, उसे एक वर्ष तक संघ प्रचारक के साथ समय बिताना चाहिए। संघ ने हमारे गौरवशाली राष्ट्र को स्थापित करने और हमारे महान संविधान को बनाए रखने के लिए कार्य किया है। छत्रपति शिवाजी महाराज, स्वामी विवेकानंद, रानी अहिल्यादेवी, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, भगवान बिरसा मुंडा और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों तथा संतों का योगदान संघ की वजह से ही करोड़ों भारतीयों के दिलों में गहराई से बसा हुआ है।

 

Topics: हिंदू समाज एकता राजनीतिक बदलावसेवा भारती वनवासी कल्याण आश्रमPM Narendra Modi PopularityPanchjanya Opinionराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघराम मंदिरPanchjanya newsविश्व हिंदू परिषदWhy Opposition Targeting RSSविपक्ष और भाजपा राजनीति
डॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वाल
डॉ. पंकज जगन्नाथ जयस्वाल
डॉ पंकज जगन्नाथ जयस्वाल, शिक्षाविद्, लेखक और स्तंभकार हैं [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

लंदन दौरे पर सरसंघचालक श्री मोहन भागवत, आरएसएस के शताब्दी वर्ष में UK में गूंजेगा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश

आरएसएस ने सेवा के 100 वर्ष किए पूरे : लंदन में सुनील आंबेकर ने बताया सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के UK दौरे का प्लान

श्री मोहनराव भागवत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक

मैडिसन स्क्वायर से श्री मोहन भागवत का संदेश: विविधता, सह-अस्तित्व और भारतीय मूल्यों से अमेरिका में बंधा नया सूत्र

संघ ने 100 राष्ट्रभक्ति गीतों के साथ मनाया शताब्दी वर्ष, पराग अभ्यंकर बोले-संघ गीत जगाते हैं राष्ट्रप्रेम का भाव

किरेन रिजिजू, संसदीय कार्य मंत्री

तिरंगे के अपमान पर भड़के किरेन रिजिजू, खालिस्तानी समर्थकों को दी कड़ी चेतावनी- ‘महंगा पड़ेगा देश का अपमान’

फोटो साभार: ऑर्गनाइजर

‘अगर हिंदू जागेगा तो दुनिया जागेगी’ – टोरंटो में सरसंघचालक मोहन भागवत का शक्तिशाली संदेश

Load More

ताज़ा समाचार

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

लंदन दौरे पर सरसंघचालक श्री मोहन भागवत, आरएसएस के शताब्दी वर्ष में UK में गूंजेगा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश

सीएम- किसान की पांचवीं किस्त जारी, 41.35 लाख किसानों के खातों में पहुंचे ₹833 करोड़ से अधिक की राशि

CM Yogi Adityanath Ghazipur Rally Public Meeting Speech Panchjanya

बाबर व औरंगजेब के अनुयायी फिर से समाज में जहर घोलने में जुटे: CM योगी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जन्मभूमि पहुंचे सीएम योगी, चांदी से सजे गर्भगृह में किए भगवान कृष्ण के दर्शन

5 सितंबर का पंचांग

5 सितंबर पंचांग: जानें नवमी तिथि, मृगशिरा नक्षत्र, योग और करण का समय

आरएसएस ने सेवा के 100 वर्ष किए पूरे : लंदन में सुनील आंबेकर ने बताया सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के UK दौरे का प्लान

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग

अपने ही साए से डरते जिनपिंग

FASTag यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! हाईवे पर ये काम करते ही मिलेंगे ₹1000, जानें NHAI की स्कीम

Gold Price Today

Gold Price Today: जन्माष्टमी पर सोने की कीमत में गिरावट, जानिए आज का ताजा भाव

UK में सिख युवती हुई लव- जिहाद की शिकार, परिवार बोला- मुस्लिम युवक ने बेटी को फंसा लिया; आरोपी ग्रूमिंग गैंग का सदस्य!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies