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होम कला-साहित्य पुस्तक समीक्षा

बनाएं स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत

स्वामी विवेकानंद ने भारत को गुलामी और भारतीयों को गुलाम मानसिकता से बाहर निकालने पर जोर दिया।

Written byप्रमोद कुमारप्रमोद कुमार
Jun 18, 2026, 10:13 pm IST
inपुस्तक समीक्षा

भारतीय युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद पर अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। हर लेखक ने स्वामी जी को अपनी—अपनी दृष्टि से समझा है और उनके शाश्वत विचारों को समाज के सामने रखा है। इसी कड़ी में एक और पुस्तक आई है- ‘अमृतकाल में स्वामी विवेकानंद की प्रासंगिकता।’ इसमें यह बताने का प्रयास किया गया है कि भारत के इस अमृत काल में स्वामी जी के विचार और कार्य हमें कैसे मार्गदर्शन देते हैं। इसके साथ ही लेखक ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन-चरित्र, दर्शन और उनके प्रभाव को सामान्य जनमानस तक आधुनिक संदर्भ के साथ पहुंचाने का अथक प्रयास किया है। लेखक यह भी बताते हैं कि स्वामी जी किन योजनाओं को भारत में लागू करना चाहते थे? उनका मुख्य कार्य और संदेश क्या था? वे कैसा भारत देखना चाहते थे?

यह पुस्तक जहां एक ओर अपने पाठकों को स्वामी विवेकानंद के जाग्रत भारत की परिकल्पना से अवगत करवाती है, तो वहीं दूसरी ओर युवाओं के जीवन में स्वामी जी की प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाल रही है। उनके ‘विश्वबंधुत्व के संदेश’ और महामारी के दौरान लिखे गए ‘प्लेग मेनिफेस्टो’ जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों की उपयुक्तता का सुंदर वर्णन किया गया है। पुस्तक में स्वामी जी के जीवन से जुड़े हुए अनेक रोचक प्रसंगों और जानकारियों को भी समाहित किया गया है। ये सब पाठक को स्वामी जी के समीप लाते हैं और उनसे जुड़ी अनेक भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास भी करते हैं।

प्रस्तावना में लेखक लिखते हैं कि स्वामी जी ने भारत को गुलामी और भारतीयों को गुलाम मानसिकता से बाहर निकालने पर जोर दिया। पुस्तक के प्रथम अध्याय ‘स्वामी विवेकानंद एवं जाग्रत भारत की परिकल्पना’ में भारत को कैसा होना चाहिए को बताने के साथ ही यह भी बताया गया है कि भारतीय स्वाधीनता आंदोलन से लेकर स्वतंत्र भारत की नींव रखने वाले अनेक नेता स्वामी जी से प्रेरणा लेते थे। उनमें बाल गंगाधर तिलक, भगिनी निवेदिता, महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आदि हैं।

भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी स्वामी जी के विचारों से प्रेरित हैं। वे अपने कार्यों और विचारों से भी बार-बार बताते हैं कि उन पर स्वामी जी का कितना गहरा प्रभाव है! नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में भी स्वामी जी को बार-बार उद्धृत करते हैं। यही नहीं, वे स्वामी जी से जुड़े स्थलों की धूल लेने जाते हैं, स्वामी जी द्वारा स्थापित रामकृष्ण मिशन के संतों का आशीर्वाद लेते रहते हैं।

मोदी जी स्वयं कहते हैं कि गरीबों की सेवा करने की प्रेरणा उन्हें स्वामी विवेकानंद के उस विचार से मिली है, जिसमें वे कहते हैं कि जीव सेवा ही शिव सेवा है। लेखक ने इन सबकी जानकारी पुस्तक के 14वें अध्याय में देते हुए बताया है कि आज के समय में स्वामी विवेकानंद और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।

स्वामी विवेकानंद जी ने कन्याकुमारी में 1892 में 25 से 27 दिसंबर तीन दिन तक तपस्या की थी। लेखक ने कन्याकुमारी में ‘स्वामी विवेकानंद शिला स्मारक’ बनवाने वाले एकनाथ रानाडे पर भी एक अध्याय लिखा है। इसमें वे बताते हैं कि उस समय के संघ के सरसंघचालक श्रीगुरुजी ने उन्हें 1963 में विवेकानंद शिला स्मारक समिति का कार्यभार संभालने को कहा जिसे उन्होंने धैर्य, कौशल, अपने व्यक्तित्व के अनुरूप निपुणता से 1970 में राष्ट्र को समर्पित किया था।

स्वामी विवेकानंद की बात हो और उसमें 11 सितंबर, 1893 को विश्व धर्म सभा, शिकागो में दिए गए उनके भाषण का उल्लेख न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। इस प्रसंग को पुस्तक में इस रूप में लिया गया है कि स्वामी जी के शिकागो भाषण के उपरांत भारतीय वेदांत और योग को कैसे यूरोपीय देशों में लोकप्रियता मिली। पुस्तक में डंके की चोट पर यह भी बताया गया है कि भारत एक आध्यात्मिक राष्ट्र है।

‘युवाओं के जीवन में स्वामी जी की प्रासंगिकता’ अध्याय में यह चर्चा की गई कि किन कारणों से स्वामी विवेकानंद आज भी नई पीढ़ी के प्रेरणास्रोत हैं। 19 अध्यायों में बंटी इस पुस्तक में एक अध्याय है-‘शोधार्थियों के लिए प्रेरणा का माध्यम बनेगी जेएनयू में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा।’ लेखक का मानना है कि जेएनयू में स्वामी जी की प्रतिमा लगना युवाओं की दृष्टि से एक अच्छी पहल है।

उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों में युवा शिक्षा लेने आते हैं। स्वामी जी के युवा और शिक्षा के बारे में स्वतंत्र विचार थे। उनका युवा पीढ़ी की क्षमता और परिवर्तनकारी शक्ति में बहुत विश्ववास था। इसलिए युवा उनसे प्रेरणा पाते हैं। कुल मिलाकर स्वामी विवेकानंद को आज के समय में समझने के लिए यह पुस्तक बहुत उपयोगी है।

Topics: जेएनयूगुलाम मानसिकतामहात्मा गांधीशाश्वत विचारनेताजी सुभाष चन्द्र बोसआध्यात्मिक राष्ट्रस्वामी विवेकानंदप्रेरणास्रोतबाल गंगाधर तिलकभारतीय स्वाधीनता आंदोलनअमृतकालजीव सेवाभगिनी निवेदितापाञ्चजन्य विशेषप्रेरणाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजाग्रत भारत
प्रमोद कुमार
प्रमोद कुमार
पाञ्चजन्य में असिस्टेंट एडिटर। राष्ट्रीय मुद्दों और सामाजिक सरोकार में रुचि। [Read more]
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