अमेरिका और ईरान के बीच बीते 28 फरवरी से चल रहे युद्ध का आखिरकार अंत हो गया है। दोनों देशों के बीच शांति समझौता हो गया है। इस बात की पुष्टि खुद डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों ने कर दी है। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजेम घरिबाबादी ने सोमवार की सुबह टीवी पर कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच युद्ध को तुरंत खत्म करता है और इसमें लेबनान भी शामिल है। साथ ही इस बीच ईरान की सरकारी मीडिया ने कहा है कि शुक्रवार से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नौवहन के लिए खोल दिया जाएगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को इस समझौते की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दोनों तरफ से सभी मोर्चों पर, लेबनान सहित, सैन्य कार्रवाई तुरंत और हमेशा के लिए बंद हो गई है। समझौते पर हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने हैं।
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुल जाएगा और अमेरिका की नौसैनिक ब्लॉकेड हट जाएगी। उन्होंने कहा, “दुनिया के जहाज, इंजन स्टार्ट करो। तेल बहने दो!” बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि हस्ताक्षर के बाद माइन्स हटाने के लिए यह खुल जाएगा। ईरान की मीडिया के अनुसार, समझौते में 30 दिनों के अंदर “ईरानी व्यवस्था” के तहत जलडमरूमध्य खोलने की बात है।
इजरायल के हमले और ट्रंप की प्रतिक्रिया
समझौता होने के बावजूद रविवार को इजरायल ने बेरूत पर हवाई हमला किया। दाहिये इलाके में एक इमारत पर हमला हुआ, जिसमें तीन लोग मारे गए और छह घायल हुए। इजरायल ने कहा कि उसने हिजबुल्लाह के वरिष्ठ कमांडरों को निशाना बनाया, क्योंकि हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल में तीन प्रोजेक्टाइल दागे थे।
ट्रंप ने इस हमले पर इजरायल से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने एक्सियोस को बताया कि इस हमले से हस्ताक्षर में कुछ घंटों की देरी हुई है। ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से नाराजगी जताई और कहा कि उनका “कोई फैसला नहीं है”।
ईरान ने इस हमले की निंदा की। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद-बागेर घलीबाफ ने कहा कि यह हमला दिखाता है कि अमेरिका या तो अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने की इच्छा नहीं रखता या क्षमता नहीं है। ईरान के सैन्य कमांडर जनरल मोहम्मद जाफर असादी ने कहा कि इन अपराधों का जवाब दिया जाएगा। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया और “मजबूत जवाब” की चेतावनी दी।
समझौते की मुख्य बातें
समझौते में ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए फिर से खोल देगा। युद्ध से पहले यहां दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल और गैस गुजरता था। इसके बदले अमेरिका अपनी ब्लॉकेड हटा लेगा और ईरान को तेल बेचने की इजाजत देगा, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिलेगी। यह प्रारंभिक समझौता है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े मुद्दे 60 दिनों में आगे की बातचीत में तय होंगे। कई लोग इसे लेकर संशय जता रहे हैं क्योंकि 2015 का समझौता इससे कहीं ज्यादा समय और मेहनत से हुआ था। ईरान ने हमेशा कहा था कि समझौता सभी मोर्चों को कवर करे, खासकर लेबनान को। लेबनान में इजरायल ने व्यापक अभियान चलाया है और दक्षिण के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर रखा है।
दोनों तरफ की प्रतिक्रियाएं
इजरायल में इस समझौते पर काफी चिंता है। लोग कह रहे हैं कि इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइलों या हिजबुल्लाह जैसे गुटों को समर्थन रोकने की कोई शर्त नहीं है। नेतन्याहू ट्रंप का समर्थन करते हैं लेकिन उन्हें चुनाव की चुनौती का सामना है। ट्रंप की अपनी पार्टी के कुछ लोग भी इस समझौते की आलोचना कर रहे हैं। दुनिया की अर्थव्यवस्था को राहत मिलने में समय लगेगा क्योंकि सुरक्षित नौवहन और बुनियादी ढांचे की मरम्मत में महीनों लग सकते हैं।















