मुहम्मद यूनुस की ही तर्ज पर बांग्लादेश की नई तारिक रहमान सरकार भी चीन की गोद में लगभग बैठती दिख रही है। देश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीन के दौरे के बाद तीस्ता जल समझौते को लेकर राग अलापना शुरू कर दिया है। रहमान ने कहा है कि तीस्ता बैराज मास्टर प्लान को किसी भी कीमत पर लागू किया जाएगा। उन्होंने इसे देश की राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया है।
खास बात ये है कि उन्होंने यह बयान अपनी हालिया चीन यात्रा का करने के बाद दिया है। चीन के साथ हुए समझौते के तहत ढाका और बीजिंग ने तीस्ता समेत कई नदियों के प्रबंधन पर साथ काम करने का फैसला किया था। इनमें ज्यादातर नदियां भारत से ऊपरी इलाकों से आती हैं। महत्वपूर्ण यह है कि तीस्ता जल समझौता अभी भी दोनों देशों के बीच जल के बंटवारे को लेकर अटका हुआ है।
चीन ने तारिक रहमान को किया आगे
तारिक रहमान ने पिछले हफ्ते चीन का दौरा किया। वहां उन्हें बीजिंग से पूरा समर्थन मिला। चीनी पक्ष ने कहा कि दुनिया चाहे जितनी बदल जाए, उनका साथ रहेगा। 26 जून को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीन-बांग्लादेश सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता। उन्होंने तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और पुनर्वास को बांग्लादेश के लिए महत्वपूर्ण आजीविका परियोजना बताया। हालांकि, जानकारों का ये मानना है कि बांग्लादेश को मोहरा बनाकर चीन भारत को निशाना बनाना चाहता है।
तारिक रहमान का बयान
उधर प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने कहा है कि सरकार देश की पुरानी पानी संबंधी समस्याओं को हल करने के लिए नदियों, नहरों और सिंचाई व्यवस्था में बड़े निवेश करने को तैयार है। उन्होंने राजशाही और रंगपुर इलाकों का जिक्र किया, जो भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से सटे हुए हैं। इन क्षेत्रों में पानी की समस्या सबसे ज्यादा है। तारिक रहमान ने कहा कि हम इन मुद्दों को लगातार सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
पद्मा बैराज की योजना
सरकार पद्मा बैराज बनाने की भी योजना बना रही है। मानसून में अतिरिक्त पानी को स्टोर करके सूखे मौसम में खेती के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे कृषि को फायदा पहुंचेगा और पानी का बेहतर प्रबंधन होगा।
उल्लेखनीय है कि तीस्ता नदी जितनी महत्वपूर्ण बांग्लादेश के लिए है, उतनी ही अहम भारत के लिए भी है। यह इलाके की खेती, रोजगार और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हुई है। बांग्लादेश इस पर बैराज बनाने की बात कर रहा है। वहां की नई सरकार इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता दे रही है।













