उन्नाव। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित ‘संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य)’ का समापन समारोह उन्नाव में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सह क्षेत्र कार्यवाह अनिल जी और मुख्य अतिथि के तौर पर अन्तरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सदस्य भन्ते शील रतन जी उपस्थित रहे, जिन्होंने स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन किया।
“संघ का उद्देश्य व्यक्तित्व निर्माण कर राष्ट्रभक्त समाज बनाना है”
मुख्य वक्ता सह क्षेत्र कार्यवाह अनिल जी ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संघ के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि संघ का मुख्य ध्येय व्यक्तित्व निर्माण के माध्यम से एक संगठित, सक्षम एवं राष्ट्रभक्त समाज का निर्माण करना है। संघ की ‘शाखा पद्धति’ व्यक्ति निर्माण का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम है, जिसके द्वारा समाज जागरण एवं व्यवस्था परिवर्तन का कार्य निरंतर चल रहा है।

“संघ शिक्षा वर्ग केवल शारीरिक अथवा बौद्धिक प्रशिक्षण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह स्वयंसेवकों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का माध्यम है। वर्ग में प्राप्त संस्कार स्वयंसेवकों को राष्ट्र एवं समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराते हैं। यह वर्ग त्याग, तपस्या, समर्पण और अनुशासन का प्रशिक्षण प्रदान करता है।” – अनिल जी
समाज की चुनौतियां और ‘पंच परिवर्तन’ का आह्वान
वर्तमान राष्ट्रीय और वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए अनिल जी ने कहा कि भारत आज भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है। विश्व पटल पर भारत की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने समाज के समक्ष उपस्थित चुनौतियों के प्रति भी चेताया,
जिनमें शामिल हैं-
- युवाओं में राष्ट्रभावना का क्षय
- जनसंख्या असंतुलन
- अंधाधुंध पाश्चात्य अनुकरण और अत्यधिक भौतिकता
- जीवन मूल्यों में हो रही भारी गिरावट
इन सभी चुनौतियों के समाधान के रूप में उन्होंने संघ द्वारा प्रतिपादित “पंच परिवर्तन” की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि यदि समाज (1) परिवार प्रबोधन, (2) पर्यावरण संरक्षण, (3) सामाजिक समरसता, (4) स्वबोध, तथा (5) नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता अपनाए, तो राष्ट्र जीवन में व्यापक सकारात्मक सुधार संभव है।
उन्होंने “वसुधैव कुटुम्बकम्” को भारतीय संस्कृति का मूल आधार बताया।
“स्वयंसेवक अपनी गली को बेहतर बना दें, तो भारत बदल जाएगा”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भन्ते शील रतन (सदस्य, अन्तरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान एवं अध्यक्ष, बुद्धिस्ट सोसायटी फ़ार अंजू एंड सोशल वेलफेयर, लखनऊ) ने स्वयंसेवकों में नई ऊर्जा का संचार किया।

उन्होंने कहा कि यदि शरीर स्वस्थ होता है, तो मन भी स्वस्थ और प्रसन्न रहता है। भन्ते जी ने विश्वास जताते हुए कहा-
“भारत पहले भी विश्व गुरु था और आगे भी रहेगा। राष्ट्र और समाज परिवर्तन एक दिन का काम नहीं है। यदि एक-एक स्वयंसेवक अपने घर और अपनी गली को बेहतर बना दे, तो पूरा भारत स्वतः बदल जाएगा।”
प्रशिक्षण वर्ग के आंकड़े: 334 स्वयंसेवकों ने लिया प्रशिक्षण
गत 22 मई से चल रहे इस प्रशिक्षण वर्ग का समापन शनिवार को हो गया। आज रविवार सुबह अवध प्रांत के विभिन्न जिलों से आए हुए शिक्षार्थी दीक्षान्त समारोह के बाद अपने-अपने घरों को प्रस्थान करेंगे।
इस वर्ग की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार रहीं-
- कुल शिक्षार्थी: 334 स्वयंसेवक अलग-अलग आयु वर्ग से शामिल हुए।
- शैक्षिक पृष्ठभूमि: 24 परास्नातक (PG), 64 स्नातक (UG), 12 शिक्षक और 192 इंटरमीडिएट के छात्र।
- क्षेत्र: 26 जिलों के 169 खण्ड/नगर के 281 स्थानों से प्रतिनिधित्व।
- आत्मनिर्भरता का अनूठा उदाहरण: सभी शिक्षार्थियों ने वर्ग का शुल्क, गणवेश और यात्रा का व्यय भार स्वयं वहन करते हुए सहभागिता की।

समापन समारोह में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम के सफल आयोजन और समापन के अवसर पर संघ के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख हैं-
अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख नवल जी, वर्ग के सर्वाधिकारी प्रमोद जी, वर्ग कार्यवाह कृष्ण कुमार जी, सर्व व्यवस्था प्रमुख लालता प्रसाद जी, सह व्यवस्था प्रमुख सुशील जी, प्रान्त प्रचारक कौशल जी, सह प्रांत प्रचारक संजय जी, प्रांत प्रचारक प्रमुख यशोदा नन्द जी, सह प्रांत कार्यवाह संजय जी, सम्पर्क प्रमुख गंगा सिंह जी, प्रान्त प्रचार प्रमुख डा. अशोक दुबे जी, सामाजिक समरसता प्रमुख राज किशोर जी, डा. अविनाश जी।
इसके अलावा जनप्रतिनिधि शिक्षक, शिक्षार्थी एवं नगर के बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

















