प्रयागराज । वर्तमान समय बौद्धिक युद्ध (Intellectual Warfare) का युग है, जिसमें वैचारिक रणनीतियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। नई तकनीकों और संचार माध्यमों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से सूचनाओं को खंड और ग्राम स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
यह बातें शनिवार को विश्व हिंदू परिषद (VHP) काशी प्रांत के ‘परिषद शिक्षा वर्ग’ के छठवें दिन कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के क्षेत्र मार्ग प्रमुख राजेन्द्र सक्सेना ने कहीं।
“प्रचार विभाग संगठन की आंख, कान और नाक है”
राजेन्द्र सक्सेना ने संगठन में प्रचार-प्रसार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी जन संगठन के लिए उसका ‘प्रचार-प्रसार विभाग’ अत्यंत महत्वपूर्ण अंग होता है।
उन्होंने कहा-
“यह विभाग संगठन की आंख, कान और नाक बनकर कार्य करता है। यह सूचनाओं के संग्रहण, प्रसारण और गलत सूचनाओं के निराकरण में अहम भूमिका निभाता है। संगठन में प्रसिद्धि, नाम छपने या सम्मान पाने की मानसिकता नहीं, बल्कि कर्म को ही सर्वोच्च माना जाता है।”
सोशल मीडिया और ‘नैरेटिव’ की लड़ाई
इंटरनेट और डिजिटल मीडिया की ताकत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया के विस्तार ने पूरी दुनिया के विचार प्रवाह को एक मंच पर ला खड़ा किया है।
कार्यकर्ताओं को दिया गया मार्गदर्शन:
- सही दृष्टिकोण: प्रचार विभाग की जिम्मेदारी केवल सूचना प्रसारित करना नहीं, बल्कि समाज, सरकार और मीडिया में चल रहे विषयों पर सही दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है।
- सकारात्मक नैरेटिव: सकारात्मक नैरेटिव तैयार करना और गलत नैरेटिव का समय पर मुखरता से उत्तर देना आवश्यक है।
- प्लेटफॉर्म्स का उपयोग: प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, वेब मीडिया और सोशल मीडिया (जैसे ट्विटर/X, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप) का प्रभावी उपयोग करें।
- सतत अध्ययन: कार्यकर्ताओं को अध्ययनशील, जागरूक और संगठनात्मक सोच विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।
“सनातन परंपराओं के ध्वजवाहक बनें”: डॉ. राज नारायण सिंह
कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद काशी प्रांत के मंत्री डॉ. राज नारायण सिंह ने भी कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि संगठन सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय पुनर्जागरण के लिए अनवरत कार्य कर रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक की है। सनातन परंपराओं के ध्वजवाहक बनकर भावी पीढ़ी को संस्कृति और राष्ट्र के प्रति प्रेरित करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय चेतना के दो प्रमुख प्रेरणा स्रोतों— डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार तथा श्री गुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) के जीवन और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर भी प्रकाश डाला।
योगाभ्यास और प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति
इस परिषद शिक्षा वर्ग में कार्यकर्ताओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए उन्हें नियमित रूप से योगासन और प्राणायाम का अभ्यास भी कराया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं-
- दिवाकर नाथ त्रिपाठी (क्षेत्र सत्संग प्रमुख)
- नितिन (प्रांत संगठन मंत्री)
- सुरेश अग्रवाल (प्रांत उपाध्यक्ष)
- बृजभूषण महेश सिंह (मुख्य शिक्षक)
- रचना सिंह (मातृशक्ति सह प्रमुख)
- शुभांगी सिंह (प्रांत सहसंयोजिका)
- डॉ. दीपा यादव सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता।

















