अमेरिका और ईरान के बीच बीते 4 माह से चल रहे युद्ध का आखिरकार अंत हो गया है। दोनों पक्षों के बीच शांति समझौता हो गया है। ये समझौता 14 सूत्रीय है। इसकी सबसे बड़ी बात ये है कि ईरान इस बात के लिए राजी हो गया है कि वह परमाणु बम नहीं बनाएगा। इस पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हस्ताक्षर होने हैं। अभी युद्धविराम लागू है और चार दिन बाद होर्मुज जलडमरूमध्य भी खुल जाएगा। इस तनाव की शुरुआत 107 दिन पहले हुई थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि यह 14 सूत्रीय समझौता है। हास्यास्पद बात ये है कि डोनाल्ड ट्रंप के रहते पाकिस्तान ने कोशिश की थी कि समझौते का पूरा श्रेय उसे मिले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
समझौते के 14 मुख्य बिंदु
मेहर न्यूज एजेंसी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार MoU के ये 14 अहम बिंदु हैं:
लेबनान और दूसरे मोर्चों पर तुरंत युद्ध रोकना।
ईरान के आंतरिक मामलों में अमेरिका कोई दखल नहीं देगा।
अमेरिका 30 दिनों के अंदर नाकेबंदी हटा देगा।
ईरान के आसपास से अमेरिकी सेना हट जाएगी।
ईरान 30 दिनों के अंदर होर्मुज को पूरी तरह खोल देगा।
अमेरिका तेल और पेट्रोकेमिकल्स पर लगे प्रतिबंध हटा देगा।
ईरान को हुए नुकसान की भरपाई के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण प्लान बनाएंगे।
अगले 60 दिनों में परमाणु मुद्दे, अमेरिका के सभी प्रतिबंध और यूएन सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर अंतिम समझौता हो जाएगा।
ईरान ने साफ कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
60 दिनों में ईरान का फ्रीज किया गया 24 अरब डॉलर का फंड रिलीज कर दिया जाएगा।
समझौते को लागू करने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया जाएगा।
अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के जरिए लागू किया जाएगा।
जब तक ईरान का आधा फंड रिलीज नहीं हो जाता, तब तक अंतिम बातचीत शुरू नहीं होगी।
अंतिम बातचीत परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, ईरान की अर्थव्यवस्था की मरम्मत और मिसाइल कार्यक्रम पर होगी।
24 अरब डॉलर की संपत्ति किस्तों में मिलेगी
MoU पर साइन होने के बाद अगले 60 दिनों में दोनों पक्ष व्यापक अंतिम समझौते पर बात करेंगे। ईरान होर्मुज पर अपना सैन्य अवरोध तुरंत हटा लेगा ताकि सभी व्यापारिक जहाज आसानी से गुजर सकें। बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म कर देगा। अमेरिका ने ईरान की 24 अरब डॉलर की जब्त संपत्ति किस्तों में वापस करने पर सहमति जताई है। इसमें सीधे पैसे ट्रांसफर, पड़ोसी देशों की मदद और वित्तीय क्रेडिट लाइन जैसे रास्ते अपनाए जा सकते हैं।
इसे भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान के बीच आखिर हो ही गया शांति समझौता, इस्लामिक देश बोला-‘शुक्रवार से खुल जाएगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’
ईरान अपने पास रखे उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने को भी तैयार है। इसकी प्रक्रिया पर अगले 60 दिनों में चर्चा होगी। ईरान हमेशा से परमाणु हथियार बनाने के आरोपों से इनकार करता रहा है, लेकिन उसने हथियार स्तर के करीब यूरेनियम संवर्धन कर रखा है।
लेबनान का मुद्दा अलग
लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहे संघर्ष का समझौते के मसौदे में जिक्र नहीं किया गया है। ईरान चाहता था कि दक्षिणी लेबनान की समस्या भी सुलझे, लेकिन अमेरिका और इजरायल इसे अलग मुद्दा मानते हैं।














