'हम भी अपने बच्चों को सेना में भेजेंगे', कहानी ऑपरेशन सिंदूर के वीर बलिदानी नायकों की
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‘हम भी अपने बच्चों को सेना में भेजेंगे’, कहानी ऑपरेशन सिंदूर के वीर बलिदानी नायकों की

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी आतंकियों के हमले में शहीद हुए बहादुर सैनिकों - सूबेदार पवन कुमार जरयाल, लांस नायक दिनेश कुमार शर्मा, राइफलमैन सुनील कुमार, हवलदार सुनील यादव और सुरेंद्र कुमार की वीर गाथा। उनके परिवारों ने गर्व के साथ कहा - बेटों को फिर सेना में भेजेंगे।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jun 27, 2026, 09:00 am IST
inभारत
ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों के द्वारा हिन्दुओं की बर्बर हत्या के बाद भारत ने शुरू किया ऑपरेशन सिंदूर। इस दौरान देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले बहादुरों के नामों को केंद्र सरकार ने सार्वजनिक किया है। इन परिवारों ने एक स्वर में कहा है कि उन्हें अपने बेटों को खोने का दुख तो है, लेकिन इस बात का गर्व भी है। इन वीरों के परिजनों का कहना है कि वे अपनी संतानों को भी सेना में भेजेंगे।

सूबेदार पवन कुमार जरयाल

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के पवन कुमार जरयाल हेडक्वार्टर 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड में सूबेदार मेजर थे। 9 मई 2025 को पुंछ (कृष्णाघाटी) सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी का जवाब देते हुए वे बलिदान हो गए थे। उन्हें 31 अगस्त 2026 को रिटायर होना था। उनकी पत्नी सुषमा कहती हैं कि जब घायल होने की खबर आई तो हमने सोच लिया था कि अगर लौट आए तो हमारे, नहीं लौटे तो देश के। बच्चे सेना में जाना चाहें तो उन्हें आशीर्वाद दूंगी। पवन का नाम अब देश के महान वीरों के साथ जुड़ गया है। उनके पिता हवलदार गरज सिंह कहते हैं कि पवन ने देश की रक्षा में बलिदान दिया। मैं अपने सैन्य जीवन में जो नहीं कर पाया, उसे मेरे बेटे ने कर दिखाया।

लांस नायक दिनेश कुमार शर्मा

हरियाणा के पलवल के नगला मोहम्मदपुर के लांस नायक दिनेश कुमार शर्मा 7 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब देते हुए शहीद हुए। उस समय उनके एक बेटा और एक बेटी थे। पत्नी सीमा देवी तीसरी बार गर्भवती थीं। अक्टूबर 2025 में उन्हें बेटा हुआ। सीमा कहती हैं कि पति पर गर्व है। अपने बेटों को भी सेना में भेजूंगी। दिनेश पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके दो छोटे भाई कपिल और हरदत्त अग्निवीर हैं।

राइफलमैन सुनील कुमार

ऑपरेशन सिंदूर में बलिदान देने वाले राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र मिला। वे जम्मू के अरनिया के त्रेवा गांव के रहने वाले थे। 10 मई 2025 को आरएसपुरा में खरकोला पोस्ट पर पाकिस्तानी गोलाबारी का जवाब देते हुए 25 वर्षीय सुनील शहीद हुए। उनकी मां सुदेश कुमारी और पिता यशपाल सिंह का कहना है कि बेटा खोने का दर्द गहरा है, लेकिन परिवार का सिर गर्व से ऊंचा है। सुनील के पिता और दोनों भाई भी सेना में रहे हैं। मां का दर्द कभी-कभी आंसुओं में दिख जाता है, लेकिन वे हिम्मत नहीं हारी।

हवलदार सुनील कुमार सिंह यादव

बिहार के बक्सर के हवलदार सुनील कुमार सिंह यादव राजौरी सेक्टर में 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी में तैनात थे। 9 मई 2025 की रात को उन्होंने दुश्मन के छह ड्रोनों को अपनी सेंट्री पोस्ट की ओर आते देखा। उन्होंने साथियों को खतरे की सूचना दी और खुले में आकर राइफल से फायरिंग शुरू कर दी। अंतिम सांस तक उन्होंने ड्रोनों की जानकारी देते रहे, जिससे कई जवान बच गए। इस काम के लिए उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल (वीरता) मिला। उनकी पत्नी सुजाता देवी कहती हैं कि पति ने देश के लिए हंसते-हंसते जान दी। अगर जरूरत पड़ी तो दोनों बेटों को भी देश को सौंप दूंगी। उनके छोटे भाई चंदन सिंह भी सेना में हैं।

राजस्थान के सुरेंद्र कुमार

राजस्थान के सुरेंद्र कुमार को भी मरणोपरांत वायु सेना मेडल (गैलेंट्री) मिला। उनकी मां नानू देवी कहती हैं कि बेटे को खोने का दर्द कभी कम नहीं होता, लेकिन उनका नाम राष्ट्र के वीरों में शामिल होना पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है।

Topics: पहलगाम आतंकी हमलाऑपरेशन सिंदूरभारतीय सेना बलिदानीबलिदानी सैनिक
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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